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बरेली में पुल से गिरकर मजदूर की मौत: ठेकेदार ने धनंजय को हड़काया था... डर लगता है तो कल से मत आना

Tue, 05 Sep 2023 05:27 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 05 Sep 2023 05:27 PM IST
सार

मजदूर धनंजय की मौत के मामले में कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने एडीएम की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। इसमें अपर नगर आयुक्त प्रथम को भी शामिल किया गया है।

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Investigation committee formed in case of worker death after falling from under-construction flyover
कुतुबखाना पुल से गिरकर हुई थी मजदूर की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में बिना सुरक्षा उपकरणों के शटरिंग लगाते मजदूर धनंजय की निर्माणाधीन कुतुबखाना पुल से गिरकर मौत हो गई। हादसा रविवार तड़के हुआ था। सोमवार को मजदूर ने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि गिरने से उसका सिर और लिवर फट गया था। 

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मजदूर धनंजय की मौत का जिम्मेदार कौन है? सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किए बगैर मजदूर कैसे काम कर रहे थे? निरीक्षणों में अब तक यह खामी क्यों नहीं पकड़ी जा सकी? यह तय करने के स्थान पर अफसरों का पूरा जोर मजदूर की मौत की वजह बनी लापरवाही पर पर्दा डालने में ज्यादा है।

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मजदूरों ने बताया कि जाल के लिए उन्होंने कई बार प्रोजेक्ट मैनेजर से कहा भी, लेकिन यह कहकर हड़का दिया गया कि डर लगता है तो कल से मत आओ। मजबूर होकर मजदूरों ने कहना ही बंद कर दिया। सेफ्टी बेल्ट न सही, अगर जाल भी बंधा होता तो धनंजय की जान बच सकती थी।

ठेकेदार पर झाड़ा पल्ला 

अब अफसर यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि सुरक्षा के नियमों का पालन कराना निर्माण कराने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी है, मगर कार्रवाई कुछ नहीं की गई है। उधर, श्रमिकों का आरोप है कि इस लापरवाही में अफसर भी कम जिम्मेदार नहीं। मजदूर 20-22 फुट ऊंचे पिलर पर शटरिंग का काम बिना किसी सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट के करते हैं। शटरिंग के नीचे किसी तरह का जाल भी नहीं बांधा गया है।

मजदूरों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी जिला अस्पताल के सामने स्लैब सड़क पर आकर गिरी थी। तब कई राहगीर बच गए थे। यदि किसी के ऊपर गिर जाती तो बड़ा हादसा हो जाता। पहले हुए हादसों के बाद भी अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूरी करने आते हैं।  

सेतु निगम के महाप्रबंधक केएन ओझा का दावा है कि जब-जब निरीक्षण किया, हर बार टोका। उनके सामने मजदूर हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट लगा लेते हैं लेकिन हर समय हेलमेट व बेल्ट नहीं लगाते। अब कार्यदायी संस्था और सेतु निगम के साइट इंजीनियरों से पूरी रिपोर्ट लेंगे। इसके बाद ही किसी तरह का निर्णय ले सकेंगे।

खतरा सिर पर, अब भी नहीं चेते

कुतुबखाना पुल के निर्माण के लिए जहां-जहां स्लैब पड़नी होती है वहां पर लोहे के स्ट्रक्चर पर शटरिंग लगाई जाती है। शटरिंग के नीचे और अगल-बगल से लोग दिन भर गुजरते रहते हैं। निर्माण सामग्री जमीन पर है और सिर पर शटरिंग गिरने का खतरा रहता है। इससे पहले 18 जुलाई को शटरिंग गिरी भी थी, लेकिन तब लोग बच गए थे। अब एक मजदूर की मौत हुई है। 

खतरा पर सिर पर है मगर जिम्मेदार अब भी नहीं चेत रहे। हादसा होने के बाद सोमवार को भी लोग पूरे दिन उसी पिलर के नीचे से गुजरते रहे। सेतु निगम ने मौके के हालात से नगर आयुक्त को भी अवगत कराया है। इसमें कहा गया है कि जिस जगह पर शटरिंग है और वहां उसके गिरने का खतरा है।

हादसे के बाद मजदूरों ने रोक दिया काम

धनंजय की मौत के बाद से मजदूरों ने काम रोक दिया था। सोमवार रात एक बजे तक काम शुरू नहीं हो सका। मजदूरों में कोई विरोध भी नहीं कर रहा है मगर काम भी नहीं कर रहा है। माना जा रहा है कि मजदूर ठेकेदार कंपनी की लापरवाही और अफसरों की अनदेखी के बीच काम करने के लिए मजबूर हैं। विरोध करने पर उनसे काम छीना जा सकता है।

स्मार्ट सिटी की सीईओ निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि पहला उद्देश्य परिवार की आर्थिक मदद करना है। वह कर रहे हैं। मामले में कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

जांच कमेटी गठित

कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने एडीएम की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। इसमें अपर नगर आयुक्त प्रथम को भी शामिल किया गया है। कमेटी हादसे की वजह, इसके जिम्मेदार और सुरक्षा इंतजामों में खामी का पता लगाकर तीन दिन में रिपोर्ट देगी।

स्मार्ट सिटी लिमिटेड के महाप्रबंधक संजय कुमार तिवारी ने कहा कि सेफ्टी के नियमों का पालन कराने की पहली जिम्मेदारी निजी फर्म (ठेकेदार) की है। स्मार्ट सिटी व सेतु निगम के अभियंताओं को नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है। अगर फर्म ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कराया तो यह जांच का विषय है। सेतु निगम से प्रारंभिक आख्या लेने के बाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड की सीईओ के सामने रखेंगे।
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