फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   IVRI employees become helpless with hunger in lockdown

लॉकडाउन में भूख से बेहाल बेजुबानों का सहारा बना आईवीआरआई कर्मचारी

Sun, 19 Apr 2020 01:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2020 01:33 AM IST
विज्ञापन
IVRI employees become helpless with hunger in lockdown
कुत्तो को खाना खिलाते लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

पूरे शहर में घूम-घूम कर गायों, कुत्तों, बंदरों को खिला रहे हैं खाना

विज्ञापन
बरेली। लॉकडाउन के दौरान रेस्टोरेंट, ढाबे और खान-पान की अन्य दुकानें बंद होने के कारण शहर की सड़कों पर घूमने वाले आवारा जानवरों के भोजन का सहारा भी छिन गया है। लोगों के निकलने पर पांबदी लगने से बंदर, गाय, कुत्ते, पक्षी आदि भूख से बेहाल हुए तो आईवीआरआई कर्मचारी मदन शर्मा उनके लिए खाने का इंतजाम करने के लिए आगे आए हैं। वह लॉकडाउन में हर शाम शहर में घूमकर आवारा जानवरों और पक्षियों को खाना खिलाते हैं।
लॉकडाउन में इंसानों का ही नहीं जानवरों का भी हाल बेहाल है। इंसान तो अपनी परेशानी एक-दूसरे से साझा कर मदद हासिल कर लेते हैं, लेकिन बेजुबान जानवर कहां जाएं, कैसे मदद मांगें? लॉकडाउन से शहर में खानपान का व्यवसाय ठप होने से आवारा जानवरों का भूख मिटाने का सहारा छिन गया है। इन विषम परिस्थितियों में आईवीआरआई में सपोर्टिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत बिराहीपुर के मदन शर्मा जानवरों के लिए खाने का इंतजाम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह वैसे तो तीन सालों से जानवरों को खाना खिला रहे हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इधर ज्यादा जानवरों के लिए खाने की व्यवस्था कर रहे हैं। रोजाना चौपुला रोड से शुरू करके पटेल चौक, नॉवल्टी चौराहा, मनिहारों वाली गली, जिला परिषद, कोहाड़ापीर, आईवीआरआई परिसर, इज्जतनगर रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर जानवरों को खाना डालते हैं। मदन हर महीने अपने वेतन से करीब 15 हजार रुपये जानवरों के खाने पर खर्च करते हैं। इस दौरान उनके साथ इलाके के ही समाज सेवी नरेंद्र पाल भी मदद के लिए मौजूद रहते हैं।
विज्ञापन

कुत्तों को खीर और बंदरों को देते हैं केले

मदन ने बताया कि लॉकडाउन में दुकानें बंद होने के कारण सामान नहीं मिल पा रहा है। पहले नमकीन, ब्रेड, बिस्कुट और फल जानवरों को खिलाते थे, लेकिन अब यह संभव नहीं हो पा रहा। मदन अब घर से एक बाल्टी में करीब 30 किलो खीर बनवाकर लेकर निकलते हैं। रास्ते में कुत्तों को खीर खिलाते हैं। बंदरों और गायों के लिए गली मोहल्लों की दुकानों से केले और अन्य सामान लेकर खिलाते हैं। पक्षियों के लिए आईवीआरआई के बाहर दुकानों से दाना खरीदकर डालते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed