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माफिया बने मंत्री और वे प्रधानमंत्री.. साहब बोले- सस्पेंड करो इसे

Thu, 27 Feb 2020 02:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2020 02:35 AM IST
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Mafia became a minister and he became the Prime Minister .. Sir said - suspend it
समारोह में कई व्यापारी किए गए सम्मानित। - फोटो : अमर उजाला, बरेली

सेल टैक्स के स्थापना दिवस समारोह में मचा हंगामा
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आशिकाना अंदाज में कविताओं और शेर-ओ-शायरी के बाद सीधे प्रधानमंत्री पर गंभीर कटाक्ष से मचा हड़कंप

बरेली। सरकारी खर्च पर आयोजित समारोह में सरकारी कर्मचारी ने ही अपनी कविता के जरिये सरकार में सांविधानिक पदों पर बैठे शीर्ष नेताओं पर ऐसे व्यंग्य बाण छोड़े कि हंगामा खड़ा हो गया। देखते-देखते मामला इतना ज्यादा गरमाया कि अधिकारियों तक की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। काव्य पाठ कर रहे कर्मचारी को तुरंत मंच से उतारने के बाद उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा करनी पड़ी। इतना होने के बाद भी अधिकारियों का अपनी जवाबदेही के डर से पीछा नहीं छूटा तो उसे सस्पेंड करने का निर्देश भी दे दिया गया।
समारोह वाणिज्य कर विभाग का था जो स्थापना दिवस पर कैंट इलाके में विभागीय जोनल कार्यालय में आयोजित किया गया था। तय कार्यक्रम के मुताबिक विभागीय बजट से आयोजित इस समारोह में व्यापारियों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ बेहतर राजस्व देने वाले व्यापारियों के साथ चुनिंदा कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाना था। समारोह की शुरुआत गीत-गजलों और कविताओं से हुई। एक-एक कर कई विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों ने मंच से शृंगार की चाशनी में डूबे गीत और व्यंग्य पेश करने शुरू किए। हंसी-ठहाकों और वाहवाही के बीच यह सिलसिला चलता रहा लेकिन इसी बीच प्रेमपाल नाम के एक कर्मचारी ने माइक संभालकर जब नेताओं को व्यंग्य बाणों का निशाना बनाना शुरू किया तो व्यापारियों के तेवर बिगड़ने शुरू हो गए।
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प्रेमपाल ने पहले तो सपा नेता अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव पर आपत्तिजनक व्यंग्य किया, थोड़ा जोश और बढ़ा तो प्रेमपाल ने एक और कविता सुनाई, पढ़े-लिखे संतरी बने, माफिया मंत्री और ... प्रधानमंत्री। प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक व्यंग्य से कई व्यापारियों के साथ कर्मचारियों ने भी आपत्ति शुरू कर दी। सामने बैठे तमाम लोग कुर्सियां छोड़कर उठ खड़े हुए और नाराजगी जताने लगे। मंच पर बैठकर कार्यक्रम का लुत्फ ले रहे अधिकारी पहले तो माजरा समझ ही नहीं पाए, लेकिन मुख्य अतिथि व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य पवन अरोरा ने प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक व्यंग्य करने वाले कर्मचारी को मंच से नीचे उतारने और सख्त कार्रवाई की बात कही तो उनकी हवाइयां उड़नी शुरू हो गईं। मामला बिगड़ता देख अफसरों ने कर्मचारी को सस्पेंड कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद हंगामा तो शांत हो गया लेकिन घबराए अफसर काफी देर तक फिर भी मामले की लीपापोती में जुटे रहे।
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होली से पहले हास्य-व्यंग्य फिर अफसरों की हालत तंग

होली से पहले ही स्थापना दिवस समारोह को होली कार्यक्रम जैसे अंदाज में आयोजित करना अफसरों को भारी पड़ गया। हास्य व्यंग्य के नाम पर तमाम लोगों की बखिया उधेड़ी गई लेकिन अफसर मंद-मंद मुस्कराते रहे लेकिन जिस तरह प्रधानमंत्री पर कटाक्ष होते ही हंगामा हुआ, उसका अंदाजा अफसरों को भी नहीं था। इससे पहले एक महिला अधिकारी ने बड़ी श्रद्धा के साथ आशिकी भरा गीत ‘कौन कहता है मोहब्बत की जुबां होती है, दिल में जो बात है आंखों से बयां होती है,’ सुनाया तो अफसर भावविभोर हो गए। श्रोताओं ने भी जमकर तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। समारोह में नमकीन, मिठाई, गारमेंट कारोबार करने वाले सात व्यापारी सम्मानित किए गए। इनमें नरेंद्र गुप्ता पप्पू, कृष्ण कुमार चंदानी आदि शामिल थे। एडिशनल कमिश्नर आरके पांडे, एमएन वर्मा, वीपी कटियार, एचआर चौरसिया, शैलेश पांडे आदि कार्यक्रम में मौजूद रहे।

पिछले साल छलके थे जाम

पिछले साल होली से पहले आवास विकास परिषद कार्यालय में तत्कालीन एक्सईएन नेहा सिंह की मौजूद में जाम छलके थे। इस मामले में एक्सईएन समेत सात कर्मचारियों पर गाज गिरी थी।
हास्य-व्यंग्य की आड़ में मंच से प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना गंभीर अनुशासनहीनता है। ऐसा करने वाले कर्मचारी को विभागीय कार्रवाई के साथ सस्पेंड करने कोे कहा गया है। - आरके पांडे, एडिशनल कमिश्नर

स्थापना दिवस के नाम फूहड़ कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। सरकारी कार्यक्रम में आशिकी भरे गीत और हास्य व्यंग्य की आड़ में राजनेताओं पर प्रहार कर्मचारी आचार संहिता के विपरीत है। इस मामले में कार्रवाई के लिए कहा गया है। - पवन अरोरा, सदस्य व्यापारी कल्याण बोर्ड
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