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Bareilly News: पशुधन क्षेत्र में ओडिशा राज्य का नॉलेज पार्टनर बनेगा आईवीआरआई
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बरेली। ओडिशा में प्रजनन संबंधी समस्या, गुणवत्ता युक्त चारे की कमी, मेटाबॉलिक डिसॉर्डर, बाह्य और रक्त परजीवी रोग से पशुओं को निदान दिलाना प्रमुख चुनौती है। आईवीआरआई की वैज्ञानिक विशेषज्ञता, अनुसंधान क्षमता, तकनीकी से पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास मुमकिन है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में बुधवार को पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में नवीन प्रगति विषय पर आयोजित इंटरफेस मीटिंग में ये विचार ओडिशा सरकार के मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विकास के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार वशिष्ठ ने साझा किए। उन्होंने आईवीआरआई को वैक्सीन विकास, गुणवत्ता मूल्यांकन (क्वालिटी असेसमेंट), पशुधन आधारित क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा के लिए दीर्घकालिक साझेदारी की जरूरत और अनुबंध का प्रस्ताव दिया।
बतौर नॉलेज पार्टनर आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने भी सहमति जताई है। प्रमुख सचिव ने सहयोग से राज्य में पशुधन उत्पादन, स्वास्थ्य सेवा में सुधार के साथ रोजगार सृजन और किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद जताई।
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विकसित ओडिशा 2036 के विजन पर हुई चर्चा
ओडिशा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा के निदेशक विजय अमृता कुलांगे ने आईवीआरआई के सहयोग और विकसित ओडिशा–2036 विजन को रेखांकित किया। डेयरी, पोल्ट्री, सुअर, बकरी पालन समेत अन्य क्षेत्र में ओडिशा के समग्र पशुधन विकास, किसानों के सशक्तीकरण के बारे में बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीक हस्तांतरण से आईवीआरआई सहयोग पर जोर दिया। पशु चिकित्सा अधिकारियों ने अल्ट्रासोनोग्राफी, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक्स, रेडियोग्राफी, पोस्टमाॅर्टम, क्लीनिकल पैथोलॉजी, प्रजनन तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण की मांग की।
इन विषयों पर भी हुई चर्चा
संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने बताया कि बैठक में प्रतिभागियों ने एफएमडी, एलएसडी, पॉक्स रोगों के स्ट्रेन विश्लेषण, वन हेल्थ दृष्टिकोण के तहत जूनोटिक निगरानी, कम लागत वाले परीक्षण किट, जलवायु परिवर्तन का रोग संचार पर प्रभाव, गैर आक्रामक परजीवी वैक्सीन विकास पर चर्चा की। एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस प्रबंधन, राष्ट्रीय एएमआर डेटाबेस निर्माण, एंटीबायोटिक, पशु फीड तकनीक, शीघ्र गर्भ, हीट पहचान किट, एआई आधारित पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, टेली-वेटरनरी सेवा पर भी चर्चा की गई। यहां जेडी एकेडमिक डॉ. एसके मेंदिरत्ता व अन्य लोग मौजूद रहे। ब्यूरो
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भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में बुधवार को पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में नवीन प्रगति विषय पर आयोजित इंटरफेस मीटिंग में ये विचार ओडिशा सरकार के मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विकास के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार वशिष्ठ ने साझा किए। उन्होंने आईवीआरआई को वैक्सीन विकास, गुणवत्ता मूल्यांकन (क्वालिटी असेसमेंट), पशुधन आधारित क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा के लिए दीर्घकालिक साझेदारी की जरूरत और अनुबंध का प्रस्ताव दिया।
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बतौर नॉलेज पार्टनर आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने भी सहमति जताई है। प्रमुख सचिव ने सहयोग से राज्य में पशुधन उत्पादन, स्वास्थ्य सेवा में सुधार के साथ रोजगार सृजन और किसानों की आय में वृद्धि होने की उम्मीद जताई।
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विकसित ओडिशा 2036 के विजन पर हुई चर्चा
ओडिशा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा के निदेशक विजय अमृता कुलांगे ने आईवीआरआई के सहयोग और विकसित ओडिशा–2036 विजन को रेखांकित किया। डेयरी, पोल्ट्री, सुअर, बकरी पालन समेत अन्य क्षेत्र में ओडिशा के समग्र पशुधन विकास, किसानों के सशक्तीकरण के बारे में बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम, तकनीक हस्तांतरण से आईवीआरआई सहयोग पर जोर दिया। पशु चिकित्सा अधिकारियों ने अल्ट्रासोनोग्राफी, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक्स, रेडियोग्राफी, पोस्टमाॅर्टम, क्लीनिकल पैथोलॉजी, प्रजनन तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण की मांग की।
इन विषयों पर भी हुई चर्चा
संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने बताया कि बैठक में प्रतिभागियों ने एफएमडी, एलएसडी, पॉक्स रोगों के स्ट्रेन विश्लेषण, वन हेल्थ दृष्टिकोण के तहत जूनोटिक निगरानी, कम लागत वाले परीक्षण किट, जलवायु परिवर्तन का रोग संचार पर प्रभाव, गैर आक्रामक परजीवी वैक्सीन विकास पर चर्चा की। एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस प्रबंधन, राष्ट्रीय एएमआर डेटाबेस निर्माण, एंटीबायोटिक, पशु फीड तकनीक, शीघ्र गर्भ, हीट पहचान किट, एआई आधारित पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, टेली-वेटरनरी सेवा पर भी चर्चा की गई। यहां जेडी एकेडमिक डॉ. एसके मेंदिरत्ता व अन्य लोग मौजूद रहे। ब्यूरो