18 साल पहले देवरनिया के दमखोदा गांव में हुए उपद्रव में अदालत ने 16 लोगों को कैद की सजा सुनाई है। इस मामले के छह आरोपियाें की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। सजा का आदेश अपर सत्र कृष्ण यादव ने किया। 3 अक्तुबर 2000 को देवरानिया के गांव दमखोदा में तत्कालीन पैट्रोलियम राज्यमंत्री को सार्वजनिक भूमि पर ब्लॉक संस्थान केंद्र का शिलान्यास करना था। इस जमीन का गांव के लोग कंडे रखकर इस्तेमाल करते थे। शिलान्यास के इंतजाम के लिए वहां पर पुलिस के लोग गए तो पता चला कि ढाकन लाल के मकान पर कुछ लोग इक्ट्ठा है जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं जो शिलान्यास के कार्यक्रम में अड़चन डालकर उपद्रव करना चाहते हैं। इस खबर पर देवरनिया के थानाध्यक्ष पुलिस फोर्स के साथ ढाकन लाल के मकान पर पहुंचे और वहां पर मौजूद लोगों को समझाने की कोशिश की तो लोगों ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से पथराव शुरू कर दिया। अभियुक्त हरिराम ने छत से एक ईंट का टुकड़ा थानाध्यक्ष के सिर पर मारा जिससे वह घायल होकर गिर पड़े । एक ईंट हेड कांस्टेबिल मदनलाल को भी लगी । दोनों लोग मौके पर बेहोश हो गए। भीड़ में से अभियुक्त छत्रपाल व डोरीलाल ने पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से तमंचों से फायर किए जिससे पुलिस पार्टी के लोग बाल बाल बचे। इसी बीच भगदड़ मच गई। घायल पुलिस वालों को अस्पताल भेजा गया और तीस लोगों के खिलाफ मुकदमा लिखा गया। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव ने घायल विद्याराम दिवाकर ,मदन लाल , महेंद्र सिंह , महावीर सिंह समेत 9 गवाह पेश किए। दौरान मुकदमा छह अभियुक्तों की मौत हो गई। अदालत ने अभियुक्त महेंद्र, छत्रपाल व मोहन सिंह को दोषी ठहराते हुए सात साल कैद की सजा सुनाई। इसके अलावा अभियुक्त सेवाराम, भगवत सरन, शिवरतन, राम स्वरूप , डोरीलाल, महेंद्र पाल , हरप्रसाद, हरीश, देवकी नंदन , रामकुमार , ताराचंद ,ख्याली राम, वीरेंद्र को तीन साल कैद की सजा सुनाई। अदालत ने तीन महिलाओं शांति , श्रीमती भगवती व प्रेम वती को इस शर्त पर रिहा किया कि वह एक साल तक सदाचरण करेंगी। इसके अलावा ढाकन लाल , राम भरोसे , रामपाल व भगवान दास को अधिक आयु के कारण प्रोबेशन पर एक साल के सदाचरण की शर्त पर रिहा कर दिया।