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Bareilly News: स्मार्टफोन में उलझा मन, कहीं कलह में घुट रहा बचपन

Wed, 12 Aug 2026 11:13 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Wed, 12 Aug 2026 11:13 PM IST
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Minds engrossed in smartphones; childhood suffocating amidst discord.
बरेली। बच्चे स्मार्टफोन में उलझकर परिवार से दूर हो रहे हैं। कुछ मामलों में पारिवारिक कलह की वजह से भी बचपन घुट रहा है। चाइल्ड हेल्पलाइन के सामने आए हालिया मामलों में यह हकीकत उजागर हुई है। बच्चों की काउंसलिंग और परिवार से उनको दोबारा जोड़ने की पहल की जा रही है। चाइल्ड हेल्पलाइन के कोआर्डिनेटर सोनू सिंह ने बताया से इस साल जुलाई तक आए 919 मामलों में से कई में बच्चों के व्यवहार और पारिवारिक माहौल पर भी काम करना पड़ा।
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इन मामलों में बच्चों के खोने और लैंगिक अपराधों से लेकर बाल श्रम और बाल विवाह तक की समस्याएं शामिल हैं। कुछ मामलों में पारिवारिक विवाद के कारण बच्चों की सुरक्षा पर संकट खड़ा हो रहा है। ऐसे मामलों में बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि परिवार को जिम्मेदारी के लिए तैयार करना और बच्चे की मानसिक स्थिति को समझना भी जरूरी होता है।
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इन मामलों में उलझ रहे बच्चे
इस साल जुलाई तक 427 बच्चों के घर से निकलने के मामले सामने आए हैं। 235 मामले लैंगिक अपराधों से जुड़े हैं। बाल श्रम से 143 किशोर मुक्त कराए गए। 53 को बाल विवाह से बचाया गया। 61 अन्य मामले भी सामने आए।
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बच्चे को दें समय, बनाएं दोस्त
बरेली कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. हेमा खन्ना के अनुसार, जरा सी डांट पर बच्चों का घर छोड़ देना या चोरी कर भागना महज शरारत नहीं है। इसके पीछे भावनात्मक असुरक्षा, उपेक्षा, पारिवारिक तनाव, कठोर अनुशासन या ध्यान आकर्षित करने की चाह हो सकती है। ऐसे में बच्चे को डांटने के बजाय बदले व्यवहार की वजह को समझकर उचित परामर्श देना जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को समय दें और उनको अपना दोस्त बनाएं।

केस 1

फतेहगंज पश्चिमी क्षेत्र में एक बालक का स्मार्टफोन के प्रति लगाव इतना गहरा हो गया कि वह परिजनों से दूरी बनाने लगा। चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने उसकी काउंसलिंग शुरू की। उसे समझाया गया कि मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल पढ़ाई, स्वास्थ्य, व्यवहार और पारिवारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। परिवार के महत्व को समझाने के बाद बच्चे ने अपनी गलती स्वीकारी और परिजनों के साथ रहने पर सहमति जताई।

केस 2


नवाबगंज क्षेत्र में पारिवारिक विवाद के चलते दो मासूम असुरक्षित और लावारिस हो गए। मामला चाइल्ड हेल्पलाइन के संज्ञान में आया। पूछताछ में बच्चाें ने बताया कि घर में रोज माता-पिता में झगड़े होते हैं और कोई उनका ध्यान नहीं रखता। टीम ने बच्चों के पिता से संपर्क कर उन्हें बच्चों की जिम्मेदारी लेने के लिए समझाया। प्रयासों के बाद पिता ने दोनों बच्चों की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों मासूमों को उनके पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
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