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सौहार्द की शहनाई: समयुन खान ने कराई आर्थिक तंगी से जूझे रहे हिंदू परिवार की बेटी की शादी, किया कन्यादान
Mon, 12 Jun 2023 10:40 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 12 Jun 2023 10:40 AM IST
सार
जहां एक तरफ कुछ लोग समाज को जाति धर्म के नाम पर बांटने का प्रयास करते हैं, वहीं ऐसे लोग भी हैं, जो समाज को भाईचारे का पैगाम दे रहे हैं। बरेली में समयुन खान ने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की है। उन्होंने आर्थिक तंगी से जूझ रहे हिंदू परिवार की लड़की का विवाह कराया।
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तान्या और उसके परिवार के साथ समयुन खान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मशहूर शायर बशीर बद्र का शेर है कि सात संदूकों में भर कर दफ्न कर दो नफरतें... आज इंसां को मोहब्बत की जरूरत है बहुत। यह शेर रविवार को बरेली के सुभाष नगर की पाल कॉलोनी में मूर्त रूप लेता दिखाई दिया। यहां एक गरीब हिंदू परिवार की बेटी तान्या का कन्यादान मुस्लिम समाज की समयुन खान ने किया।
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भाईचारा किसी भी प्रगतिशील समाज की मूलभूत जरूरत है। मगर समाज अलग-अलग धर्मों और जातियों में बंटा है। समस्या यह है कि कई बार यह बंटवारा कड़वाहटों की वजह भी बनता है। ऐसे में जरूरत होती है कई मौकों पर सौहार्द की मिसाल कायम करने की। रविवार को ऐसी की एक सौहार्द की शहनाई सुभाष नगर पाल कॉलोनी में बजी। यहां तान्या की बरात लखीमपुर से आ आई। दूल्हा बने प्रेम सागर। मगर स्वागत और कन्यादान के लिए समयुन खान खड़ी थीं।
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समयुन ने तान्या के माता-पिता के साथ बरात का स्वागत किया। वरमाला के दौरान मौजूद रहीं और जब कन्यादान का समय आया तो पिता ने समयुन से कहा कि बेटी की शादी तो आपने कराई है। यह अधिकार भी मैं आपको देता हूं। ऐसे में समयुन खान ने तान्या का कन्यादान भी हिंदू रीति रिवाजों के साथ किया। पूरे मोहल्ले ने इस प्रयास की सराहना करते हुए नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया।
तान्या के परिवार ने मांगा था सहयोग
तान्या का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पिता संतोष सागर मोची का काम करते हैं। मां पारो घर पर रहती हैं। बेटी तान्या भी घर पर रहकर मां के काम में हाथ बंटाती है। पिता शादी के लिए लड़का ढूंढ रहे थे। लखीमपुर के प्रेम सागर के साथ शादी की बात चली। सबकुछ तय हो गया। अब शादी करने में पैसों का संकट सामने आया।ये भी पढ़ें- सालभर उगा सकेंगे मशरूम: नई तकनीक के साथ खेती करने पर मिलेगा आठ लाख का अनुदान, यह है योजना
पिता ने समयुन से मदद मांगी। समयुन कोविड के कठिन दौर में भी इस परिवार की मदद कर चुकी हैं तो यह परिवार अभी तक संपर्क में था। ऐसे में समयुन ने तान्या की शादी का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया और अपनी टीम के साथ जुट गईं।
लावारिस मरीजों को पहुंचाती हैं अस्पताल
समयुन खान पिछले कई वर्षों से महिला अधिकारों के लिए काम कर रही हैं। सड़क किनारे लावारिस हाल में मिलने वाले मरीजों को जिला अस्पताल पहुंचाती हैं और इलाज कराती हैं। यहां टीम के साथ मरीज के ठीक होने तक उसकी देखभाल करती हैं।ये भी पढ़ें- 10 साल इश्क और फिर खूनी खेल: पूजा जिसके लिए घर छोड़कर आई, वही बन गया कसाई; बेदर्दी से ली जान
इसके अलावा आईएमए की टीम के साथ हर महीने रक्तदान कराती आ रही हैं। जरूरत पड़ने पर टीम के सदस्य भी रक्तदान करते हैं। कोविड के कठिन समय में समयुन खान ने टीम के साथ सुभाष नगर, रेलवे रोड व बदायूं रोड के कई घरों में जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाया। घरों में गलियों में सैनेटाइजर का छिड़काव किया।