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होली पर जमकर बिकेगी ग्लूकोज वाली मिठाई, अगर खाई तो समझो सेहत से होगी लड़ाई
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बाजार में बिक रहा मावा असली होगा, इसकी त्योहार पर कोई गारंटी नहीं।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
बरेली। मिलावट और घटतौली करने में माहिर व्यापारियों ने अब नया खेल करना शुरू कर दिया है। ज्यादा मुनाफाखोरी के लिए उन्होंने इस बार लिक्विड ग्लूकोज से बनी मिठाइयां बाजार में उतार दी हैं। अगले महीने त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग ज्यादा होगी, लिहाजा अभी से मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। इसके साथ ही मिलावटी मावा भी खपने लगा है।
आमतौर यही माना जाता है कि मिठाइयां चीनी से ही बनती हैं, कुछ आइटम गुड़ से भी तैयार होते हैं, लेकिन मुनाफाखोरों ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है। अब ज्यादातर मिठाइयों में चीनी की जगह लिक्विड ग्लूकोज का इस्तेमाल हो रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक बताया जाता है। लिक्विड ग्लूकोज से मिठाइयां बनाने पर लागत कम आती है। सूत्रों ने बताया कि लिक्विड ग्लूकोज से बनी मिठाइयां सामान्य से ज्यादा चमकदार होती हैं। सोनपापड़ी में तो इससे लेयर भी अच्छी बनती है। मिल्क केक ज्यादा चमकदार दिखता है। ऐसे कई प्रमुख आइटमों में लिक्विड ग्लूकोज बड़े स्तर पर मिलाया जा रहा है। इससे बनी मिठाइयां बाजार में तेजी पैठ बना रही हैं। कुछ नामीगिरामी कारोबारी भी यह मिठाइयां बेच रहे हैं। इसका एहसास भी उपभोक्ताओं को नहीं है, जबकि लिक्विड ग्लूकोज से बनी मिठाइयां इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं यह भी नहीं मालूम कि वे धीमा जहर खा रहे हैं। इससे शरीर में कई साइड इफैक्ट हो जाते हैं और लोगोें पता तक नहीं चलता।
एफएसडीए विभाग खामोश
शहर और जिले भर में लिक्विड ग्लूकोज से बन रही मिठाइयाें की जानकारी एफएसडीए विभाग को भी है। इसके बावजूद एफएसडीए की भारी भरकम टीम अब तक एक भी मामला नहीं पकड़ पाई है। सूत्रों ने बताया कि बड़े स्तर पर सुनियोजित तरीके से हो रहे इस कारोबार से बड़ा हिस्सा एफएसडीए की टीम वसूलती है। सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों श्यामगंज क्षेत्र की एक प्रमुख मिठाई की दुकान से लिए गए बेसन, मोतीचूर लड्डू, मावा आदि के सैंपल जांच में फेल हो गए, इसके बावजूद एफएसडीए ने कोई प्रभावी अभियान शुरू नहीं किया।
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मिलावटी मावा भी बाजार में खपना शुरू
अगले माह त्योहारी सीजन होने से मावा की मांग होने लगी है। सबसे ज्यादा मांग कुमायूं क्षेत्र से आ रही है, इसलिए कुतुबखाना स्थित मावा आढ़तों पर देर शाम से आधी रात तक बोरों में भरकर मावा आता रहता है। सूत्रों ने बताया कि त्योहारी सीजन में मावा कारोबार तीन करोड़ से ज्यादा का होता है। हालांकि कुछ दुकानदार अपनी साख बचाने के लिए खुद भी मावा तैयार करते हैं।
एक आढ़ती करता है एफएसडीए अफसरों को हैंडल
मावा मंडी में एक प्रमुख आढ़ती एफएसडीए अफसरों को हैंडल करता है, इसलिए बेखौफ होकर मिलावटी मावा का कारोबार चलता है। एक बार प्रशासन ने मावा बाजार में प्रभावी कार्रवाई कराई थी, लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया।
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आमतौर यही माना जाता है कि मिठाइयां चीनी से ही बनती हैं, कुछ आइटम गुड़ से भी तैयार होते हैं, लेकिन मुनाफाखोरों ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है। अब ज्यादातर मिठाइयों में चीनी की जगह लिक्विड ग्लूकोज का इस्तेमाल हो रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक बताया जाता है। लिक्विड ग्लूकोज से मिठाइयां बनाने पर लागत कम आती है। सूत्रों ने बताया कि लिक्विड ग्लूकोज से बनी मिठाइयां सामान्य से ज्यादा चमकदार होती हैं। सोनपापड़ी में तो इससे लेयर भी अच्छी बनती है। मिल्क केक ज्यादा चमकदार दिखता है। ऐसे कई प्रमुख आइटमों में लिक्विड ग्लूकोज बड़े स्तर पर मिलाया जा रहा है। इससे बनी मिठाइयां बाजार में तेजी पैठ बना रही हैं। कुछ नामीगिरामी कारोबारी भी यह मिठाइयां बेच रहे हैं। इसका एहसास भी उपभोक्ताओं को नहीं है, जबकि लिक्विड ग्लूकोज से बनी मिठाइयां इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं यह भी नहीं मालूम कि वे धीमा जहर खा रहे हैं। इससे शरीर में कई साइड इफैक्ट हो जाते हैं और लोगोें पता तक नहीं चलता।
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एफएसडीए विभाग खामोश
शहर और जिले भर में लिक्विड ग्लूकोज से बन रही मिठाइयाें की जानकारी एफएसडीए विभाग को भी है। इसके बावजूद एफएसडीए की भारी भरकम टीम अब तक एक भी मामला नहीं पकड़ पाई है। सूत्रों ने बताया कि बड़े स्तर पर सुनियोजित तरीके से हो रहे इस कारोबार से बड़ा हिस्सा एफएसडीए की टीम वसूलती है। सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों श्यामगंज क्षेत्र की एक प्रमुख मिठाई की दुकान से लिए गए बेसन, मोतीचूर लड्डू, मावा आदि के सैंपल जांच में फेल हो गए, इसके बावजूद एफएसडीए ने कोई प्रभावी अभियान शुरू नहीं किया।
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मिलावटी मावा भी बाजार में खपना शुरू
अगले माह त्योहारी सीजन होने से मावा की मांग होने लगी है। सबसे ज्यादा मांग कुमायूं क्षेत्र से आ रही है, इसलिए कुतुबखाना स्थित मावा आढ़तों पर देर शाम से आधी रात तक बोरों में भरकर मावा आता रहता है। सूत्रों ने बताया कि त्योहारी सीजन में मावा कारोबार तीन करोड़ से ज्यादा का होता है। हालांकि कुछ दुकानदार अपनी साख बचाने के लिए खुद भी मावा तैयार करते हैं।
एक आढ़ती करता है एफएसडीए अफसरों को हैंडल
मावा मंडी में एक प्रमुख आढ़ती एफएसडीए अफसरों को हैंडल करता है, इसलिए बेखौफ होकर मिलावटी मावा का कारोबार चलता है। एक बार प्रशासन ने मावा बाजार में प्रभावी कार्रवाई कराई थी, लेकिन बाद में सब कुछ सामान्य हो गया।