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Bareilly News: प्री एनेस्थेटिक जांच के लिए आईएमए शुरू कराएगा क्लीनिक, जांच दरें तय

Mon, 29 Apr 2024 05:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2024 05:08 AM IST
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IMA will start a clinic for pre-anesthetic test, test rates fixed
बरेली। सर्जरी से पहले प्री एनेस्थेटिक जांच न होने से गंभीर रोगों वाले मरीजों की जान जाने का खतरा रहता है। अगर जांच करा ली जाए तो मृत्युदर को कम किया जा सकता है। इसी कड़ी में आईएमए बरेली अब प्री एनेस्थेटिक चेकअप के लिए क्लीनिक शुरू कराएगा। इसके लिए सिविल लाइंस, महानगर कॉलोनी, राजेंद्र नगर व रामपुर गार्डन में छह क्लीनिक चयनित भी कर लिए गए हैं। साथ ही जांच की दरें भी तय कर दी गई हैं।
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आईएमए अध्यक्ष डॉ. राजीव गोयल के मुताबिक योजना के तहत प्री एनेस्थीसिया चेकअप (पीएसी) की सुविधा 15 सौ रुपये में उपलब्ध होगी। ये जांच की दर सामान्य से 50 फीसदी कम है, ताकि मरीजों को जांच कराने में कोई आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। उनके अनुसार यह पहल प्रदेश में पहली बार बरेली आईएमए ने की है। बताया कि, किसी भी सर्जरी यानी शल्य चिकित्सा, चाहे वह सिजेरियन डिलीवरी हो या कोई जटिल सर्जरी, इसमें एनेस्थेसिया का प्रयोग होता है। इसकी जो दवा होती है, उसके भी कुछ साइड इफेक्ट होते हैं। ऐसे में यदि मरीज डायबिटिक, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या किसी अन्य बीमारी से पूर्व से पीड़ित है तो सर्जरी के दौरान उसकी स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए अगर सर्जरी से पूर्व ही संबंधित मरीज की सभी संभावित जांचें करा ली जाएं तो संबंधित समस्या का निदान किया जा सकता है। फिर सर्जरी के दौरान मृत्यु की आशंका भी एक फीसदी से कम होगी।
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बीमारी पता लगने पर पहले किया जाएगा स्वस्थ
प्री एनेस्थेटिक जांच में बीमारी की पहचान होने पर पहले मरीज को दवा देकर स्वस्थ किया जाएगा। इस प्रक्रिया में पांच-दस दिन या माह भर भी समय लग सकता है। मरीज के सामान्य होने के बाद ही उसकी सर्जरी होगी। इससे फायदा यह होगा कि सर्जरी के बाद मरीज को किसी जटिलता का सामना नहीं करना पड़ेगा। बगैर रोग निदान सर्जरी कराने वालों की तुलना में संबंधित मरीज के 50 फीसदी तेजी से स्वस्थ होने की उम्मीद होगी।
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जांच न होने से होती हैं 2.6 फीसदी मौतें

डॉ. गोयल के मुताबिक आमतौर पर बीमार होने पर ही लोग कई जरूरी जांचें करवाते हैं। तभी उन्हें अन्य बीमारियों के बारे में पता चलता है। ऐसे में अगर किसी मरीज की बगैर जांच सर्जरी हो जाए और वह पूर्व में किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो हालत बिगड़ जाती है। करीब 2.6 फीसदी मौतें ऐसे ही केस में होती हैं। 65 वर्ष पार और गंभीर रोगों की चपेट में रहे मरीज की सर्जरी में मृत्युदर छह फीसदी आंकी गई है।



एनेस्थेटिक कम होने से भी हो रही दिक्कत
जिले में करीब सौ एनेस्थेटिक ही हैं। इनमें कुछ मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक में सेवाएं रहे हैं। वहीं कई एनेस्थेटिक अलग-अलग अस्पतालों में निजी सेवाएं देते हैं। इनकी उपलब्धता आसान न होने के चलते कई बार सामान्य एमबीबीएस चिकित्सक नियमों को दरकिनार कर एनेस्थीसिया दे देते हैं। सर्जरी के दौरान गंभीर घटनाओं की एक वजह यह भी है। स्वास्थ्य विभाग इसमें मूकदर्शक बना है।
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