Mahashivratri 2023: ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा श्री तपेश्वर नाथ मंदिर, भालू बाबा ने 400 वर्ष तक की थी तपस्या
नाथ नगरी बरेली के श्री तपेश्वर नाथ मंदिर से लाखों लोगों की आस्था है। यह प्राचीन मंदिर ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। मान्यता है कि यहां श्रद्धा भाव से आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।
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बरेली के सुभाषनगर स्थित श्री तपेश्वर नाथ मंदिर कभी ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा। सात नाथ मंदिरों में से एक श्री तपेश्वर नाथ मंदिर शहर बसने से पहले से स्थापित है। इस मंदिर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। महाशिवरात्रि पर श्री तपेश्वर नाथ मंदिर में हजारों भक्त पहुंचते हैं।
कहा जाता है कि जिस जगह पर श्री तपेश्वर नाथ मंदिर है, वहां सैकड़ों वर्ष पूर्व गंगा बहती थी। घने बांस के जंगल के बीच पीपल के पेड़ के नीचे शिवलिंग प्रकट हुआ था। सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां आए भालू बाबा ने 400 वर्ष तक कठोर तप किया। उनके बाद कई और संत आए और तपस्या का क्रम बना रहा। इसी के चलते कालांतर में मंदिर श्री तपेश्वर नाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इन संतों ने की यहां तपस्या
मंदिर के महंत बाबा लखनदास महाराज ने बताया कि भालू बाबा के बाद उनके शिष्य बाबा राम टहल दास ने यहां 150 वर्ष तपस्या की, फिर उनके शिष्य बाबा मुनीश्वर दास ने भी 150 साल तपस्या में गुजारे। बाद में बाबा राम गोपाल दास, राम लखन दास व ध्रूम ऋषि के शिष्यों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। यह एक सिद्ध पीठ भी है।
मंदिर के छोटे महंत बाबा नरसिंह दास ने बताया कि यह ऐसा मंदिर है जहां श्रद्धा भाव से आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। परिसर में भोले बाबा सहित ठाकुर जी, राधा-कृष्ण, राम-जानकी, लक्ष्मी-नारायण, पंचमुखी बालाजी, दक्षिणमुखी हनुमान जी की मूर्तियां स्थापित हैं। यहां गोशाला भी है और संत सेवा भी होती है।