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Bareilly News: मकान निर्माण के दौरान करंट लगने से राजमिस्त्री की मौत
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कस्बे के मोहल्ला ब्रह्मनान के थे निवासी, हलद्वानी में काम करते वक्त हुई घटना, हादसे ने उजाड़ा परिवार
शेरगढ़। कस्बा के मोहल्ला ब्रह्मनान निवासी राजमिस्त्री धर्मपाल मौर्य (30) की उत्तराखंड के हल्द्वानी में मकान निर्माण के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिचितों के अनुसार, कस्बा के मोहल्ला ब्रह्मनान निवासी धर्मपाल मौर्य हल्द्वानी में राजमिस्त्री का काम करने गए थे। वह चौपला चौराहा, दबूदूंगा के निकट वृद्धाश्रम के पास भवन निर्माण का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली पानी मोटर के तार में किसी तरह करंट उतर आया। धर्मपाल इसकी चपेट में आ गए। उनकी मौत की सूचना मिलते ही परिजन भी हल्द्वानी पहुंच गए। पुलिस ने शव का पोस्टमाॅर्टम कराया है। इसके बाद परिजन शव को शेरगढ़ कस्बे में अपने घर ले आए, जहां उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। संवाद
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परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
धर्मपाल के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। करीब सात वर्ष पहले बीमारी के कारण उनके पिता छेदालाल की मौत हो गई थी। परिवार के पास लगभग एक बीघा कृषि भूमि है। ऐसे में धर्मपाल राजमिस्त्री का काम करके पत्नी, मासूम बेटे और मां का भरण-पोषण करते थे। मेहनत-मजदूरी से होने वाली कमाई ही परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थी। अब धर्मपाल की असमय मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पत्नी लक्ष्मी के सामने जहां अपने ढाई साल के बेटे चमन की परवरिश की चिंता है। वहीं मां जमुना देवी ने भी अपना सहारा खो दिया है।
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शेरगढ़। कस्बा के मोहल्ला ब्रह्मनान निवासी राजमिस्त्री धर्मपाल मौर्य (30) की उत्तराखंड के हल्द्वानी में मकान निर्माण के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिचितों के अनुसार, कस्बा के मोहल्ला ब्रह्मनान निवासी धर्मपाल मौर्य हल्द्वानी में राजमिस्त्री का काम करने गए थे। वह चौपला चौराहा, दबूदूंगा के निकट वृद्धाश्रम के पास भवन निर्माण का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली पानी मोटर के तार में किसी तरह करंट उतर आया। धर्मपाल इसकी चपेट में आ गए। उनकी मौत की सूचना मिलते ही परिजन भी हल्द्वानी पहुंच गए। पुलिस ने शव का पोस्टमाॅर्टम कराया है। इसके बाद परिजन शव को शेरगढ़ कस्बे में अपने घर ले आए, जहां उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। संवाद
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परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
धर्मपाल के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। करीब सात वर्ष पहले बीमारी के कारण उनके पिता छेदालाल की मौत हो गई थी। परिवार के पास लगभग एक बीघा कृषि भूमि है। ऐसे में धर्मपाल राजमिस्त्री का काम करके पत्नी, मासूम बेटे और मां का भरण-पोषण करते थे। मेहनत-मजदूरी से होने वाली कमाई ही परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा थी। अब धर्मपाल की असमय मौत के बाद परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पत्नी लक्ष्मी के सामने जहां अपने ढाई साल के बेटे चमन की परवरिश की चिंता है। वहीं मां जमुना देवी ने भी अपना सहारा खो दिया है।
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