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खनन से रामगंगा घाटों पर कांवड़ जत्थों के पहुंचने से अनहोनी का खतरा
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बरेली। रामगंगा के कई घाटों में खनन से सावन में यहां कांवड़ियों की भीड़ उमड़ने के दौरान अनहोनी का खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे घाटों में पर गोताखोरों के साथ स्टीमर की जरूरत महसूस की जा रही है। फरीदपुर के एसडीएम ने गांव कादरगंज और नगरिया कला में पड़ने वाले रामगंगा के घाटों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए एडीएम प्रशासन को चिट्ठी भेजकर इस बारे में अवगत करा दिया है।
रामगंगा के तमाम घाटों के आसपास बड़े पैमाने पर खनन हुए हैं। बारिश में और ज्यादा कटान होने की संभावना है। फरीदपुर के एसडीएम ने एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी को रिपोर्ट भेजी है कि बड़ी संख्या में कांवड़िये सावन के प्रत्येक सोमवार को नगरिया कला और कादरगंज में लगने वाले मेले में जलाभिषेक के लिए रामगंगा का जल लेने आते हैं। जबकि इन दोनों ग्रामों में मेले के आयोजन के लिए पूर्व में कोई व्यवस्था नहीं हैं। इन गांवों के घाटों पर काफी अधिक मिट्टी व रेत का कटान हो चुका है। ऐसे में घाटों पर अप्रिय घटना रोकने के लिए बैरिकेडिंग कराने के साथ गोताखोरों और स्टीमर व लाइट का इंतजाम भी किया जाए। एसडीएम ने बताया कि उन्होंने इन गांवों में पहुुंचकर निरीक्षण भी किया था। लोगों का कहना है कि इन घाटों पर पहुंचकर बड़ी संख्या में शिवभक्त जलकर विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर चढ़ाया जाता है। इन मेलों का कोई भी आयोजक नहीं है। एडीएम का कहना है कि इन घाटों पर अप्रिय घटना रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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रामगंगा के तमाम घाटों के आसपास बड़े पैमाने पर खनन हुए हैं। बारिश में और ज्यादा कटान होने की संभावना है। फरीदपुर के एसडीएम ने एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी को रिपोर्ट भेजी है कि बड़ी संख्या में कांवड़िये सावन के प्रत्येक सोमवार को नगरिया कला और कादरगंज में लगने वाले मेले में जलाभिषेक के लिए रामगंगा का जल लेने आते हैं। जबकि इन दोनों ग्रामों में मेले के आयोजन के लिए पूर्व में कोई व्यवस्था नहीं हैं। इन गांवों के घाटों पर काफी अधिक मिट्टी व रेत का कटान हो चुका है। ऐसे में घाटों पर अप्रिय घटना रोकने के लिए बैरिकेडिंग कराने के साथ गोताखोरों और स्टीमर व लाइट का इंतजाम भी किया जाए। एसडीएम ने बताया कि उन्होंने इन गांवों में पहुुंचकर निरीक्षण भी किया था। लोगों का कहना है कि इन घाटों पर पहुंचकर बड़ी संख्या में शिवभक्त जलकर विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर चढ़ाया जाता है। इन मेलों का कोई भी आयोजक नहीं है। एडीएम का कहना है कि इन घाटों पर अप्रिय घटना रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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