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जिंदगी जिंदादिली का नाम है...

Sat, 21 Mar 2015 01:47 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sat, 21 Mar 2015 01:47 AM IST
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अभी तक लोगों के मन में धारणा है कि एचआईवी पॉजिटिव मरीज कुछ भी करने से लाचार हो जाता है लेकिन बरेली के एचआईवी पॉजिटिव युवा इसे झुठला रहे हैं। स्थानीय एआरटी सेंटर के मुताबिक उनके यहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1105 हैं। इनमें से 800 मरीज युवा हैं और इनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच है। इनमें 56 युवा ग्रेजुएट और 108 इंटरमीडिएट पास हैं। 70 फीसदी युवा अनसेफ सेक्स की वजह से इस बीमारी की चपेट में आए हैं। सेंटर पर 468 युवा ऐसे हैं, जो बीमारी को बढ़ने से रोकने के लिए दवाएं ले रहे हैं जबकि बाकी 332 युवा अब बिल्कुल फिट हैं। ये न तो दवाएं ले रहे हैं और न ही इन्हें किसी प्रकार की तकलीफ है।
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स्ट्रांग इम्युनिटी पावर से पाया पार
एआरटी सेंटर के मेडिकल अफसर डॉ. संजीव मिश्रा बताते हैं कि इन युवाओं की इम्युनिटी पावर स्ट्रांग है। पिछले चार से आठ साल से ये युवा पॉजिटिव होने के बावजूद बिल्कुल फिट हैं। गाइड लाइन के मुताबिक 350 सीडी4 (क्लस्टर ऑफ डिफरेंसिएशन) सेल्स के नीचे इम्युनिटी पावर होने पर मरीजाें को दवाएं दी जाती हैं। नई गाइड लाइन ने यह सीडी4,   500 कर दी है। बावजूद इसके शहर के इन पॉजिटिव मरीजाें में सीडी4, 500 से अधिक है। कुछ में तो 2800 सीडी4 है। ऐसे में इनको दवाएं देने की जरूरत नहीं। सीडी4 जांचने के लिए हर तीन माह पर जांच होती है।
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काउंसलिंग से मिली मदद
शहर में एक नामी कंपनी में नौकरी करने वाले 26 वर्षीय एचआईवी पॉजिटिव युवक का कहना ंहै कि ग्रेजुएशन के बाद उसे पता चला कि वह एचआईवी पॉजिटिव है। शुरुआत में बहुत पछतावा हुआ और जिंदगी खत्म करने की सोचने लगा था। सेंटर पर पहुंचने के बाद काउंसलिंग की मदद से निराशा खत्म हो गई।
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तीन हिदायतें
इम्युनिटी पावर स्ट्रांग रखने के लिए अच्छा खाना, नशे की हर वस्तु से दूर रहना, गुस्सा न करने और डिप्रेशन में न रहना ै।
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घरवालों को जानकारी नहीं
अधिकतर युवाआें के माता-पिता को उनके एचआईवी पॉजिटिव होने के बारे में जानकारी नहीं है। एआरटी सेंटर में पंजीकरण के लिए ऐसे युवाओं ने अपने किसी खास सहयोगी की मदद ली है।

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ज्यादातर मामलों में पति-पत्नी दोनों पॉजिटिव

एटीआर सेंटर के डेटा मैनेजर मनोज वर्मा के मुताबिक 99 फीसदी मामले में पति-पत्नी दोनों पॉजिटिव हैं। इनमें से कई की संतानें निगेटिव हुई हैं। कई ऐसे जोड़े भी जो पॉजिटिव हैं, लेकिन उनके मां-बाप को उनके इस रोग के बारे में नहीं पता।

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