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कहां गए कंडम कूड़ेदान
बरेली
Updated Mon, 05 Jan 2015 09:28 PM IST
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नगर निगम में अब तक सड़क निर्माण या टैक्स वसूली में ही घपले की बात कही जा रही थी। अब गैराज और स्टोर में रखे गए कंडम कूड़ेदान गायब होने की बात सामने आ रही है। डेढ़ सौ कंडम कूड़ेदानों के गायब होने की बात जिलाधिकारी तक पहुंचने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने पुराने कूड़ेदानों के गायब होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि वह जांच पूरी कर जल्द ही दोषी अफसर और कर्मचारियों से कूड़ेदान की कीमत की रिकवरी कराएंगे।
नगर निगम में हर साल 50 नए कूड़ेदान खरीदे जाते हैं। इनकी कीमत करीब 20 लाख रुपये होती है। पिछले एक दशक में दो करोड़ से ज्यादा कीमत के पांच सौ से ज्यादा लोहे के कूड़ेदान खरीदे गए। बाद में उनको कंडम दिखाकर गैराज या स्टोर में रखवाने के बहाने निर्धारित जगहों से उठवा लिया गया। इनमें से डेढ़ सौ से ज्यादा कंडम कूड़ेदान गायब हैं। शिकायत के बाद जिलाधिकारी संजय कुमार ने नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव को कंडम कूड़ेदान में हुए घपले की जांच के आदेश दिए हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एसपीएस सिंधू को ये जांच मिली है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी का आदेश मिलने के बाद वह कंडम कूड़ेदानों का रजिस्टर से मिलान गैराजों पर जाकर करेंगे। जांच में कूड़ेदान रजिस्टर में दर्ज संख्या से कम मिलने पर इसके जिम्मेदार जेड एसओ, मुख्य सफाई निरीक्षक और सफाई निरीक्षकों को माना जाएगा और इनकी कीमत की रिकवरी उनके वेतन से कराई जाएगी।
‘चार या पांच महीने पहले स्टोर के पुराने सामान की नीलामी हुई थी। इनमें कुछ पुराने कूड़ेदान भी थे। फिर भी कंडम कूड़ेदानों की वास्तविक संख्या पता लगाई जाएगी।’ डा. आईएस तोमर, मेयर
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नगर निगम में हर साल 50 नए कूड़ेदान खरीदे जाते हैं। इनकी कीमत करीब 20 लाख रुपये होती है। पिछले एक दशक में दो करोड़ से ज्यादा कीमत के पांच सौ से ज्यादा लोहे के कूड़ेदान खरीदे गए। बाद में उनको कंडम दिखाकर गैराज या स्टोर में रखवाने के बहाने निर्धारित जगहों से उठवा लिया गया। इनमें से डेढ़ सौ से ज्यादा कंडम कूड़ेदान गायब हैं। शिकायत के बाद जिलाधिकारी संजय कुमार ने नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव को कंडम कूड़ेदान में हुए घपले की जांच के आदेश दिए हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एसपीएस सिंधू को ये जांच मिली है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी का आदेश मिलने के बाद वह कंडम कूड़ेदानों का रजिस्टर से मिलान गैराजों पर जाकर करेंगे। जांच में कूड़ेदान रजिस्टर में दर्ज संख्या से कम मिलने पर इसके जिम्मेदार जेड एसओ, मुख्य सफाई निरीक्षक और सफाई निरीक्षकों को माना जाएगा और इनकी कीमत की रिकवरी उनके वेतन से कराई जाएगी।
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‘चार या पांच महीने पहले स्टोर के पुराने सामान की नीलामी हुई थी। इनमें कुछ पुराने कूड़ेदान भी थे। फिर भी कंडम कूड़ेदानों की वास्तविक संख्या पता लगाई जाएगी।’ डा. आईएस तोमर, मेयर
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