बरेली नगर निगम का हाल: प्लॉट और छोटी सी कोठरी पर लगा दिया 15 लाख रुपये का टैक्स, कर दिया सील
बरेली में नगर निगम की टीम ने आफताब हुसैन के प्लॉट और उस पर बनी छोटी सी कोठरी व टीनशेड पर 15 लाख 34 हजार 757 रुपये टैक्स लगा दिया गया। यही नहीं बिना कोई नोटिस 17 फरवरी को नगर निगम के कर विभाग ने परिसर भी सील कर दिया।
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बरेली में नगर निगम के टैक्स विभाग की मनमानी आम आदमी पर भारी पड़ रही है। अजब-गजब टैक्स लगाया जा रहा है और आपत्ति पर सुनवाई के बगैर परिसर सील भी कर दिए जा रहे हैं। ताजा मामला हजियापुर की मलिन बस्ती का है, जहां आफताब हुसैन के प्लॉट और उस पर बनी छोटी सी कोठरी और टीनशेड पर 15 लाख 34 हजार 757 रुपये टैक्स लगा दिया गया। यही नहीं बिना कोई नोटिस 17 फरवरी को नगर निगम के कर विभाग ने परिसर भी सील कर दिया।
निगम ने जिस नोटिस पर परिसर को सील किया, वह भी गजब है। नोटिस में भवन स्वामी के कॉलम में लिखा है कि नाम अंकित नहीं है। पार्षदों ने विरोध किया तब यह मुद्दा सामने आया। अब निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने दोबारा कर का मूल्यांकन कराने के आश्वासन के साथ पीड़ित को राहत दिलाने का भरोसा दिया है।
पार्षदों का कहना है कि निगम अधिकारियों ने कर निर्धारण का फार्मूला आम जनता को अभी तक न बताया और न पूछने पर समझाया। सिर्फ टैक्स के बकाया का नोटिस थमा दिए जाते हैं। नोटिस मिलने पर भी अगर कोई हिसाब मांगता है तो उसे दौड़ाया जाता है। शासन से जब वसूली का दबाव पड़ता है तो मकान और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर मनमाने ढंग से सील ठोंक दी जाती है।
केस-1: डबल आईडी से भी बना दिए बकाएदार
राजेंद्रनगर के भवन संख्या ए-250 के निवासी अनिल कुमार ने बताया कि उनके मकान के दो आईडी नगर निगम ने बना दिए। एक आईडी पर वह लगातार टैक्स जमा कर रहे हैं और दूसरी आईडी को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रार्थना पत्र देने के तीन महीने बाद भी कुछ नहीं हुआ है। दूसरी आईडी पर 1,22,592 का बकाया दर्शाया गया जबकि उन पर एक भी रुपया बकाया नहीं है। वह 31 मार्च 2024 तक का टैक्स जमा कर चुके हैं।
राजेंद्रनगर के भवन संख्या ए-342 की दो आईडी हैं। भवन स्वामी रणधीर सिंह का कहना है कि पहली आईडी पर 196000 और दूसरी आईडी पर 167000 का बिल आया। वह पहली आईडी के नंबर पर एक लाख रुपये जमा कर चुके हैं। दूसरी आईडी निरस्त कराने के लिए एक महीने पहले प्रार्थना पत्र दिया था लेकिन अभी तक आईडी निरस्त नहीं हुई और न ही नगर निगम की ओर से किसी का फोन आया।
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी प्रदीप कुमार मिश्रा के अनुसार 15 लाख रुपये का टैक्स एक बड़े परिसर पर लगा था। इसमें भूखंड खरीदने वालों ने नगर निगम को सूचित नहीं किया। इसीलिए पूरे परिसर पर टैक्स लगा रहा और एक व्यक्ति को नोटिस पहुंच गया। अब प्रार्थना पत्र आया है, इसलिए पुनर्मूल्यांकन कराया जा रहा है। वहीं डबल आईडी के प्रकरण आज के नहीं बल्कि वर्षों पुराने हैं लेकिन जैसे-जैसे प्रभावित लोगों के प्रार्थना पत्र आ रहे हैं, उनकी एक आईडी खत्म करते हुए प्रकरण निस्तारित कराए जा रहे हैं।
डबल आईडी और मनमानी कर वसूली के मुद्दे नगर निगम की बोर्ड बैठक में 30 जनवरी को पार्षद सतीश कातिब मम्मा और सपा पार्षद दल के नेता गौरव सक्सेना ने प्रमुखता से उठाए थे। उप नगर आयुक्त पूजा त्रिपाठी ने कहा था कि नगर निगम डबल आईडी के प्रकरण खत्म कर रहा है। दोबारा डबल आईडी न बनने पाएं, इसके लिए लिए महापौर उमेश गौतम ने निर्देश दिए थे। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने बताया कि इसके लिए अब नया सॉफ्टवेयर विकसित कराया जा रहा है।
ये है हाल
10,000 से अधिक संपत्तियों की डबल आईडी
2600 करोड़ रुपये बोगस आईडी की वजह से निकल रही डिमांड