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अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवसः मानवाधिकारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आवाज उठा रही बरेली की बेटी

Tue, 11 Aug 2020 02:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2020 02:24 AM IST
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International Youth Day: Bareilly's daughter voicing international stage for human rights
श्रद्धा सक्सेना। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ गृह मंत्रालय से जुड़कर बाल अधिकारों पर भी काम कर रही हैं श्रद्घा

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बरेली। पढ़ाई के समय से ही बेटियों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने की शुरुआत के बाद बरेली की बेटी श्रद्धा सक्सेना का लंबा समय मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करते गुजरा। अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही श्रद्धा उम्र के छोटे पड़ाव पर ही कामयाबी का ऊंचा मुकाम हासिल कर चुकी हैं। मानवाधिकारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ काम करते हुए कई बार सम्मानित हो चुकी श्रद्धा कुछ समय पहले बतौर विधि सलाहकार गृह मंत्रालय से संबद्ध हुई हैं और बच्चों के शोषण और उनके अधिकारों पर काम कर रही हैं।
कोहाड़ापीर इलाके के गुद्ड़बाग में अधिवक्ता विजय प्रकाश सक्सेना की बेटी श्रद्घा ने बरेली कॉलेज से 2013 में बीएससी और 2016 में एलएलबी किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने महिलाओं के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के साथ उन्हें उनके अधिकारियों के प्रति जागरूक करने की मुहिम शुरू की थी। श्रद्धा के मुताबिक अपने घर के आसपास ही वह देखती थीं कि कई लड़कियों को स्कूल नहीं जाने दिया जाता था। उनके घरवाले इसलिए डरते थे कि कहीं उनकी बेटी छेड़खानी की शिकार न हो जाए। उन्होंने ऐसे परिवारों का डर खत्म करने के लिए उनसे बातचीत शुरू की। शुरुआत में तो उन्हें मायूस होना पड़ा लेकिन बाद में कुछ सकारात्मक नतीजे आने शुरू हुए।
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हौसला तब बढ़ा जब उन्होंने नौ साल पहले एक निजी हॉस्पिटल में दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़िता के लिए लड़ाई लड़ी। पीड़िता ने यह लड़ाई लड़ने में काफी हिम्मत दिखाई। इस हादसे के बाद उसने नई जिंदगी शुरू की। वह बहुत अच्छी पेंटिंग कर लेती थी, इसी में अपना मन लगाकर उसने पुरानी बातें भुलाई और अब सामान्य जीवन गुजार रही है। श्रद्घा का कहना है कि इस शुरुआत के बाद उन्होंने मानवाधिकारों के साथ महिला उत्पीड़न के खिलाफ इस तरह की कई लड़ाई लड़ीं। आगे भी ऐसा ही करती रहेंगी। उनका यही जज्बा देखकर यूपी सरकार ने उन्हें 2018 में ‘मैं हूं बेटी पुरस्कार’ से सम्मानित किया। श्रद्घा ने मानवाधिकारों पर तमाम ब्लॉग भी लिखे। इसी दौर में इस क्षेत्र में काम करने वाली कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से भी जुड़ीं। 2018 में ब्राजील की संस्था नोबल ऑर्डर आफ ह्यूमन एक्सीलेंस ने उन्हें ह्यूमन राइट्स एंबेसडर बनाया। वह यूनाइटेड नेशन यूथ एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सेक्रेटरी जनरल भी रही हैं। वर्ल्ड यूथ समिट और यूथ एरिशा ह्यूमन राइट्स समिट में भी वह भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
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