{"_id":"5d3cae548ebc3e6cfc5d8232","slug":"kawar-yatra-religion-bareilly-news-bly370203444","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावन का दूसरा सोमवार- सिद्धियोग से होगी मनोकामना पूरी, चंद्रमा करेंगे भाग्योदय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावन का दूसरा सोमवार- सिद्धियोग से होगी मनोकामना पूरी, चंद्रमा करेंगे भाग्योदय
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बरेली। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार विशेष संयोग के साथ सावन का दूसरा सोमवार जातकों के लिए बेहद खास रहेगा। वृष राशि में चंद्रमा उच्च का होना और सिद्धि योग के संयोग में शिव पूजन से कष्ट दूर होंगे, मनोकामना पूरी होगी और योजनाओं फलीभूत होने की संभावना है। साथ ही, वर्षा का जल भाग्य को चमकाने वाला साबित होने की बात ज्योतिषाचार्यों ने कही है
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक अबकी बार सिद्धियोग में पूजन से राज योग जैसे लाभ मिलेंगे। अबूझ मुहूर्त होने से शुरू किए गए नए कार्य भाग्योदय करेंगे। शास्त्रों के अनुसार कृतिका नक्षत्र में पड़ रहा दूसरा सोमवार भी विशेष लाभदायक रहेगा। बताया कि सोमवार को ‘सोम प्रदोष व्रत’ का भी संयोग है। इस व्रत के अनुष्ठान से हमेशा बेचैन और चंचल चित रखने वाले लोगों के लिए फलदायी रहेगा। बताया कि सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले के बीच जो अवधि होती है, उसे प्रदोष काल कहा जाता है। सोम प्रदोष व्रत के दिन इसी समयावधि के दौरान अगर भगवान शंकर की विधिवत पूजा की जाती है तो वह सारी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। इस बार सोम प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4.30 से सात बजे के बीच की जाएगी।
नाथ नगरी में उमड़ा कांवड़ियों का सैलाब
बरेली। शुक्रवार से शुरू हुआ कावंड़ियों की आवाजाही का दौर शनिवार को भी जारी रहा। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए हजारों की तादाद में कांवड़िए कछला, हरिद्वार रवाना हुए तो वहीं, शुक्रवार को रवाना हुए जत्थों की वापसी हुई। जानकारों के मुताबिक शनिवार को करीब 104 कांवड़ियों के जत्थे शहर से होकर गुजरे हैं। जो बरेली जिले समेत बदायूं से भी आए थे। कई जत्थे गोलागोकर्णनाथ में जलाभिषेक को रवाना हुए हैं। लिहाजा डीजे पर बजते शिव भजनों से शहर गुुंजायमान रहा।
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शनिवार को रिमझिम फुहारों के बीच बरेली के नवाबगंज, क्यारा, भोजीपुरा, बिथरी और शहर समेत तकरीबन 80 जत्थों की रवानगी और कई जत्थों की वापसी हुई है। डीजे की धुन पर झूमते नाचते भोले के भक्तों का हुजूम बरबस ही आकर्षण का केंद्र रहा। कछला आने जाने वाले कांवड़ियों का जत्था बदायूं रोड से रामगंगा के रास्ते कैंट क्षेत्र से शहर में प्रवेश किया। यहां से कई जत्थे रामपुर रोड और चौकी चौराहा होते हुए सैटेलाइट, श्यामगंज की ओर से गुजरे। डाक कांवड़ होने से कांवड़ियों के जत्थों के सड़क पार करने के दौरान कुछ समय तक के लिए वाहन के पहिए थमे रहे। कछला से गोलागोकर्णनाथ जा रहे जत्थे में करीब 110 कांवड़िए शामिल रहे। प्रत्येक जत्थे में अधिकतम 40 से 110 कांवड़िए शामिल रहे।
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ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक अबकी बार सिद्धियोग में पूजन से राज योग जैसे लाभ मिलेंगे। अबूझ मुहूर्त होने से शुरू किए गए नए कार्य भाग्योदय करेंगे। शास्त्रों के अनुसार कृतिका नक्षत्र में पड़ रहा दूसरा सोमवार भी विशेष लाभदायक रहेगा। बताया कि सोमवार को ‘सोम प्रदोष व्रत’ का भी संयोग है। इस व्रत के अनुष्ठान से हमेशा बेचैन और चंचल चित रखने वाले लोगों के लिए फलदायी रहेगा। बताया कि सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले के बीच जो अवधि होती है, उसे प्रदोष काल कहा जाता है। सोम प्रदोष व्रत के दिन इसी समयावधि के दौरान अगर भगवान शंकर की विधिवत पूजा की जाती है तो वह सारी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। इस बार सोम प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4.30 से सात बजे के बीच की जाएगी।
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नाथ नगरी में उमड़ा कांवड़ियों का सैलाब
बरेली। शुक्रवार से शुरू हुआ कावंड़ियों की आवाजाही का दौर शनिवार को भी जारी रहा। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए हजारों की तादाद में कांवड़िए कछला, हरिद्वार रवाना हुए तो वहीं, शुक्रवार को रवाना हुए जत्थों की वापसी हुई। जानकारों के मुताबिक शनिवार को करीब 104 कांवड़ियों के जत्थे शहर से होकर गुजरे हैं। जो बरेली जिले समेत बदायूं से भी आए थे। कई जत्थे गोलागोकर्णनाथ में जलाभिषेक को रवाना हुए हैं। लिहाजा डीजे पर बजते शिव भजनों से शहर गुुंजायमान रहा।
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शनिवार को रिमझिम फुहारों के बीच बरेली के नवाबगंज, क्यारा, भोजीपुरा, बिथरी और शहर समेत तकरीबन 80 जत्थों की रवानगी और कई जत्थों की वापसी हुई है। डीजे की धुन पर झूमते नाचते भोले के भक्तों का हुजूम बरबस ही आकर्षण का केंद्र रहा। कछला आने जाने वाले कांवड़ियों का जत्था बदायूं रोड से रामगंगा के रास्ते कैंट क्षेत्र से शहर में प्रवेश किया। यहां से कई जत्थे रामपुर रोड और चौकी चौराहा होते हुए सैटेलाइट, श्यामगंज की ओर से गुजरे। डाक कांवड़ होने से कांवड़ियों के जत्थों के सड़क पार करने के दौरान कुछ समय तक के लिए वाहन के पहिए थमे रहे। कछला से गोलागोकर्णनाथ जा रहे जत्थे में करीब 110 कांवड़िए शामिल रहे। प्रत्येक जत्थे में अधिकतम 40 से 110 कांवड़िए शामिल रहे।