शोध : अंडे और चिकन खाने के शौकीन हैं तो एंटीबायोटिक भी खा रहे आप, जानिए क्या हैं इसके नुकसान
बगैर परामर्श के एंटीबायोटिक के सेवन से मनुष्यों के किसी इंफेक्शन, संक्रमण की चपेट में आने पर दवा बेअसर होने की आशंका रहती है। एक शोध में चिकन के मांस और अंडे में एंटीबायोटिक दवाओं की पुष्टि हुई है। ऐसे में चिकन और अंडे खाने के शौकीनों के लिए खतरनाक हो सकती है।
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अंडे और चिकन के साथ आप एंटीबायोटिक भी खा रहे हैं। शोध में इसका खुलासा हुआ है। मुर्गे-मुर्गियों को रोगों से बचाने की जद्दोजहद में उनको एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं। शोध में मांस और अंडे में उनके अंश पाए गए हैं। इससे बैक्टीरिया, वायरस, कवक में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) विकसित होने की आशंका है।
यह जानकारी बरेली के इज्जतनगर स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के जैव रसायन विभाग की ओर से शुक्रवार को समाप्त हुई दो दिवसीय आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में सामने आई।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस की प्रो. मंजू राय ने संगोष्ठी पशुओं में लिपिड केमिकल्स पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। अव्यवस्थित परिवहन के दौरान कुक्कुट को होने वाली समस्याओं से निजात दिलाने के लिए जिंक नैनो हर्बल पार्टिकल की खोज के दौरान उनके मांस और अंडे में एंटीबायोटिक दवाओं की पुष्टि हुई।
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प्रो. मंजू के मुताबिक कुक्कुट की तबीयत बिगड़ने पर किसान उनको एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। मांस व अंडे में एंटीबायोटिक दवाएं मिलने से आशंका जताई जा रही है कि चूजे रहने के दौरान से ही उन्हें दाने-चारे के साथ काफी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाएं खिलाई जा रही हैं।
प्रो. मंजू के मुताबिक बीमार पड़ने पर लोग एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करते हैं लेकिन मुर्गे-मुर्गियों के मांस और अंडे में घुली एंटीबायोटिक दवाओं की जानकारी नहीं होती। इसकी पहचान का कोई सुलभ साधन भी नहीं है। इसे सिर्फ प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के जरिये ही पता लगाया जा सकता है। भविष्य में यह एएमआर की वजह बन सकता है। यह स्थिति घातक रहेगी।
30 वर्षों में नहीं खोज सके नई क्लास की एंटीबायोटिक
वैज्ञानिकों के मुताबिक पुरानी एंटीबायोटिक के प्रति जीवाणुओं ने प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। लिहाजा, अब वे बेअसर साबित हो रही हैं। बीते 30 वर्ष में कोई नई एंटीबायोटिक नहीं आई है। बगैर परामर्श के एंटीबायोटिक के सेवन से मनुष्यों के किसी इंफेक्शन, संक्रमण की चपेट में आने पर दवा बेअसर होने की आशंका रहती है।
जीवाणु जिनमें विकसित हो चुका है रेसिस्टेंस
स्टेफिलोकोक्कस, क्लेब्सिएला, एसिनोबेक्टर, सुडोमोनाश, ईकोलाई, स्ट्रैप्टॉकोक्स आदि ऐसे बैक्टीरिया हैं, जिनमें रेसिस्टेंस (प्रतिरोधक) विकसित हो चुका है। आमतौर पर सर्वाधिक आबादी इन्हीं जीवाणुओं की चपेट में रहती है।
जैव सुरक्षा अपनाकर मुर्गे-मुर्गियों को बीमार होने से बचाएं
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. जयदीप रोकड़े के मुताबिक दवा के प्रयोग के बजाय कुक्कुट को बीमारी से बचाना ज्यादा जरूरी है। फार्म में आवाजाही, खानपान, वाहन आदि का प्रवेश आदि सीमित कर संक्रमण की आशंका को कम कर सकते हैं।
इसके बाद भी अगर कुक्कुट बीमार हो जाते हैं तो बाजार में प्रीबायोटिक, पोस्ट बायोटिक, प्रोबायोटिक, एंजाइम्स आदि दिए जा सकते हैं। बताया कि जिंक नैनो हर्बल पार्टिकल भी कुक्कुट की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर है। पोल्ट्री किसानों से अपील है कि वे कुक्कुट को एंटीबायोटिक दवाएं कतई न दें।