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बड़ी राहत: बरेली में 27 मकानों पर अभी नहीं चलेगा बुलडोजर, हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक

Sat, 06 Dec 2025 07:09 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 06 Dec 2025 07:09 PM IST
सार

बरेली के 27 परिवार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने 27 घरों के ध्वस्तीकरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। नगर निगम ने इन घरों को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी किए थे। 

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High Court stayed the demolition of 27 houses in Bareilly
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बरेली में शाहबाद इलाके के 27 प्रभावित परिवारों को फिलहाल राहत मिली है। कोर्ट ने नगर निगम के ध्वस्तीकरण के आदेश को दो माह के लिए रोक दिया है। नगर आयुक्त ने भी इसकी पुष्टि की है। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान भी शामिल थे। 

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26 सितंबर को बवाल के बाद नगर निगम, बीडीए समेत तमाम विभागों ने एक के बाद एक कार्रवाई शुरू की थी। इसमें वार्ड भूड के शाहबाद कोहाड़ापीर इलाके में निगम की जमीन पर बने अवैध मकानों पर अक्तूबर में ध्वस्तीकरण के नोटिस चस्पा किया गया था। नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर 27 मकानों पर नोटिस चस्पा किए थे, जिनको 15 दिनों में कब्जे को हटाने की चेतावनी भी दी। 
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इसमें कई मकान ऐसे हैं, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हैं। इसके बाद मकान मालिक हाईकोर्ट पहुंचे। अब हाईकोर्ट ने उन्हें दो माह का समय दिया है। इसमें आवेदक अपना प्रत्यावेदन जमा कर सकते हैं। इससे पहले नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं करेगा। यह पूरा मामला भाजपा की पार्षद शालिनी जौहरी ने उठाया था, जो 10 वर्षों से इसकी शिकायत कर रही थीं।

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पांच दिन बाद होगी 74 दुकानों पर सुनवाई
26 सितंबर को हुए बवाल के बाद नगर निगम की टीम ने आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर के करीबी डॉ. नफीस की नावल्टी चौराहे पर पहलवान साहब की मजार के पास बनी 74 दुकानों और एक ऑफिस को सील किया था। इस मामले में नगर निगम का दावा था कि दुकानें नाले पर अतिक्रमण कर बनाई गई है। यह मामला कोर्ट और वक्फ ट्रिब्यूनल में पहुंचा है, जहां दुकानदारों ने अपनी दुकानों को वैध बताया है। इस मामले में 10 दिसंबर को सुनवाई होगी। वहीं नगर निगम के अधिकारियों का दावा है कि मामले में कड़ाई से निगम ने अपना पक्ष रखा है।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि नोटिस पहुंचने के बाद हाईकोर्ट ने दो माह का समय दिया है, इसमें मकान मालिक प्रत्यावेदन आदि जमा कर सकते हैं। कोर्ट के आदेश तक नगर निगम कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। 

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