{"_id":"5a29aa804f1c1bd0408bb65c","slug":"ig-seeks-report-on-nawabganj-case-from-ssp","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईजी ने एसएसपी से मांगी नवाबगंज प्रकरण पर रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईजी ने एसएसपी से मांगी नवाबगंज प्रकरण पर रिपोर्ट
बरेली
Updated Fri, 08 Dec 2017 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवाबगंज प्रकरण को लेकर आईजी एसके भगत ने एसएसपी जोगेंद्र कुमार से पूरे मामले पर रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही इस मामले में जिला प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करने के निर्देश दिए हैं।
नबावगंज में मतगणना के दौरान शहला ताहिर की जीत को लेकर बवाल हो गया था। इस मामले में एसडीएम नवाबगंज राजेश कुमार ने भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, उनके भाई नीरेंद्र सिंह और 50 कार्यकर्ताओं के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट, सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट समेत कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसडीएम एक वीडियो क्लिप को सबूत के तौर पर पेश कर रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष मारपीट करते नजर नहीं आ रहे हैं। घटना के बाद से ही कार्रवाई को लेकर पीसीएस अधिकारी लामबंदी हैं। उनके पक्ष में राजस्व संग्रह अमीन समेत कुछ और कर्मचारी संगठन भी आ गए हैं। इधर, भाजपा नेता प्रशासन को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ने पार्टी संगठन को भी मामले से अवगत करा दिया है। अब आईजी ने एसएसपी से पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
बात करने से बच रहे अधिकारी, भाजपाई
मीडिया में लगातार मामला हाईलाइट होने और शासन तक पहुंचने के चलते अब अधिकारी और भाजपा पदाधिकारी इस प्रकरण पर ज्यादा बात करने से बच रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा है कि अब इस मामले में संगठन को ही निर्णय लेना है। वह पार्टी फोरम के समझ अपना पक्ष रख चुके हैं।
विज्ञापन
वर्जन
एसएसपी से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही जिला प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- एसके भगत, आईजी
तो ठंडे बस्ते में गई मामले की जांच
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल से मुलाकात और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय से प्रकरण के संबंध में बात करने के बाद से पार्टी जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर इस मामले को लेकर निश्चिंत नजर आ रहे हैं। उनसे गुरुवार को जब पूछा गया कि क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट से स्टे लेंगे तो उन्होंने इंकार कर दिया। बोले, अगर पुलिस कोई कार्रवाई करेगी तो फिर सोचा जाएगा। वहीं अधिकारी भी इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं। लिहाजा यह माना जा रहा है कि मामले की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है।
विज्ञापन
नबावगंज में मतगणना के दौरान शहला ताहिर की जीत को लेकर बवाल हो गया था। इस मामले में एसडीएम नवाबगंज राजेश कुमार ने भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर, उनके भाई नीरेंद्र सिंह और 50 कार्यकर्ताओं के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट, सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट समेत कई गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसडीएम एक वीडियो क्लिप को सबूत के तौर पर पेश कर रहे हैं। हालांकि, इस वीडियो में भाजपा जिलाध्यक्ष मारपीट करते नजर नहीं आ रहे हैं। घटना के बाद से ही कार्रवाई को लेकर पीसीएस अधिकारी लामबंदी हैं। उनके पक्ष में राजस्व संग्रह अमीन समेत कुछ और कर्मचारी संगठन भी आ गए हैं। इधर, भाजपा नेता प्रशासन को ही कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष ने पार्टी संगठन को भी मामले से अवगत करा दिया है। अब आईजी ने एसएसपी से पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
बात करने से बच रहे अधिकारी, भाजपाई
मीडिया में लगातार मामला हाईलाइट होने और शासन तक पहुंचने के चलते अब अधिकारी और भाजपा पदाधिकारी इस प्रकरण पर ज्यादा बात करने से बच रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा है कि अब इस मामले में संगठन को ही निर्णय लेना है। वह पार्टी फोरम के समझ अपना पक्ष रख चुके हैं।
विज्ञापन
वर्जन
एसएसपी से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट मांगी गई है। साथ ही जिला प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
- एसके भगत, आईजी
तो ठंडे बस्ते में गई मामले की जांच
भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल से मुलाकात और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय से प्रकरण के संबंध में बात करने के बाद से पार्टी जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर इस मामले को लेकर निश्चिंत नजर आ रहे हैं। उनसे गुरुवार को जब पूछा गया कि क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई के खिलाफ वह कोर्ट से स्टे लेंगे तो उन्होंने इंकार कर दिया। बोले, अगर पुलिस कोई कार्रवाई करेगी तो फिर सोचा जाएगा। वहीं अधिकारी भी इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं। लिहाजा यह माना जा रहा है कि मामले की जांच ठंडे बस्ते में चली गई है।