बरेली: किसी काम का नहीं रहा प्रशासन का सर्वे, दिल्ली-एनसीआर से लौटे 25 हजार लोगों ने बढ़ाई परेशानी
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कोरोना वायरस के खतरे के बीच बाहरी राज्यों से लौट रहे लोग प्रशासन के लिए चुनौती बन गए हैं। खास तौर से दिल्ली के साथ हरियाणा और नोएडा से आए कामगार। लॉकडाउन से पहले बरेली जिला प्रशासन ने प्रत्येक गांव में सर्वे कराया था कि बाहर से आए लोगों की कितनी संख्या है, ताकि उन पर नजर रखकर स्वास्थ्य की जांच कराई जा सके।
उस वक्त करीब 12 हजार लोगों को चिह्नित किया गया था, लेकिन प्रशासन के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर से पैदल आए लोगों से यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा करीब 25 हजार होने का अनुमान है। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए डीएम नितीश कुमार ने लॉकडाउन से पहले एनएनएम सहित कई कर्मचारियों की सहायता से यह रिपोर्ट तैयार कराई थी कि गांवों में कितने ऐसे लोग हैं, जो हाल में वापस आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, गांव लौटे ज्यादातर लोग ऐसे थे, जो दिल्ली, हरियाणा, नोएडा में फैक्टरी सहित कई जगहों पर काम करते थे। इस रिपोर्ट के आधार पर करीब 12 हजार लोगों के बाहर से आने का आंकड़ा तैयार किया गया था।
प्रशासन की योजना थी कि स्वास्थ्य विभाग की 32 टीमों से बाहर से आए लोगों की कोरोना से संबंधित जांच कराई जा सके। मगर यह योजना दिल्ली और एनसीआर से हर दिन आने वाले सैकड़ों लोगों ने फेल कर दी है। अफसरों का कहना है कि पैदल आने वालों का कोई रिकार्ड नहीं है।
पहले की सर्वे रिपोर्ट अब किसी काम की नहीं रही। इसलिए सही आंकड़ा जानने के लिए प्रशासन के पास दोबारा सर्वे कराने का अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। डीएम नितीश कुमार ने कहा कि लॉकडाउन से पहले प्रत्येक गांव में हुए सर्वे में करीब 12 हजार ऐसे लोग चिह्नित हुए थे, जो हाल में गांव में वापस आए हैं।
इनकी जांच के लिए एंबुलेंस के लैस मोबाइल टीमें तैयार की गईं थीं, लेकिन बड़ी तादाद में दिल्ली की ओर से पैदल ही लोग आ गए हैं। इसलिए सर्वे दोबारा करना जरूरी है।