{"_id":"68b6106020bca9256d046a9c","slug":"houses-will-be-measured-using-google-earth-those-who-commit-irregularities-will-be-reined-in-bareilly-news-c-4-vns1074-716682-2025-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: गूगल अर्थ से होगी मकानों की नापजोख, गड़बड़ी करने वालों पर लगेगी लगाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: गूगल अर्थ से होगी मकानों की नापजोख, गड़बड़ी करने वालों पर लगेगी लगाम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। नगर निगम अब गूगल अर्थ से मकानों की नापजोख करेगा। निगम का दावा है कि इससे गड़बड़ी करने वालों पर लगाम लगाई जा सकेगी। सेटेलाइट इमेज के माध्यम से क्षेत्रफल, ऊंचाई व प्लॉट निर्माण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक जीआईएस सर्वे के बाद शिकायतों का अंबार लग रहा है। सबसे अधिक शिकायतें गलत क्षेत्रफल, अधिक बिलों की आ रही हैं। अब गूगल अर्थ से प्राप्त सेटेलाइट इमेज के माध्यम से आवासीय और व्यवसायिक भवनों का क्षेत्रफल, ऊंचाई, प्लॉट पर निर्माण की स्थिति और उपयोग का प्रकार स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
अधिकारियों के मुताबिक, नगर निगम शहर की सभी संपत्तियों की डिजिटल फाइल तैयार कर रहा है। इसमें लोकेशन, प्लॉट नंबर, क्षेत्रफल, निर्माण की स्थिति, मकसद (आवासीय या व्यवसायिक) जैसी पूरी जानकारी रहेगी। वहीं बिलों के संशोधन से पहले जीआईएस डेटा और गूगल अर्थ की रिपोर्ट का मिलान करने के बाद ही बिलों का संशोधन होगा। संवाद
विज्ञापन
--
यह पहल टैक्स बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि वास्तविक करदाता से उचित कर वसूली के लिए है। तकनीक के जरिए जिन संपत्तियों को अब तक कर के दायरे से बाहर रखा गया था, वे भी अब चिह्नित की जाएंगी। - पीके द्विवेदी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
विज्ञापन
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक जीआईएस सर्वे के बाद शिकायतों का अंबार लग रहा है। सबसे अधिक शिकायतें गलत क्षेत्रफल, अधिक बिलों की आ रही हैं। अब गूगल अर्थ से प्राप्त सेटेलाइट इमेज के माध्यम से आवासीय और व्यवसायिक भवनों का क्षेत्रफल, ऊंचाई, प्लॉट पर निर्माण की स्थिति और उपयोग का प्रकार स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
विज्ञापन
अधिकारियों के मुताबिक, नगर निगम शहर की सभी संपत्तियों की डिजिटल फाइल तैयार कर रहा है। इसमें लोकेशन, प्लॉट नंबर, क्षेत्रफल, निर्माण की स्थिति, मकसद (आवासीय या व्यवसायिक) जैसी पूरी जानकारी रहेगी। वहीं बिलों के संशोधन से पहले जीआईएस डेटा और गूगल अर्थ की रिपोर्ट का मिलान करने के बाद ही बिलों का संशोधन होगा। संवाद
विज्ञापन
यह पहल टैक्स बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि वास्तविक करदाता से उचित कर वसूली के लिए है। तकनीक के जरिए जिन संपत्तियों को अब तक कर के दायरे से बाहर रखा गया था, वे भी अब चिह्नित की जाएंगी। - पीके द्विवेदी, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी