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...लो अब आ गया चाइनीज पापड़ भी
बरेली।
Updated Mon, 27 Feb 2017 01:26 AM IST
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... Let's now also Chinese wafer
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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होली करीब है और ऐसे में हर घर में चिप्स और पापड़ों के साथ पार्टी शुरू होने वाली है, लेकिन इस बार घरों में देसी चिप्स और पापड़ की जगह विदेशी पापड़, कचरी की घुसपैठ हो गई है। रंगीले रंगों, आकर्षक डिजाइनों और दाम में कम इस चाइजीन चिप्स पापड़ों की मांग देसी पापड़ों की अपेक्षा बढ़ गई है, जिसे कारोबारी भी तरजीह दे रहे हैं। वहीं चाइनीज पिचकारियां भी बड़ी मात्रा में ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। व्यापारी पिछले वर्ष से ज्यादा कारोबार की उम्मीद जता रहे हैं। उधर, देशी गुलाल और रंग उद्योग पर नोटबंदी का असर साफ दिख रहा है।
शहर के प्रमुख बाजारों में चाइनीज चिप्स पापड़ भारतीय पापड़ व चिप्सों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इनके लाल, हरे, पीले, सफेद सहित कई रंगों के शेड और आकर्षक डिजाइन लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। इनके दाम भी देसी आलू के चिप्स, पापड़ और चावल के पापड़-कचरी के मुकाबले कम हैं। हालांकि दोनों के दामों में मामूली फर्क है, लेकिन डिजाइन और रंगों के मामले में चाइनीज पापड़ घरेलू पापड़ों को मात दे रहे हैं।
कारोबारियों के मुताबिक छोटे-छोटे चाइनीज पापड़-चिप्स-कचरी फ्राई करने पर बड़े आकार के हो जाते हैं। ये चावल, आलू और मैदा से बनाये गये हैं। इनका टेस्ट भी घरेलू पापड़ों से अलग है, लेकिन लोगों को इनके आकार और रंग पसंद आ रहे हैं, इसलिए इनकी बिक्त्रस्ी बढ़ रही है। वहीं कारोबारी भी बाजार की डिमांड के हिसाब से अपना आर्डर बुक करा रहे हैं।
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उधर, गुलाल और रंग आदि कारखानों में दीपावली बीतते ही आर्डर बुकिंग शुरू हो जाती है। इसके आधार पर उत्पादन होता है। देश भर में मनाया जाने वाला होली का त्योहार पश्चिमी, पूर्व और मध्य भारत में ज्यादा मनाया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा गुलाल और रंग की मांग होती है, लेकिन इस बार बाजार में नजारा अलग ही दिख रहा है। गुलाल और रंग उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित दिख रहा है। पिचकारियों की पचास से ज्यादा वैरायटी आयी हैं, चीन निर्मित सामान की ज्यादा मांग बतायी जा रही है। सतीश खुराना बताते हैं कि अभी तो खुदरा व्यापारी ही माल खरीद रहा है। हर किसी के बजट के अनुसार बाजार में पिचकारी, गन, स्नो स्प्रे आदि कई आइटम मौजूद हैं।
जयपुरी ब्रांड आलू के पापड़ भी मचा रहे हैं धमाचौकड़ी
पहली बार जयपुरी ब्रांड आलू के पापड़ शहर में बिक्री के लिए लाए गए हैं। गुजरात और दिल्ली में तैयार कचरी पापड़ आदि भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। प्रतिस्पर्धा के चलते छोटे पैकिंग में नमकीन और कचरी आदि सस्ती दरों पर बिक रही है। सूजी और मैदा भी तैयार हो रही है।
गुलाल का रंग उड़ा
नवंबर शुरू होते ही नोटबंदी हो गई, जो दिसंबर तक चली और पांच दिन बाद चुनाव घोषित हो गए। इससे नकदी और बैंक लेनदेन प्रभावित हो गया। चुनाव आयोग ने नकदी लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी। इस अवधि में गुलाल रंग कारखाना मालिक बुकिंग लेते हैं, लेनदेन पर पाबंदी होने से थोक कारोबारी आर्डर नहीं दे पाए, इससे उत्पादन पिछले वर्ष से आधा हुआ है। उद्यमियों ने उधार में माल देने और पुराना बचा माल वापस लेने की पेशकश की थी, वह भी कारोबारियों को नहीं भायी। प्रमुख उद्यमी रतन बिहारी अग्रवाल (हाथरस) ने बताया कि इस बार तो नोटबंदी और इलेक्शन प्रक्रिया से सारा धंधा चौपट हो गया है।
जाम के कारण कारोबार बंद
श्यामगंज बाजार में गिने चुने थोक कारोबारी हैं। इन दिनों पुल बन रहा है, हर तरफ अतिक्रमण है। इसलिए खुदरा व्यापारी अंदर दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इन थोक दुकानदारों ने इस बार गुलाल और रंग न बेचने का फैसला किया है। सिर्फ कुतुबखाना और बड़ा बाजार से ही थोक कारोबार हो रहा है।
25 करोड़ का धंधा
गुलाल और रंग का पिछले वर्ष करीब 25 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इस बार उत्पादन कम होने से कारोबार कम होने की आशंका है। व्यापारी नेता शोभित सक्सेना ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले धंधा मंदा दिख रहा है।
ड्राई फ्रूट हुआ सस्ता
होली पर इस बार आप गुजिया में ड्राई फ्रूट भरपूर मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं। कारण, बाजार में माल भरपूर आने से मंदी छायी हुई है। काजू और इलायची छोड़कर बाकी सभी ड्राई फ्रूट इस बार 20-25 प्रतिशत सस्ते हैं। सस्ते ड्राई फ्रूट होने से ग्राहकों की पहली पसंद बनना तय है। गिफ्ट पैक भी तैयार हो रहे हैं।
‘होली पर भी कारोबार में उत्साह नहीं है। बाजार में जाम होने से व्यापारी ओर ग्राहक दोनों परेशान हैं। इसलिए इस बार श्यामगंज में थोक कारोबार बंद हो गया है। नोटबंदी आदि से उत्पादन कम हुआ है और थोक कारोबारियों ने माल भी कम मंगाया है।’
- छैल बिहारी खंडेलवाल, थोक व्यापारी
‘उत्पादन ज्यादा और मांग कम होने से ड्राई फ्रूट बाजार में 25 प्रतिशत तक मंदी है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा और गुझिया का स्वाद ज्यादा पौष्टिक हो जाएगा। ग्राहकों की सुविधानुसार गिफ्ट पैक भी बनाए जा रहे हैं।’
- संजय आनंद, ड्राई फ्रूट कारोबारी
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शहर के प्रमुख बाजारों में चाइनीज चिप्स पापड़ भारतीय पापड़ व चिप्सों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इनके लाल, हरे, पीले, सफेद सहित कई रंगों के शेड और आकर्षक डिजाइन लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। इनके दाम भी देसी आलू के चिप्स, पापड़ और चावल के पापड़-कचरी के मुकाबले कम हैं। हालांकि दोनों के दामों में मामूली फर्क है, लेकिन डिजाइन और रंगों के मामले में चाइनीज पापड़ घरेलू पापड़ों को मात दे रहे हैं।
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कारोबारियों के मुताबिक छोटे-छोटे चाइनीज पापड़-चिप्स-कचरी फ्राई करने पर बड़े आकार के हो जाते हैं। ये चावल, आलू और मैदा से बनाये गये हैं। इनका टेस्ट भी घरेलू पापड़ों से अलग है, लेकिन लोगों को इनके आकार और रंग पसंद आ रहे हैं, इसलिए इनकी बिक्त्रस्ी बढ़ रही है। वहीं कारोबारी भी बाजार की डिमांड के हिसाब से अपना आर्डर बुक करा रहे हैं।
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उधर, गुलाल और रंग आदि कारखानों में दीपावली बीतते ही आर्डर बुकिंग शुरू हो जाती है। इसके आधार पर उत्पादन होता है। देश भर में मनाया जाने वाला होली का त्योहार पश्चिमी, पूर्व और मध्य भारत में ज्यादा मनाया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा गुलाल और रंग की मांग होती है, लेकिन इस बार बाजार में नजारा अलग ही दिख रहा है। गुलाल और रंग उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित दिख रहा है। पिचकारियों की पचास से ज्यादा वैरायटी आयी हैं, चीन निर्मित सामान की ज्यादा मांग बतायी जा रही है। सतीश खुराना बताते हैं कि अभी तो खुदरा व्यापारी ही माल खरीद रहा है। हर किसी के बजट के अनुसार बाजार में पिचकारी, गन, स्नो स्प्रे आदि कई आइटम मौजूद हैं।
जयपुरी ब्रांड आलू के पापड़ भी मचा रहे हैं धमाचौकड़ी
पहली बार जयपुरी ब्रांड आलू के पापड़ शहर में बिक्री के लिए लाए गए हैं। गुजरात और दिल्ली में तैयार कचरी पापड़ आदि भी भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। प्रतिस्पर्धा के चलते छोटे पैकिंग में नमकीन और कचरी आदि सस्ती दरों पर बिक रही है। सूजी और मैदा भी तैयार हो रही है।
गुलाल का रंग उड़ा
नवंबर शुरू होते ही नोटबंदी हो गई, जो दिसंबर तक चली और पांच दिन बाद चुनाव घोषित हो गए। इससे नकदी और बैंक लेनदेन प्रभावित हो गया। चुनाव आयोग ने नकदी लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी। इस अवधि में गुलाल रंग कारखाना मालिक बुकिंग लेते हैं, लेनदेन पर पाबंदी होने से थोक कारोबारी आर्डर नहीं दे पाए, इससे उत्पादन पिछले वर्ष से आधा हुआ है। उद्यमियों ने उधार में माल देने और पुराना बचा माल वापस लेने की पेशकश की थी, वह भी कारोबारियों को नहीं भायी। प्रमुख उद्यमी रतन बिहारी अग्रवाल (हाथरस) ने बताया कि इस बार तो नोटबंदी और इलेक्शन प्रक्रिया से सारा धंधा चौपट हो गया है।
जाम के कारण कारोबार बंद
श्यामगंज बाजार में गिने चुने थोक कारोबारी हैं। इन दिनों पुल बन रहा है, हर तरफ अतिक्रमण है। इसलिए खुदरा व्यापारी अंदर दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। इन थोक दुकानदारों ने इस बार गुलाल और रंग न बेचने का फैसला किया है। सिर्फ कुतुबखाना और बड़ा बाजार से ही थोक कारोबार हो रहा है।
25 करोड़ का धंधा
गुलाल और रंग का पिछले वर्ष करीब 25 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। इस बार उत्पादन कम होने से कारोबार कम होने की आशंका है। व्यापारी नेता शोभित सक्सेना ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले धंधा मंदा दिख रहा है।
ड्राई फ्रूट हुआ सस्ता
होली पर इस बार आप गुजिया में ड्राई फ्रूट भरपूर मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं। कारण, बाजार में माल भरपूर आने से मंदी छायी हुई है। काजू और इलायची छोड़कर बाकी सभी ड्राई फ्रूट इस बार 20-25 प्रतिशत सस्ते हैं। सस्ते ड्राई फ्रूट होने से ग्राहकों की पहली पसंद बनना तय है। गिफ्ट पैक भी तैयार हो रहे हैं।
‘होली पर भी कारोबार में उत्साह नहीं है। बाजार में जाम होने से व्यापारी ओर ग्राहक दोनों परेशान हैं। इसलिए इस बार श्यामगंज में थोक कारोबार बंद हो गया है। नोटबंदी आदि से उत्पादन कम हुआ है और थोक कारोबारियों ने माल भी कम मंगाया है।’
- छैल बिहारी खंडेलवाल, थोक व्यापारी
‘उत्पादन ज्यादा और मांग कम होने से ड्राई फ्रूट बाजार में 25 प्रतिशत तक मंदी है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलेगा और गुझिया का स्वाद ज्यादा पौष्टिक हो जाएगा। ग्राहकों की सुविधानुसार गिफ्ट पैक भी बनाए जा रहे हैं।’
- संजय आनंद, ड्राई फ्रूट कारोबारी