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रूहेलखंड मेडिकल कालेज गेट से ऑक्सीजन की कमी बताकर मरीजों को वापस कर रहे सुरक्षाकर्मी
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बरेली। एक ही दिन में सात कोरोना संक्रमितों की मौत के बाद बृहस्पतिवार को रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के मेन गेट पर डाला गया ताला शनिवार को तीसरे दिन भी नहीं खुला। शनिवार को भी मेडिकल कॉलेज में आए कई मरीजों को सुरक्षाकर्मियों ने ऑक्सीजन और बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर गेट से ही लौटा दिया।
रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को सात कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई थी जिसके बाद मेन गेट को बंद कर दिया गया था। इसके बाद अब तक कई मरीजों को यहां से लौटा दिया गया। शनिवार को सोनभद्र से एंबुलेंस में गंभीर हालत में लाई गई मरीज ममता को गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। ममता के तीमारदार मेहरबान सिंह ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि मरीज एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर है और उसकी की हालत बहुत गंभीर है मगर इसके बावजूद सुरक्षा कर्मियों ने यह कहते हुए गेट खोलने से इनकार कर दिया कि यहां न ऑक्सीजन उपलब्ध है न कोई बेड।
मेहरबान सिंह ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि मरीज कोरोना संक्रमित नहीं है, फिर भी बात नहीं बनी। शुक्रवार को भी एंबुलेंस से रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे दो कोरोना संक्रमितों को भी करीब चार घंटे तक गेट पर ही खड़ा रखा गया था। दोनों ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे फिर भी सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर दाखिल नहीं होने दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उन्हें भर्ती किया गया था।
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रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को सात कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई थी जिसके बाद मेन गेट को बंद कर दिया गया था। इसके बाद अब तक कई मरीजों को यहां से लौटा दिया गया। शनिवार को सोनभद्र से एंबुलेंस में गंभीर हालत में लाई गई मरीज ममता को गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। ममता के तीमारदार मेहरबान सिंह ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि मरीज एंबुलेंस में ऑक्सीजन सपोर्ट पर है और उसकी की हालत बहुत गंभीर है मगर इसके बावजूद सुरक्षा कर्मियों ने यह कहते हुए गेट खोलने से इनकार कर दिया कि यहां न ऑक्सीजन उपलब्ध है न कोई बेड।
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मेहरबान सिंह ने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि मरीज कोरोना संक्रमित नहीं है, फिर भी बात नहीं बनी। शुक्रवार को भी एंबुलेंस से रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज पहुंचे दो कोरोना संक्रमितों को भी करीब चार घंटे तक गेट पर ही खड़ा रखा गया था। दोनों ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे फिर भी सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर दाखिल नहीं होने दिया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद उन्हें भर्ती किया गया था।
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