फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Lok sabha Elections 2019 Mayaati and Akhilesh Focus on Dalit Muslim Yadav Factor

नब्ज टटोलकर रखा दलित-मुस्लिम-यादव फैक्टर पर फोकस, माया-अखिलेश ने दी बदायूं से पुराने नाते की दुहाई

Sat, 13 Apr 2019 11:00 PM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उझानी (बदायूं)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उझानी (बदायूं) Published by: राजेश सैनी Updated Sat, 13 Apr 2019 11:00 PM IST
विज्ञापन
Lok sabha Elections 2019 Mayaati and Akhilesh Focus on Dalit Muslim Yadav Factor
अखिलेश-माया

महागठबंधन के दो बड़े नेताओं मायावती और अखिलेश यादव ने शनिवार को बदायूं लोकसभा क्षेत्र के मुजरिया इलाके में चुनावी सभा में जिले के मतदाताओं से अपने रिश्तों का भी जिक्र किया। मुजरिया इस लोकसभा क्षेत्र का केंद्र बिंदु है। इलाके में चुनावी सभा करने का मकसद यादव, मुस्लिम और दलितों को साधना रहा। 

विज्ञापन


मायावती तो वर्ष-1995 में बिल्सी सीट से चुनाव जीत चुकी हैं। उन्होंने जीतने के बाद इस्तीफा जरूर दे दिया लेकिन उनकी पार्टी की बिल्सी सीट पर पकड़ कम नहीं हुई। उसी साल मुलायम सिंह यादव भी सहसवान विधानसभा सीट जीते थे। मायावती और अखिलेश ने उसी की दुहाई देते हुए नजदीक का सबंध होने की बात कहने से भी गुरेज नहीं किया।
विज्ञापन


बसपा सुप्रीमो मायावती ने इसका जिक्र करते हुए कहा कि आपसे दो दशक पुराना जो रिश्ता है, वह आगे भी बरकरार रहेगा। महागठबंधन होने के बाद उसी रिश्ते को मजबूती प्रदान करने का समय आ गया है। बिल्सी विधानसभा क्षेत्र की जनता ने उन्हें जिताया था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी रिश्ते की बात बताने में दो कदम आगे निकले। बोले, बदायूं जिले से उनका घरेलू नाता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें कि वर्ष-1995 में ही मुलायम सिंह यादव ने सहसवान विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। दोनों नेताओं ने हालांकि बिल्सी और सहसवान की सीट को छोड़ दिया था लेकिन मुलायम कुनबे की ओर से धर्मेंद्र यादव अब तक दो बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। इस बार उनका तीसरा चुनाव है।


माया और अखिलेश ने मतदाताओं की नब्ज टटोलते हुए एक-दूसरे के समर्थकों का हौसला बढ़ाने का भी काम किया। यह इसलिए भी कभी आपस में धुर-विरोधी रही सपा और बसपा के समर्थक भी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर रहकर चुनाव में अपनी मौजूदगी का अहसास कराने में कसर नहीं छोड़ते थे। अब चूंकि रालोद के साथ दोनों भी महागठबंधन का हिस्सा हैं सो उन्हें महागठबंधन के ही राजनीतिक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने को वह कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed