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सुरक्षा की मांग पर बंद कराया आईवीआरआई, सात घंटे हंगामा
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Wed, 30 Mar 2016 01:02 AM IST
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आईवीआरआई में शोध छात्र पर हुए हमले के विरोध में मंगलवार को छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। छात्रों ने आईवीआरआई में काम बंद करा दिया और मुख्य गेट पर ताला डाल दिया। सात घंटे हंगामे के बाद सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता किए जाने के आश्वासन के बाद छात्रों की नाराजगी शांत हुई।
आईवीआरआई में कुत्ते की मौत पर मालिक की ओर से शोध छात्र डॉ. देशदीपक पर हमले के अगले दिन विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। सुरक्षा की मांग को लेकर छात्रसंघ के नेतृत्व में सभी बीवीएससी, एमवीएससी और पीएचडी स्कॉलर हड़ताल पर चले गए। छात्रों ने सुबह दस बजे पहले पॉलीक्लीनिक में प्रदर्शन किया और क्लीनिक बंद कराया। इसके बाद लाइब्रेरी और लैब भी बंद करा दी। वहां से भी छात्र मुख्य गेट पर पहुंचे और उसमें भी तालाबंदी कर दी। इससे अंदर-बाहर आने-जाने का रास्ता भी बंद हो गया। आईवीआरआई के लोग बाहर नहीं जा पाए और जो बाहर थे वह अंदर नहीं जा सके। छात्रों ने सुरक्षा की मांग को लेकर नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि पशुओं की सुरक्षा हम करें और हमारी सुरक्षा कौन करे। काफी देर तक नारेबाजी की। सुबह से लगभग 700 छात्र वहां पर एकत्र हो गए। मुख्य गेट पर ही बैठकर छात्रों ने खाना खाया। छात्राओं ने कहा कि 24 घंटे पॉलीक्लीनिक खुलती है और रात 12.30 बजे के बाद कोई भी वैज्ञानिक नहीं रहता है। सिर्फ शोध छात्र ही ड्यूटी करते हैं। रात में लोग शराब पीकर आते हैं और छात्रों से साथ अभद्रता करते हैं। कोई भी उन्हें रोकने वाला नहीं होता है। यही स्थिति छात्राओं के साथ भी रहती है।
छात्रों ने कार्यवाहक डायरेक्टर डॉ. बीपी मिश्रा को मांग पत्र भी सौंपा। उन्होंने डायरेक्टर डॉ. आरके सिंह से बातचीत कर छात्रों की मांगें बताई, लेकिन दोपहर तक कोई सहमति नहीं बन सकी। शाम साढ़े पांच बजे छात्रों ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। उनके आश्वासन पर छात्र शांत हुए और हड़ताल वापस ली।
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छात्रों की ये हैं मांगे
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0 किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को आईवीआरआई में प्रवेश न दिया जाए।
0 आईवीआरआई में मेटल स्कैनर लगाई जाए, ताकि कोई हथियार अंदर जाने पर उसे रोका जा सके।
0 डिलीवरी ब्वॉयज को गर्ल्स हॉस्टल में प्रवेश न दिया जाए।
0 लेडी सेक्युरिटी ऑफिसर भी रखी जाए।
0 लैब के आसपास भी सेक्युरिटी के इंतजाम हों।
0 ओपीडी में कामकाज के दौरान वैज्ञानिक भी मौजूद रहें।
0 सभी दवाइयां मुफ्त में नहीं मिलेंगी, ऐसी नोटिस भी लगाई जाए। ताकि कोई छात्रों पर दबाव न बना सके।
0 पशु मालिकों से रिस्क नोट पर दस्तखत भी करवाए जाएं।
0 सभी छात्रों का वैक्सीनेशन किया जाए।
0 रेफरल पॉलीक्लीनिक के छात्रों और कर्मचारियों के लिए यूनिफार्म लागू की जाए।
0 रेफरल पॉलीक्लीनिक में सिर्फ रेफर किए हुए जानवरों का इलाज किया जाए।
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आईवीआरआई में कुत्ते की मौत पर मालिक की ओर से शोध छात्र डॉ. देशदीपक पर हमले के अगले दिन विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया। सुरक्षा की मांग को लेकर छात्रसंघ के नेतृत्व में सभी बीवीएससी, एमवीएससी और पीएचडी स्कॉलर हड़ताल पर चले गए। छात्रों ने सुबह दस बजे पहले पॉलीक्लीनिक में प्रदर्शन किया और क्लीनिक बंद कराया। इसके बाद लाइब्रेरी और लैब भी बंद करा दी। वहां से भी छात्र मुख्य गेट पर पहुंचे और उसमें भी तालाबंदी कर दी। इससे अंदर-बाहर आने-जाने का रास्ता भी बंद हो गया। आईवीआरआई के लोग बाहर नहीं जा पाए और जो बाहर थे वह अंदर नहीं जा सके। छात्रों ने सुरक्षा की मांग को लेकर नारेबाजी भी की। उन्होंने कहा कि पशुओं की सुरक्षा हम करें और हमारी सुरक्षा कौन करे। काफी देर तक नारेबाजी की। सुबह से लगभग 700 छात्र वहां पर एकत्र हो गए। मुख्य गेट पर ही बैठकर छात्रों ने खाना खाया। छात्राओं ने कहा कि 24 घंटे पॉलीक्लीनिक खुलती है और रात 12.30 बजे के बाद कोई भी वैज्ञानिक नहीं रहता है। सिर्फ शोध छात्र ही ड्यूटी करते हैं। रात में लोग शराब पीकर आते हैं और छात्रों से साथ अभद्रता करते हैं। कोई भी उन्हें रोकने वाला नहीं होता है। यही स्थिति छात्राओं के साथ भी रहती है।
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छात्रों ने कार्यवाहक डायरेक्टर डॉ. बीपी मिश्रा को मांग पत्र भी सौंपा। उन्होंने डायरेक्टर डॉ. आरके सिंह से बातचीत कर छात्रों की मांगें बताई, लेकिन दोपहर तक कोई सहमति नहीं बन सकी। शाम साढ़े पांच बजे छात्रों ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया। उनके आश्वासन पर छात्र शांत हुए और हड़ताल वापस ली।
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छात्रों की ये हैं मांगे
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0 किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को आईवीआरआई में प्रवेश न दिया जाए।
0 आईवीआरआई में मेटल स्कैनर लगाई जाए, ताकि कोई हथियार अंदर जाने पर उसे रोका जा सके।
0 डिलीवरी ब्वॉयज को गर्ल्स हॉस्टल में प्रवेश न दिया जाए।
0 लेडी सेक्युरिटी ऑफिसर भी रखी जाए।
0 लैब के आसपास भी सेक्युरिटी के इंतजाम हों।
0 ओपीडी में कामकाज के दौरान वैज्ञानिक भी मौजूद रहें।
0 सभी दवाइयां मुफ्त में नहीं मिलेंगी, ऐसी नोटिस भी लगाई जाए। ताकि कोई छात्रों पर दबाव न बना सके।
0 पशु मालिकों से रिस्क नोट पर दस्तखत भी करवाए जाएं।
0 सभी छात्रों का वैक्सीनेशन किया जाए।
0 रेफरल पॉलीक्लीनिक के छात्रों और कर्मचारियों के लिए यूनिफार्म लागू की जाए।
0 रेफरल पॉलीक्लीनिक में सिर्फ रेफर किए हुए जानवरों का इलाज किया जाए।