फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Justice stalled by adjournments; outrage mounting.

Bareilly News: तारीखों में अटका इन्साफ, भड़क रहा आक्रोश

Fri, 14 Aug 2026 01:21 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 14 Aug 2026 01:21 AM IST
विज्ञापन
Justice stalled by adjournments; outrage mounting.
बरेली। कलक्ट्रेट गेट पर बुधवार को महिला के आत्मदाह की कोशिश का मामला राजस्व न्यायालयों में सुस्त सुनवाई का परिणाम रहा। यह तो सिर्फ बानगी है, हकीकत में कोई नौ साल से तो कोई 26 साल से चक्कर काट रहा है। सुनवाई के दौरान वकीलों की फीस व आने-जाने में वादकारियों के लाखों रुपये खर्च हो जा रहे हैं। इसके बावजूद इन्साफ नहीं मिलने पर उनका आक्रोश फूट रहा है।
विज्ञापन


राजस्व न्यायालयों में सर्वाधिक मामले बंटवारे, नामांतरण, भूमि के विवाद को लेकर चल रहे हैं। इसमें वादकारियों को तारीख पर तारीख मिलती है, लेकिन समाधान नहीं हो पाता। न्याय मिलने में देरी से उन्हें आर्थिक, मानसिक व सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रेम नगर धर्मकाटा निवासी कामता प्रसाद ने बताया कि इटऊआ बेनीराम में उन्होंने भूमि खरीदी थी। बंटवारा अटकने की वजह से उनको हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। इस दौरान कई एसडीएम बदल गए। सात-आठ दिन पर तारीख लगती है। महीने में औसत तीन-चार तारीखें लग जाती हैं। वकील व आने-जाने का खर्च भी भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन

केस एक
भोजीपुरा के खानपुर निवासी सोमवती ने बताया कि वह नौ साल से भूमि के बंटवारे के लिए चक्कर लगा रही हैं। उन्होंने जो भूमि बेची थी, सामने वाले ने उसमें दो बीघा अधिक जमीन कब्जा कर लिया। एसडीएम से लेकर अन्य राजस्व अदालतों ने उनके हक में फैसला दिया है। वर्तमान में एक वर्ष से अपर उप जिलाधिकारी कोर्ट में मामला विचाराधीन है। वह बेहद गरीब हैं। वकील की फीस भी नहीं दे पातीं। बेटे बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। आने-जाने में ही उनके 200 रुपये खर्च हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस दो
सदर तहसील के मोराबान भुता निवासी राम अवतार पटेल ने बताया कि वह फर्जी वसीयत के मामले से जूझ रहे हैं। वर्ष 2001 से चकबंदी अधिकारी बरेली, बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी बरेली, उप संचालक चकबंदी अधिकारी के यहां मुकदमा चला। 23 साल बाद उनका नाम चढ़ा। अब दो साल से अपर उप जिलाधिकारी की अदालत में मुकदमा चल रहा है। एक माह में पांच-छह तारीख लग जाती है। एक तारीख पर 700 से 800 रुपये खर्च होते हैं। अब तक 20 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।

वर्जन
राजस्व मामलों की सुनवाई में पहले से ज्यादा निबटारा किया जा रहा है। फरियादियों को जल्द न्याय देने का प्रयास रहता है। मामले में सभी पक्षों व गवाहों को सुनने के बाद ही फैसला दिया जाता है। - अविनाश सिंह, जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed