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ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन ठप होने पर रजिस्ट्री दफ्तर में ताले डाले
बरेली।
Updated Wed, 01 Nov 2017 02:22 AM IST
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रिजजिस्टट्री अाआपऊफिससि
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जिले में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का पोर्टल ठप होने से खफा कातिबों ने रजिस्ट्री दफ्तर में ताले डाल दिए। इसके बाद गेट पर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। कातिबों का कहना है कि आधी अधूरी तैयारी के बीच ही पोर्टल चालू कर दिया गया। इससे रजिस्ट्रेशन कराने आने वाले लोगों को परेशानियां हो रही हैं। शिकायत के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
प्रदेश में बतौर पायलट प्रोजेक्ट 15 सितंबर को नवाबगंज तहसील में बैनामे के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुए थे। तीन अक्तूबर को बरेली में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई, लेकिन खामियों के चलते यह कारगर साबित नहीं हो पा रही। रजिस्ट्रेशन न हो पाने की वजह से रजिस्ट्री की संख्या कम होती चली गई। रजिस्ट्री दफ्तर के अफसरों को उम्मीद थी कि जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। मंगलवार को पोर्टल पर कोई काम ही नहीं हो पाया। दोनोें सब रजिस्टारों के यहां दोपहर तक बमुश्किल दो रजिस्ट्रेशन ही हो पाए, लेकिन बैनामा नहीं हो सके। इससे गुस्साए कातिबों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। दस्तावेज लेखक क ल्याणकारी समिति के अध्यक्ष कृ ष्णगोपाल मिश्र की अगुवाई में कातिबों ने रजिस्ट्री दफ्तर में ताले डाल दिए और गेट पर नारेबाजी करने लगे। कातिबों का कहना है कि पोर्टल बिना तैयारी के शुरू कर दिया गया है। इसकी वजह से आम आदमी परेशान है। जबसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुए हैं, तभी से बैनामे की व्यवस्था गड़बड़ाई चल रही है। पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। जब तक ऑन लाइन व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती तब तक मैन्युअल रजिस्ट्री होनी चाहिए। इस मौके पर सतीश कातिब, तुलसीदास कातिब, संजीव सक्सेना, अनूप दीक्षित, वसीउद्दीन, यशपाल, प्रशांत सक्सेना, शमीम सुल्तानी, अनिल सक्सेना, मोहम्मद अखलाक आदि मौजूद रहे।
हर महीने एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान
जिले में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का सिस्टम गड़बड़ होने से स्टांप शुल्क की मद में हर महीने एक करोड़ की धनराशि का नुकसान हो रहा है। जिले में बरेली महानगर में रजिस्ट्रार प्रथम और द्वितीय के अलावा तहसील आंवला, नवाबगंज, मीरगंज, बहेड़ी, फरीदपुर में सब रजिस्ट्रार दफ्तर हैं। इन सातों कार्यालय में नोटबंदी के बाद भी मैन्युअल बैनामों, एग्रीमेंट आदि की संख्या करीब तीन हजार हर महीने हो गई थी। इसके पहले तो हालात बहुत अच्छे थे। महीने में बैनामों समेत अन्य सभी रजिस्ट्रेशनों की संख्या चार हजार तक पहुंच जाती थी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद शहर इलाके में महीने में बैनामों और रजिस्ट्रेशन की संख्या सिर्फ एक हजार रह गई है। बाकी पांचों रजिस्ट्री दफ्तरों में 800 रजिस्ट्रेशन ही हो पाते हैं।
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मैने कंपनी से 40 लाख रुपये का ऋण लेकर रामगंगा नगर में 21 लाख रुपये का प्लाट खरीदा है। इसी महीने ऋण के तीन महीने पूरे हो रहे हैं। दो-तीन दिन और मिल सकते हैं। प्लाट की रजिस्ट्री नहीं हो पाई तो कंपनी मुझे दी गई रकम को पर्सनल लोन में बदल देगी। इससे मुझे बड़ा नुकसान होगा।
- नेत्रपाल, सहायक प्रबंधक
इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड, चिरांग (असम)
रामगंगा नगर में छोटा घर खरीदा है। उसका बैनामा कराने आए थे। पत्नी नौकरी करती हैं, उनकी छुट्टी बैनामे के लिए ही कराई थी। बैनामे के गवाह भी बमुश्किल बुलाकर लाए थे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का पोर्टल नहीं चलने से सब कुछ गड़बड़ हो गया। अब गवाह कैसे लाएंगे।
- डीएन धीर, सेल्समैन, कृष्णा नगर
दो दिन से जमीन का बैनामा कराने के लिए रजिस्ट्री दफ्तर के चक्कर लगा रहा हूं। सर्वर डाउन होने की वजह से पोर्टल ही नहीं चलता है। लिहाजा रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। बार-बार पैसा लेकर आने से खतरा बना रहता है। सरकार जल्द ही पोर्टल की व्यवस्था ठीक कराए।
- प्रमोद माहेश्वरी, आलमगीरी गंज
ऑनलाइन बैनामा कोई नहीं हो रहा है, सिर्फ रजिस्ट्रेशन होता है। बैनामा कराने के लिए फिर भी लोगों को सब रजिस्ट्रार के सामने ही जाना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल ऐसा डेवलप किया है कि वह पहले ही दिन से रुला रहा है। जब तक व्यवस्थाएं ठीक नहीं होतीं ऑनलाइन व्यवस्था बंद कर देनी चाहिए।
- वेदप्रकाश सक्सेना, कातिब
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था मजाक बन गई है। कातिबों और बैनामा कराने वालों को अपना काम कराने में कई-कई दिन लग रहे हैं। इससे लोग परेशान हो रहे हैं। शिकायत करने पर भी कोई नहीं सुनता है। सरकार जब तक इस समस्या का समाधान नहीं करेगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
- कृष्णा गोपाल मिश्र, अध्यक्ष, दस्तावेज लेखक, कल्याणकारी समिति
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सेवा ठीक से काम नहीं कर रही है। आए दिन सर्वर डाउन होने की वजह से सभी को दिक्कतें हो रही हैं। मंगलवार को सर्वर ने काम नहीं किया। इसकी वजह से जिले में कोई बैनामा नहीं हो पाया। सब रजिस्ट्रारों ने यहां की दिक्कतों को लिखकर लखनऊ भेजा है। वहां से जो फैसला होगा उसके मुताबिक ही आगे का काम होगा।
- ओमप्रकाश सिंह, एआईजी स्टांप, बरेली
प्रदेश में बतौर पायलट प्रोजेक्ट 15 सितंबर को नवाबगंज तहसील में बैनामे के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुए थे। तीन अक्तूबर को बरेली में भी यह व्यवस्था लागू कर दी गई, लेकिन खामियों के चलते यह कारगर साबित नहीं हो पा रही। रजिस्ट्रेशन न हो पाने की वजह से रजिस्ट्री की संख्या कम होती चली गई। रजिस्ट्री दफ्तर के अफसरों को उम्मीद थी कि जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन कुछ नहीं हो पाया। मंगलवार को पोर्टल पर कोई काम ही नहीं हो पाया। दोनोें सब रजिस्टारों के यहां दोपहर तक बमुश्किल दो रजिस्ट्रेशन ही हो पाए, लेकिन बैनामा नहीं हो सके। इससे गुस्साए कातिबों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। दस्तावेज लेखक क ल्याणकारी समिति के अध्यक्ष कृ ष्णगोपाल मिश्र की अगुवाई में कातिबों ने रजिस्ट्री दफ्तर में ताले डाल दिए और गेट पर नारेबाजी करने लगे। कातिबों का कहना है कि पोर्टल बिना तैयारी के शुरू कर दिया गया है। इसकी वजह से आम आदमी परेशान है। जबसे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुए हैं, तभी से बैनामे की व्यवस्था गड़बड़ाई चल रही है। पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। जब तक ऑन लाइन व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती तब तक मैन्युअल रजिस्ट्री होनी चाहिए। इस मौके पर सतीश कातिब, तुलसीदास कातिब, संजीव सक्सेना, अनूप दीक्षित, वसीउद्दीन, यशपाल, प्रशांत सक्सेना, शमीम सुल्तानी, अनिल सक्सेना, मोहम्मद अखलाक आदि मौजूद रहे।
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हर महीने एक करोड़ से ज्यादा का नुकसान
जिले में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का सिस्टम गड़बड़ होने से स्टांप शुल्क की मद में हर महीने एक करोड़ की धनराशि का नुकसान हो रहा है। जिले में बरेली महानगर में रजिस्ट्रार प्रथम और द्वितीय के अलावा तहसील आंवला, नवाबगंज, मीरगंज, बहेड़ी, फरीदपुर में सब रजिस्ट्रार दफ्तर हैं। इन सातों कार्यालय में नोटबंदी के बाद भी मैन्युअल बैनामों, एग्रीमेंट आदि की संख्या करीब तीन हजार हर महीने हो गई थी। इसके पहले तो हालात बहुत अच्छे थे। महीने में बैनामों समेत अन्य सभी रजिस्ट्रेशनों की संख्या चार हजार तक पहुंच जाती थी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद शहर इलाके में महीने में बैनामों और रजिस्ट्रेशन की संख्या सिर्फ एक हजार रह गई है। बाकी पांचों रजिस्ट्री दफ्तरों में 800 रजिस्ट्रेशन ही हो पाते हैं।
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मैने कंपनी से 40 लाख रुपये का ऋण लेकर रामगंगा नगर में 21 लाख रुपये का प्लाट खरीदा है। इसी महीने ऋण के तीन महीने पूरे हो रहे हैं। दो-तीन दिन और मिल सकते हैं। प्लाट की रजिस्ट्री नहीं हो पाई तो कंपनी मुझे दी गई रकम को पर्सनल लोन में बदल देगी। इससे मुझे बड़ा नुकसान होगा।
- नेत्रपाल, सहायक प्रबंधक
इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड, चिरांग (असम)
रामगंगा नगर में छोटा घर खरीदा है। उसका बैनामा कराने आए थे। पत्नी नौकरी करती हैं, उनकी छुट्टी बैनामे के लिए ही कराई थी। बैनामे के गवाह भी बमुश्किल बुलाकर लाए थे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का पोर्टल नहीं चलने से सब कुछ गड़बड़ हो गया। अब गवाह कैसे लाएंगे।
- डीएन धीर, सेल्समैन, कृष्णा नगर
दो दिन से जमीन का बैनामा कराने के लिए रजिस्ट्री दफ्तर के चक्कर लगा रहा हूं। सर्वर डाउन होने की वजह से पोर्टल ही नहीं चलता है। लिहाजा रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया है। बार-बार पैसा लेकर आने से खतरा बना रहता है। सरकार जल्द ही पोर्टल की व्यवस्था ठीक कराए।
- प्रमोद माहेश्वरी, आलमगीरी गंज
ऑनलाइन बैनामा कोई नहीं हो रहा है, सिर्फ रजिस्ट्रेशन होता है। बैनामा कराने के लिए फिर भी लोगों को सब रजिस्ट्रार के सामने ही जाना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन के लिए पोर्टल ऐसा डेवलप किया है कि वह पहले ही दिन से रुला रहा है। जब तक व्यवस्थाएं ठीक नहीं होतीं ऑनलाइन व्यवस्था बंद कर देनी चाहिए।
- वेदप्रकाश सक्सेना, कातिब
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था मजाक बन गई है। कातिबों और बैनामा कराने वालों को अपना काम कराने में कई-कई दिन लग रहे हैं। इससे लोग परेशान हो रहे हैं। शिकायत करने पर भी कोई नहीं सुनता है। सरकार जब तक इस समस्या का समाधान नहीं करेगी, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
- कृष्णा गोपाल मिश्र, अध्यक्ष, दस्तावेज लेखक, कल्याणकारी समिति
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सेवा ठीक से काम नहीं कर रही है। आए दिन सर्वर डाउन होने की वजह से सभी को दिक्कतें हो रही हैं। मंगलवार को सर्वर ने काम नहीं किया। इसकी वजह से जिले में कोई बैनामा नहीं हो पाया। सब रजिस्ट्रारों ने यहां की दिक्कतों को लिखकर लखनऊ भेजा है। वहां से जो फैसला होगा उसके मुताबिक ही आगे का काम होगा।
- ओमप्रकाश सिंह, एआईजी स्टांप, बरेली