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Bareilly News: आईवीआरआई ने रोहिलखंडी और वृंदावनी गाय की नस्लों का कराया पंजीकरण

Thu, 15 Jan 2026 02:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jan 2026 02:57 AM IST
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IVRI registers Rohilkhandi and Vrindavani cow breeds
एनबीएजीआर के आयोजित समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सौंपा प्रमाणपत्र
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान को रोहिलखंडी और वृंदावनी गायों की नस्ल के पंजीकरण में कामयाबी हासिल की है। राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएजीआर) की ओर से नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, आईसीएआर महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की अपर सचिव वर्षा जोशी ने आईवीआरआई के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त को पंजीकरण का प्रमाणपत्र सौंपा।
डाॅ. दत्त ने बताया कि नस्ल पंजीकरण से इनके संरक्षण, संवर्धन, सुधार के लिए कार्ययोजना बनाने में सहयोग मिलेगा। किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा। ये बरेली मंडल की उम्दा नस्ल साबित होंगी और क्षेत्र के पशुपालकों की आय में बढ़ोतरी करेंगी।
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बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली नस्ल है रोलिखंडी
रोहिलखंडी गाय बरेली, बदायूं, पीलीभीत जिले में ही मिलती हैं। इनकी अनुमानित संख्या करीब तीन लाख है। इसका रंग सफेद और आकार मध्यम होता है। 210 दिनों तक प्रतिदिन करीब पांच लीटर दूध देती हैं। इनकी प्रजनन और दुग्ध उत्पादन क्षमता 8–10 ब्यात तक होती है। बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता से ये बीमार कम होती हैं। रोहिलखंडी गाय देश की 55वीं और उत्तर प्रदेश की छठी पंजीकृत नस्ल है। इस नस्ल के पंजीकरण में डॉ. त्रिवेणी दत्त के नेतृत्व में डॉ. जीके गौड़, डॉ. रूपसी तिवारी, डॉ. अनुज चौहान, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. आयोन, डॉ. अमित कुमार, डॉ. श्रीकांत का योगदान रहा।
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देश की तीसरी पंजीकृत कृत्रिम नस्ल की गाय है वृंदावनी
वृंदावनी देश की तीसरी पंजीकृत कृत्रिम नस्ल की गाय है। इसे वर्ष 2006 में एचएफ, ब्राउन स्विस जर्सी (विदेशी नस्ल) के 50–75 फीसदी और हरियाणा (स्वदेशी नस्ल) के 25–50 फीसदी अनुवांशिक गुणों के संयोजन से विकसित किया गया। 10 पीढ़ी के बाद गुण में स्थिरता आई। रंग भूरा, काला और आकार मध्यम होता है। औसत दुग्ध उत्पादन एक ब्यात में 35 सौ किलो है। कृत्रिम गर्भाधान के लिए वर्ष 2009 से 2025 तक वृंदावनी सांड़ों के स्पर्म के 1,92,910 डोज एजेंसियों को दिए गए। नस्ल विकास, पंजीकरण में डॉ. जीके गौड़, डॉ. त्रिवेणी दत्त, डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. एकेएस तोमर, डॉ. एसके सिंह, डॉ. अनुज चौहान, डॉ. सुब्रत घोष, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. मानस का योगदान रहा। ब्यूरो
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