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Bareilly News: पुलिस ने अश्लीलता के मामले में इंस्पेक्टर क्राइम को दी क्लीनचिट, कोर्ट पहुंची पीड़िता

Sat, 03 Feb 2024 10:37 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sat, 03 Feb 2024 10:37 AM IST
सार

समाजसेवी महिला ने इंस्पेक्टर क्राइम पर अश्लीलता करने का आरोप लगाते हुए अप्रैल 2023 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तत्कालीन सीओ तृतीय ने इस मामले में जांच की। जांच रिपोर्ट में पुलिस ने इंस्पेक्टर को क्लीनचिट दे दी है। 

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Police gives clean chit to Inspector Crime in obscenity case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बरेली में पिछले साल हमले के बाद इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट कराने गई समाजसेविका से अश्लील हरकतें करने के मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर क्राइम राघवेंद्र प्रताप सिंह को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी है। खामोशी से लगाई गई एफआर में तर्क दिया है कि उस वक्त थाने का सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था। इसकी जानकारी होने पर पीड़िता ने एफआर को कोर्ट में चुनौती दी है।

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29 अप्रैल 2023 के घटनाक्रम को लेकर समाजसेविका ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक युवती की पैरवी करते हुए उन्होंने उसे धोखा देने वाले पीलीभीत में तैनात सिपाही रोहित उर्फ इमरान पर रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पीलीभीत से लौटते समय बैरियर वन चौकी के पास रोहित के कुछ दोस्तों ने उन पर हमला कर दिया था। अगले दिन वह इसकी शिकायत करने इज्जतनगर थाने पहुंचीं तो इंस्पेक्टर क्राइम राघवेंद्र प्रताप सिंह मिले। 
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आरोप है कि उनके कहने पर महिला सिपाही उन्हें कमरे में ले गई। उनके कपड़े हटवाकर फोटो खींचे और बयान का वीडियो बनाया। इतने में इंस्पेक्टर क्राइम भी अंदर आ गए। उन्होंने भी वही बातें दोहराईं। वहां मौजूद और लोगों को भी उनके फोटो व वीडियो दिखाए। महिला ने इसे नारी सम्मान के विपरीत अश्लील कृत्य बताकर शिकायत की थी।

जांच रिपोर्ट में इंस्पेक्टर पर लगे आरोप खारिज 
तत्कालीन सीओ तृतीय आशीष प्रताप सिंह ने इस मामले में जांच की जो तत्कालीन प्रेमनगर थाना प्रभारी राजेश प्रताप सिंह की विवेचना में एफआर का आधार बनी। इसमें राघवेंद्र सिंह को क्लीनचिट देते हुए बताया गया कि इंस्पेक्टर ने इस तरह का कोई कृत्य नहीं किया था। साथ ही लिखा कि संबंधित दिन व समय की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग या फुटेज नहीं मिली। सीसीटीवी टेक्नीशियन से वार्ता की गई तो पता लगा कि डाटाबेस क्रैश हो गया है।

समाजसेविका ने बताया कि पुलिस ने साजिशन डाटाबेस क्रैश होने की कहानी गढ़ी है। विवेचक ने उनका और उनके साथ मौजूद लोगों का बयान तक नहीं लिया। उन्हें एफआर लगने की जानकारी तक नहीं दी गई। कोर्ट के स्तर से जानकारी हुई है। कोर्ट में एफआर पर आपत्ति दाखिल की है, नौ फरवरी को तारीख लगी है। आरोपी को सजा दिलाने के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करूंगी।

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