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महिलाओं को भी बदलना होगा
बरेली
Updated Mon, 19 Jan 2015 12:34 AM IST
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भोपाल से आईं मशहूर शायर अंजुम रहबर ने कहा कि महिला उत्पीड़न आज का मसला नहीं यह पहले से होता रहा है। जरूरत इस बात की भी है कि महिलाओं को खुद भी बदलना पड़ेगा। आज जो घटनाएं घट रही हैं उनमें से कुछ के लिए कभी महिला भी खतावार हो सकती है। खास कर पहनावे पर ध्यान देने की जरूरत है। सच तो यह है कि भारतीय संस्कृति से हम परे होते जा रहे हैं। वहीं उन्होंने इस्लामी आतंकवाद के मुद्दे पर कहा कि इसे किसी मजहब से नहीं जोड़ना चाहिए क्योंकि आतंकवादी का कोई मजहब ही नहीं है।
वेस्टर्न कल्चर समाज को कर रहा है प्रभावित
बरेली। दिल्ली से आईं कवयित्री सरिता शर्मा ने कहा कि महिलाओं के साथ जितनी घटनाएं हो रही हैं, इस तरह की घटनाएं पहले भी होती थीं मगर दबा दी जाती थीं। आज मीडिया ज्यादा मजबूत है इसलिए घटनाएं सामने आ रही हैं। पहले महिलाओं में भी हिम्मत नहीं थी और सबसे बढ़ कर महिलाओं को ज्यादा दोषी माना जाता था। कानून भी इतना सख्त नहीं था। उन्होंने कहा कि लड़कियों को भी सलीके वाले कपड़े पहनने चाहिए। उनकी जिद होती है कि रात में दो बजे वह क्यों नहीं निकल सकती हैं, तो यह सही थोड़ी है। उन्होंने कहा कि इसीलिए पुरानी मान्यताओं में आज भी दम है। वह इन तमाम बातों से बचाती हैं।
आतंकवाद नहीं देश में गुरबत है बड़ा मुद्दा
बरेली। भोपाल से आए मशहूर शायर मंजर भोपाली ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि आज आतंकवाद कोई समस्या नहीं है, यह बे मायने है। देश की सबसे बड़ी समस्या गुरबत (गरीबी) है। गरीबी दूर हो गई तो काफी मसले खुद ही हल हो जाएंगे। झारखंड में जो हो रहा है वह इस समस्या की जड़ है।
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मुस्लिम समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह यह नहीं मानते कि मुस्लिम अशिक्षित हैं। यह दस साल पुरानी बात है। आज मुस्लिम शिक्षित हो चुका है। उसमें पढ़ने और आगे बढ़ने का जज्बा है। मगर हमसे कहीं चूक हो रही है। मुस्लिम संगठनों को भी चाहिए कि वह वेलफेयर के काम के साथ बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाएं।
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बरेली। दिल्ली से आईं कवयित्री सरिता शर्मा ने कहा कि महिलाओं के साथ जितनी घटनाएं हो रही हैं, इस तरह की घटनाएं पहले भी होती थीं मगर दबा दी जाती थीं। आज मीडिया ज्यादा मजबूत है इसलिए घटनाएं सामने आ रही हैं। पहले महिलाओं में भी हिम्मत नहीं थी और सबसे बढ़ कर महिलाओं को ज्यादा दोषी माना जाता था। कानून भी इतना सख्त नहीं था। उन्होंने कहा कि लड़कियों को भी सलीके वाले कपड़े पहनने चाहिए। उनकी जिद होती है कि रात में दो बजे वह क्यों नहीं निकल सकती हैं, तो यह सही थोड़ी है। उन्होंने कहा कि इसीलिए पुरानी मान्यताओं में आज भी दम है। वह इन तमाम बातों से बचाती हैं।
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आतंकवाद नहीं देश में गुरबत है बड़ा मुद्दा
बरेली। भोपाल से आए मशहूर शायर मंजर भोपाली ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि आज आतंकवाद कोई समस्या नहीं है, यह बे मायने है। देश की सबसे बड़ी समस्या गुरबत (गरीबी) है। गरीबी दूर हो गई तो काफी मसले खुद ही हल हो जाएंगे। झारखंड में जो हो रहा है वह इस समस्या की जड़ है।
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मुस्लिम समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह यह नहीं मानते कि मुस्लिम अशिक्षित हैं। यह दस साल पुरानी बात है। आज मुस्लिम शिक्षित हो चुका है। उसमें पढ़ने और आगे बढ़ने का जज्बा है। मगर हमसे कहीं चूक हो रही है। मुस्लिम संगठनों को भी चाहिए कि वह वेलफेयर के काम के साथ बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाएं।