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Bareilly News: मतदान के दिन मनाई छुट्टी, नगर निगम वाले रहे फिसड्डी

Fri, 12 May 2023 02:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 12 May 2023 02:47 AM IST
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Holiday celebrated on the day of polling, municipal corporation remained lax
बरेली। नगर निकाय चुनाव में अधिक से अधिक मतदान का आह्वान बेअसर रहा। पढ़े-लिखे तमाम शहरी घरों से नहीं निकले। छुट्टी मनाने हिल स्टेशन और रिश्तेदारियों में चले गए। अपने भ्रमण की फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करते हुए पल-पल खबर लेते रहे। नतीजा यह रहा कि 2017 चुनाव के मुकाबले चार फीसदी कम मतदान हुआ। जिले के औसत मतदान से भी बरेली शहर पीछे रहा।
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जिले में 50.48 प्रतिशत तो बरेली शहर में 40.99 फीसदी मतदान हुआ। पिछले चुनाव में बरेली शहर में 45 फीसदी वोट पड़े थे। प्रत्याशियों ने घर-घर दस्तक देकर मतदान का प्रतिशत बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन मतदाताओं ने उत्साह नहीं दिखाया। पॉश कालोनियों के केंद्रों पर दोपहर की गर्मी ने मतदान को प्रभावित किया। दोपहर 12 से दो बजे के बीच कई केंद्रों में सन्नाटा रहा। मतदाता सूची की त्रुटियों और नाम होने की वजह से हजारों लोग मतदान से वंचित रहे।
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ये भी रहीं वजह
पुल नहीं तो वोट नहीं के नारे ने भी डाला असर
बरेली। वार्ड संख्या 21 सुभाषनगर में रेलवे लाइन पर पुल नहीं तो वोट नहीं के पोस्टर लगाकर कुछ मतदाताओं ने मतदान नहीं करने का निर्णय लिया था। वे दोपहर तक मतदान करने नहीं पहुंचे। वार्ड पार्षद पद के प्रत्याशियों ने उन्हें मनाने का प्रयास भी किया, लेकिन बात नहीं बनी। मतदान अभिकर्ताओं ने कहा कि सांसद, विधायक और महापौर प्रयास कर चुके हैंं। काम बड़ा है, आने वाले दिनों में पुल बनेगा। वोट डालिए, लेकिन लोग टस से मस न हुए। मतदान अभिकर्ता गौरव सिंह चौहान ने बताया कि रेलवे के सीनियर सेकेंडरी स्कूल स्थित बूथ संख्या 174 पर 1400 में से 521 मत पड़े। तमाम लोगों ने पुल के मुद्दे पर बहिष्कार किया है। ब्यूरो
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अभियान नहीं, सिर्फ अपील तक सीमित रहे अफसर
बरेली। निर्वाचन आयोग हो या फिर जिले का प्रशासन, मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया गया। अफसर केवल अपील करने तक सीमित रहे। अभियान चलाने के लिए कोई निर्देश ही नहीं आए। मतदान से दो दिन पहले आयुक्त, एडीजी, आईजी और जिलाधिकारी ने मतदान को सांविधानिक अधिकार बताकर लोगों को प्रेरित किया पर लोग नहीं निकले। नौकरीपेशा और तमाम पढ़े-लिखे लोगों ने मतदान के दिन को छुट्टी के रूप में निजी काम और आराम के लिए सीमित रखा। कोई ब्रांड एंबेसडर भी सामने नहीं आया। ब्यूरो

घर-घर गए प्रत्याशी पर मतदाताओं ने दिखाई बेरुखी
बरेली। विकास के वादे और इरादे लेकर प्रत्याशी चुनाव शुरू होने से एक महीने पहले से घर-घर जा रहे थे। पार्षद पद के प्रत्याशियों की पहुंच मतदाताओं के घर तक थी। उन्होंने मतदान के लिए वादा भी लिया था, लेकिन इसके बाद भी पिछली बार की तुलना में मतदान प्रतिशत में इजाफा न हो सका। कई लोग ऐसेे वादों से ऊब गए हैं जो चुनाव में किए जाते हैं और बाद में प्रत्याशी भूल जाते हैं। बाकरगंज के कुछ लोगों ने घर में होने के बाद भी मतदान नहीं किया। उनसे पूछा गया तो बोले- आबादी के बीच कूड़े के पहाड़ से बीमारी फैलने का अंदेशा है। हर चुनाव में मुद्दा उठता है पर समाधान नहीं होता, फिर वोट डालने से फायदा क्या। ब्यूरो


मतदान शांतिपूर्ण रहा। ईवीएम के संबंध में जहां शिकायत मिली, उसे समय रहते ठीक कर दिया गया। जागरूकता के लिए बहुत अपील के बाद भी लोग घरों से नहीं निकले। मतदान प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, उसका प्रयोग करना चाहिए। - शिवाकांत द्विवेदी, जिला निर्वाचन अधिाकरी
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