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रसूल-ए-आजम की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं : तौकीर
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बरेली। इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौंसिल (आईएमसी) प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने कहा कि रसूल-ए-आजम की शान में गुस्ताखी की जा रही है। कानपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखने को जुर्म बता दिया गया। एफआईआर दर्ज कर ली गई। शाहजहांपुर में कुरान की बेअदबी की गई। मुसलमानों के साथ ज्यादती करने वालों में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी शामिल हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक मौलाना इससे पहले भी सड़कों पर उतर सकते हैं। इस आंदोलन में महिलाओं ने भी शामिल होने की इच्छा जताई है। मौलाना ने सोचने के लिए वक्त मांगा है।
मौलाना ने शुक्रवार को अपने सौदागरान स्थित आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमारी खामोशी और सहनशीलता को कमजोरी ना समझा जाए। कोई मुसलमान किसी धर्म के बारे में गलत टिप्पणी नहीं करता तो दूसरों को भी यह हक नहीं कि हमारे मजहब और बहन-बेटियों पर टिप्पणी करें। कुछ हिंदूवादी संगठन और नेता लंबे वक्त से ऐसा कर रहे हैं। मुसलमान सड़क से लेकर संसद तक, कहीं सुरक्षित नहीं है। संसद में मुसलमानों को गालियां दी जाती हैं। पिछले दिनों हमें नमक हराम कहा गया। ये उन लोगों ने कहा जो खुद नमक हराम हैं।
धर्म परिवर्तन के नाम पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप
मौलाना ने कहा कि धर्म परिवर्तन के नाम पर एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। मुस्लिम बहन-बेटियों का धर्म परिवर्तन कराने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। हम अपने मुल्क को नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका नहीं बनने देना चाहते। इन तीनों मुल्कों में जितनी मुसलमानों की आबादी है, उससे कहीं ज्यादा मुसलमान हिंदुस्तान में हैं। अगर ये मुसलमान सड़कों पर आ गए तो मुल्क में क्या हालात बनेंगे और इसका जिम्मेदार कौन होगा? इसलिए हमें सड़कों पर आने के लिए मजबूर न किया जाए। जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि इस्लाम औरतों को सबसे ज्यादा इज्जत देता है। इस्लाम मजहब पर औरतों को लेकर टिप्पणी करने वाले अपने धर्म में लिखी बातों को देखें। हमें इस बात से मतलब नहीं कि किस धर्म में क्या लिखा है? प्रेसवार्ता के दौरान मुनीर इदरीसी, डाॅ. नफीस खान, जिलाध्यक्ष शमशाद बाबूजी मौजूद रहे। संवाद
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मौलाना ने शुक्रवार को अपने सौदागरान स्थित आवास पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमारी खामोशी और सहनशीलता को कमजोरी ना समझा जाए। कोई मुसलमान किसी धर्म के बारे में गलत टिप्पणी नहीं करता तो दूसरों को भी यह हक नहीं कि हमारे मजहब और बहन-बेटियों पर टिप्पणी करें। कुछ हिंदूवादी संगठन और नेता लंबे वक्त से ऐसा कर रहे हैं। मुसलमान सड़क से लेकर संसद तक, कहीं सुरक्षित नहीं है। संसद में मुसलमानों को गालियां दी जाती हैं। पिछले दिनों हमें नमक हराम कहा गया। ये उन लोगों ने कहा जो खुद नमक हराम हैं।
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धर्म परिवर्तन के नाम पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप
मौलाना ने कहा कि धर्म परिवर्तन के नाम पर एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। मुस्लिम बहन-बेटियों का धर्म परिवर्तन कराने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। हम अपने मुल्क को नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका नहीं बनने देना चाहते। इन तीनों मुल्कों में जितनी मुसलमानों की आबादी है, उससे कहीं ज्यादा मुसलमान हिंदुस्तान में हैं। अगर ये मुसलमान सड़कों पर आ गए तो मुल्क में क्या हालात बनेंगे और इसका जिम्मेदार कौन होगा? इसलिए हमें सड़कों पर आने के लिए मजबूर न किया जाए। जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा कि इस्लाम औरतों को सबसे ज्यादा इज्जत देता है। इस्लाम मजहब पर औरतों को लेकर टिप्पणी करने वाले अपने धर्म में लिखी बातों को देखें। हमें इस बात से मतलब नहीं कि किस धर्म में क्या लिखा है? प्रेसवार्ता के दौरान मुनीर इदरीसी, डाॅ. नफीस खान, जिलाध्यक्ष शमशाद बाबूजी मौजूद रहे। संवाद
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