{"_id":"5da997ea8ebc3e013d653609","slug":"money-comes-in-four-hundred-account-through-terror-funding-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"टेरर फंडिंग मामला: चार सौ खातों के जरिए विदेशों से मंगाते थे पैसा, कई और खुलासे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टेरर फंडिंग मामला: चार सौ खातों के जरिए विदेशों से मंगाते थे पैसा, कई और खुलासे
Fri, 18 Oct 2019 04:19 PM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: Abhishek Singh
Updated Fri, 18 Oct 2019 04:19 PM IST
विज्ञापन
रुपया (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में फरार सदाकत और उसके साथियों ने धंतिया और आसपास के गांवों के किसानों के करीब चार सौ खाते दिल्ली समेत कई शहरों में खुलवाए थे। इनमें बाहर से धन मंगाया जाता था। खाताधारकों को तय कमीशन देकर रकम दूसरी जगह शिफ्ट की जाती थी। सूत्र बताते हैं कि गैंग के संबंध हैकर्स से भी थे जो नेपाल आदि देशों के बड़े लोगों के खाते से धन मंगा लेते थे। अब खाताधारक टेंशन में हैं। सदाकत और उसके साथियों के फरार होने के बाद उन्हें खुद के फंसने का डर सता रहा है।
विज्ञापन
फतेहगंज पश्चिम के गांव धंतिया, ट्यूलिया, बल्लिया, केशवपुर, हमीरपुर और सीबीगंज के तिलियापुर में सदाकत और उसके साथियों का तगड़ा नेटवर्क था। इन गांवों के किसानों और मजदूरों के खाते उन्होंने सेटिंग करके दिल्ली, मुरादाबाद और अन्य शहरों के बैंकों में खुलवा रखे थे। अनुमान है कि करीब चार सौ ऐसे खाते खुलवाए गए हैं। इनमें से कई में विदेशों से धन मंगाया गया और फिर दस फीसदी कमीशन खाताधारक को देकर रकम दूसरी जगह ट्रांसफर कर दी गई। रकम कहां से आती थी और कहां जाती थी, इस बारे में खाताधारक पूरी तरह अनजान थे।
विज्ञापन
सही मायने में तो खाताधारक के पास अपनी पासबुक, एटीएम कार्ड या चेकबुक भी नहीं रहती थी। उन्हें बस उनके कमीशन से मतलब होता था जो एकाध बार बैंक जाने पर ही मिल जाता था। ऐसे खाताधारकों की तलाश में दिल्ली और अन्य प्रदेशों की पुलिस गांवों में दबिश भी देती रही है। स्थानीय पुलिस भी छोटा-मोटा इनपुट मिलने पर ग्रामीणों को ले जाती थी और शंखा पुल पर ‘हिसाब-किताब’ करके छोड़ देती थी।
विज्ञापन
दिल्ली की जेल में है नन्हे
धंतिया निवासी नन्हे दिल्ली में करीब तीन महीने पहले हवाला के ही मामले में पकड़ा गया था। वह पहले खेती करता था। सदाकत के गैंग से जुड़ने के बाद वह प्रॉपर्टी डीलिंग के धंधे में उतर गया। तीन महीने से वह जेल में है। सदाकत के खास साथी सद्दाम का नन्हे दोस्त है और सद्दाम भी केस खुलने के बाद अंडरग्राउंड हो गया है।