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परचम कुशाई से उर्स-ए-वामिकी का आगाज
बरेली
Updated Mon, 16 Jan 2017 12:13 AM IST
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cultural
शाहदाना रोज स्थित दरगाह आले रसूल खानकाह वामिकिया निशातिया में परचमी जुलूस के साथ उर्स-ए-वामिकी का शानदार आगाज हो गया है। इसमें शिरकत करने के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंदों का जमावड़ा रहा।
इस मौके पर शुरू हुई चार रोजा तकरीब में हजरत सय्यद वामिक मियां व हजरत सय्यद निशात मियां का उर्स मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत सुबह कुरान ख्वानी से हुई। नातो मनकबत की महफिल और सलातो सलाम के बाद लंगर जारी किया गया। दोपहर बाद बाग अहमद अली तालाब से परचमी जुलूस निकाला गया। इसमें चादरें भी शामिल रहीं। जो नायब सज्जादानशीन मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी की कयादत में निकाला गया।
जुलूस से पहले असलम मियां का स्वागत किया गया। इसके बाद खानकाह से जुडे़ लोगों की दस्तारबंदी के बाद असलम मियां ने हाफिज अलाउद्दीन वामिकी को परचम-ए-वामिकी सौंप कर रवाना किया। जो अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां पर परचम कुशाई की रस्म के बाद पहली नजर पेश की गई। बाद में सज्जादानसीन पीरे तरीकत सय्यद मोहम्मद मियां वामिकी जिलानी ने खास दुआ की।
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हिंदू मुस्लिम सभी ने किया स्वागत
जुलूस का बांस मंडी, मजार पतंग शाह दरगाह पर मार्केट के दुकानदारों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जब कि साहू गोपीनाथ मार्केट पर दुकानदारों ने लंगर बांटा और शहामतगंज में हिंदू मुस्लिम दुकानदारों ने मिल कर जुलूस का स्वागत किया।
दीनी मालूमाती मुकाबला
उर्स तकरीब की कड़ी में रात को दीनी मालूमाती मुकाबला हुआ। इसमें पहला इनाम कुरान शरीफ (कंजुल इमान उर्दू), दूसरा इनाम कुरान शरीफ (कंजुल इमान हिंदी) और तीन लोगों को अजमेर शरीफ का टिकट दिया गया। इसमें प्रोफेसर डा. महमूद हुसैन, मुफ्ती जहांगीर आलम व कारी अलाउद्दीन ने सवाल किए।
आज का कार्यक्रम
बरेली। उर्स-ए-वामिकी के दूसरे रोज सोमवार को रात में महफिले समा होगी और देर रात एक बजे हजरत निजाम उद्दीन औलिया का कुल शरीफ होगा।
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इस मौके पर शुरू हुई चार रोजा तकरीब में हजरत सय्यद वामिक मियां व हजरत सय्यद निशात मियां का उर्स मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत सुबह कुरान ख्वानी से हुई। नातो मनकबत की महफिल और सलातो सलाम के बाद लंगर जारी किया गया। दोपहर बाद बाग अहमद अली तालाब से परचमी जुलूस निकाला गया। इसमें चादरें भी शामिल रहीं। जो नायब सज्जादानशीन मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी की कयादत में निकाला गया।
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जुलूस से पहले असलम मियां का स्वागत किया गया। इसके बाद खानकाह से जुडे़ लोगों की दस्तारबंदी के बाद असलम मियां ने हाफिज अलाउद्दीन वामिकी को परचम-ए-वामिकी सौंप कर रवाना किया। जो अपने निर्धारित मार्गों से होता हुआ दरगाह शरीफ पहुंचा। यहां पर परचम कुशाई की रस्म के बाद पहली नजर पेश की गई। बाद में सज्जादानसीन पीरे तरीकत सय्यद मोहम्मद मियां वामिकी जिलानी ने खास दुआ की।
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हिंदू मुस्लिम सभी ने किया स्वागत
जुलूस का बांस मंडी, मजार पतंग शाह दरगाह पर मार्केट के दुकानदारों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जब कि साहू गोपीनाथ मार्केट पर दुकानदारों ने लंगर बांटा और शहामतगंज में हिंदू मुस्लिम दुकानदारों ने मिल कर जुलूस का स्वागत किया।
दीनी मालूमाती मुकाबला
उर्स तकरीब की कड़ी में रात को दीनी मालूमाती मुकाबला हुआ। इसमें पहला इनाम कुरान शरीफ (कंजुल इमान उर्दू), दूसरा इनाम कुरान शरीफ (कंजुल इमान हिंदी) और तीन लोगों को अजमेर शरीफ का टिकट दिया गया। इसमें प्रोफेसर डा. महमूद हुसैन, मुफ्ती जहांगीर आलम व कारी अलाउद्दीन ने सवाल किए।
आज का कार्यक्रम
बरेली। उर्स-ए-वामिकी के दूसरे रोज सोमवार को रात में महफिले समा होगी और देर रात एक बजे हजरत निजाम उद्दीन औलिया का कुल शरीफ होगा।