{"_id":"62a256feb2211c18b46071ca","slug":"nagar-nigam-bareilly-news-bly4877492182","type":"story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम के भवन निर्माण में खेल, 12.5 का प्रोजेक्ट 17 करोड़ के पार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नगर निगम के भवन निर्माण में खेल, 12.5 का प्रोजेक्ट 17 करोड़ के पार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। नगर निगम के भवन निर्माण में बड़ा खेल हो रहा है। इसी का नतीजा है कि 12.50 करोड़ का यह प्रोजेक्ट बढ़कर 17 करोड़ के पार पहुंच गया है। अब नगर निगम ने नगर निगम बोर्ड से मंजूर हुए पांच करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति मांगी है। इस पर पार्षदों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा, इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए। एक ही ठेकेदार को सभी कार्य दे दिए गए हैं। काम अभी अधूरा है। आरोप हैं कि करोड़ों खर्च करने के बाद भी सभी कर्मचारियों को इस भवन में जगह नहीं मिल पाएगी। इतनी बड़ी रकम से बरेली को एक फ्लाईओवर मिल जाता।
नगर निगम का नया भवन बनाने का प्रस्ताव सपा शासनकाल में अवस्थापना निधि से पास हुआ था। इस पर 12.50 करोड़ रुपये खर्च होने थे। 1754 वर्ग मीटर में यह भवन बनना था। तीन मंजिला भवन निर्माण के लिए वर्ष 2018 में टेंडर आमंत्रित किए गए और गाजियाबाद की एक फर्म को काम दे दिया गया। शुरूआत तेज हुई लेकिन बाद में काम धीमा होता गया। लोगों ने नगर निगम को कटघरे में खड़ा किया तो काम में तेजी आई लेकिन साढ़े चार साल में इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया, जबकि दो साल में यह कार्य पूरा होना था। बताते हैं कि नगर निगम ने ठेकेदार को अब तक 10.87 करोड़ का भुगतान भी कर दिया है।
नहीं किया गया दोबारा टेंडर
आरोप है कि इसी बीच नगर निगम ने मीटिंग हाल से लेकर अन्य कार्य कराने के लिए उसी ठेकेदार का चयन कर लिया जबकि इसके लिए नए टेंडर आमंत्रित किए जाने थे। इन सभी कार्यों के लिए पांच करोड़ का बजट और बढ़ गया। इस तरह 12.50 करोड़ का प्रोजेक्ट 17.50 करोड़ का हो गया। नियम कहते हैं कि 10 फीसदी तक बजट बढ़ता हो तभी संबंधित ठेकेदार कार्य कर सकता है लेकिन इससे अधिक बजट बढ़ता है तो उसके लिए दोबारा टेंडर होता है। बताते हैं कि मंजूर पांच करोड़ रुपये न मिलने के कारण काम बंद पड़ा है। केवल बिजली की तार और लाइटें जरूर लगाई जा रही हैं।
विज्ञापन
फ्री होल्ड करवाए बिना ही शुरू हो गया था निर्माण
सपा सरकार के शासनकाल में नगर निगम ने जमीन को फ्री होल्ड कराने के लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव स्वीकृत भी हो गया। उस वक्त के सर्किल रेट के मुताबिक नगर निगम को करीब डेढ़ करोड़ रुपये जमा करने थे लेकिन धन के अभाव में मामला अटका तो फिर आगे नहीं बढ़ सका। अब फ्री होल्ड राशि मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। यह राशि बचाने के लिए ही नगर निगम ने जमीन को फ्री होल्ड कराए बिना ही काम शुरू करा दिया था।
नगर निगम भवन निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये लागत में बढ़ाए गए हैं। एक ही ठेकेदार को बार-बार काम दिया गया है। इतनी रकम में बरेली में एक फ्लाईओवर बन जाता। इस प्रकरण की नगर निगम जांच कराए। - राजेश अग्रवाल, पार्षद दल नेता
भवन निर्माण के साथ ही मीटिंग हाल आदि के कार्य कराने के कारण बजट बढ़ा है। बजट खर्च करने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। टेंडर प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई है। नियमों का पालन हुआ है। - अभिषेक आनंद, नगरायुक्त
विज्ञापन
नगर निगम का नया भवन बनाने का प्रस्ताव सपा शासनकाल में अवस्थापना निधि से पास हुआ था। इस पर 12.50 करोड़ रुपये खर्च होने थे। 1754 वर्ग मीटर में यह भवन बनना था। तीन मंजिला भवन निर्माण के लिए वर्ष 2018 में टेंडर आमंत्रित किए गए और गाजियाबाद की एक फर्म को काम दे दिया गया। शुरूआत तेज हुई लेकिन बाद में काम धीमा होता गया। लोगों ने नगर निगम को कटघरे में खड़ा किया तो काम में तेजी आई लेकिन साढ़े चार साल में इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया, जबकि दो साल में यह कार्य पूरा होना था। बताते हैं कि नगर निगम ने ठेकेदार को अब तक 10.87 करोड़ का भुगतान भी कर दिया है।
विज्ञापन
नहीं किया गया दोबारा टेंडर
आरोप है कि इसी बीच नगर निगम ने मीटिंग हाल से लेकर अन्य कार्य कराने के लिए उसी ठेकेदार का चयन कर लिया जबकि इसके लिए नए टेंडर आमंत्रित किए जाने थे। इन सभी कार्यों के लिए पांच करोड़ का बजट और बढ़ गया। इस तरह 12.50 करोड़ का प्रोजेक्ट 17.50 करोड़ का हो गया। नियम कहते हैं कि 10 फीसदी तक बजट बढ़ता हो तभी संबंधित ठेकेदार कार्य कर सकता है लेकिन इससे अधिक बजट बढ़ता है तो उसके लिए दोबारा टेंडर होता है। बताते हैं कि मंजूर पांच करोड़ रुपये न मिलने के कारण काम बंद पड़ा है। केवल बिजली की तार और लाइटें जरूर लगाई जा रही हैं।
विज्ञापन
फ्री होल्ड करवाए बिना ही शुरू हो गया था निर्माण
सपा सरकार के शासनकाल में नगर निगम ने जमीन को फ्री होल्ड कराने के लिए जिला प्रशासन को प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव स्वीकृत भी हो गया। उस वक्त के सर्किल रेट के मुताबिक नगर निगम को करीब डेढ़ करोड़ रुपये जमा करने थे लेकिन धन के अभाव में मामला अटका तो फिर आगे नहीं बढ़ सका। अब फ्री होल्ड राशि मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। यह राशि बचाने के लिए ही नगर निगम ने जमीन को फ्री होल्ड कराए बिना ही काम शुरू करा दिया था।
नगर निगम भवन निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये लागत में बढ़ाए गए हैं। एक ही ठेकेदार को बार-बार काम दिया गया है। इतनी रकम में बरेली में एक फ्लाईओवर बन जाता। इस प्रकरण की नगर निगम जांच कराए। - राजेश अग्रवाल, पार्षद दल नेता
भवन निर्माण के साथ ही मीटिंग हाल आदि के कार्य कराने के कारण बजट बढ़ा है। बजट खर्च करने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। टेंडर प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई है। नियमों का पालन हुआ है। - अभिषेक आनंद, नगरायुक्त