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लॉक डाउन: फसलें तो कट जाएंगी लेकिन बेचेंगे कहां
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किसान
- फोटो : Pixabay
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खाद और कीटनाशकों का संकट भी किसानों को कर रहा बेहाल
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पीएमओ और इफको को ट्वीट कर समस्या को हल करने का आग्रह
बरेली। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए लॉक डाउन में भी फसल काटने की तो इजाजत दे दी लेकिन अब उन्हें परेशान करने वाला नया सवाल यह है कि फसल काटने के बाद वे उसे बेचने कहां जाएं। गन्ना और मेंथा की फसल बुवाई के लिए खाद और कीटनाशक दवाओं का संकट भी उन पर भारी पड़ रहा है। कुछ अग्रणी किसानों ने प्रधानमंत्री के साथ इफ्को के अफसरों को भी ट्वीट करके समस्या हल करने की मांग की है।
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के मुताबिक किसानों को फसल काटने की अनुमति देने के साथ खाद-बीज की दुकानें खोलने की सरकार की पहल सराहनीय है लेकिन छह महीने में तैयार हुई फसल काटने के बाद उसे बेचने की समस्या का अब भी कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। लॉक डाउन की वजह से यह सवाल काफी जटिल हो गया है। गन्ना और मेंथा जैसी कई और फसलों की बुवाई शुरू हो रही है। किसानों के पास पूंजी नहीं है। अनिल साहनी ने पीएमओ और इफ्को के साथ प्रदेश सरकार को ट्वीट कर इस समस्या का हल निकालने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि डीएपी और यूरिया के दाम में 50 फीसद सब्सिडी दी जाए ताकि किसानों को कुछ राहत मिले।
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पीएमओ और इफको को ट्वीट कर समस्या को हल करने का आग्रह बरेली। सरकार ने किसानों को राहत देते हुए लॉक डाउन में भी फसल काटने की तो इजाजत दे दी लेकिन अब उन्हें परेशान करने वाला नया सवाल यह है कि फसल काटने के बाद वे उसे बेचने कहां जाएं। गन्ना और मेंथा की फसल बुवाई के लिए खाद और कीटनाशक दवाओं का संकट भी उन पर भारी पड़ रहा है। कुछ अग्रणी किसानों ने प्रधानमंत्री के साथ इफ्को के अफसरों को भी ट्वीट करके समस्या हल करने की मांग की है।
प्रगतिशील किसान अनिल साहनी के मुताबिक किसानों को फसल काटने की अनुमति देने के साथ खाद-बीज की दुकानें खोलने की सरकार की पहल सराहनीय है लेकिन छह महीने में तैयार हुई फसल काटने के बाद उसे बेचने की समस्या का अब भी कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। लॉक डाउन की वजह से यह सवाल काफी जटिल हो गया है। गन्ना और मेंथा जैसी कई और फसलों की बुवाई शुरू हो रही है। किसानों के पास पूंजी नहीं है। अनिल साहनी ने पीएमओ और इफ्को के साथ प्रदेश सरकार को ट्वीट कर इस समस्या का हल निकालने का आग्रह किया है। उन्होंने मांग की है कि डीएपी और यूरिया के दाम में 50 फीसद सब्सिडी दी जाए ताकि किसानों को कुछ राहत मिले।
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