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तेज हवा के साथ हुई बारिश, सरसों को नुकसान

Tue, 13 Feb 2018 01:26 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Tue, 13 Feb 2018 01:26 AM IST
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heavy rain is harmful for mustard
- फोटो : अमर उजाला
विदा लेने के लिए तैयार सर्दी बारिश के साथ हवा और ओले भी लेकर आई। सोमवार दोपहर एक बजे के बाद 15 मिनट तक हुई तेज बारिश के दौरान हवा भी चली और कहीं-कहीं मटर के दाने के बराबर ओले भी गिरे। इस बारिश से गेहूं, दलहन, मटर, गन्ना और सब्जी की फसलों को फायदा है। मगर, पकी सरसों को नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि से पकी सरसों की फली से दाने गिरने की आशंका है। बारिश के बाद न्यूनतम तापमान बढ़ने से सर्दी का प्रकोप भी कुछ कम होने के आसार हैं। 
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सोमवार सुबह से ही आसमान में बादल छाये थे। करीब 10:30 बजे सूर्य देवता थोड़ी देर को चमके, मगर फिर बादलों ने उन्हें ढक लिया। दोपहर तक रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। एक बजे के बाद आसमान में काली घटा एक बार फिर घिरी और फिर लगभग 15 मिनट तक तेज हवा के साथ मूसलाधार बारिश हुई। कहीं-कहीं मटर के दाने के बराबर ओले भी गिरे। मौसम विभाग ने 20 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की है। 
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बारिश के बाद न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 12.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। हालांकि अधिकतम तापमान पांच डिग्री नीचे लुढ़ककर 16.9 डिग्री सेल्सियस रह गया। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से यह बारिश हुई है। कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हुई है, लेकिन इससे बहुत ज्यादा नुकसान नहीं है। 13 फरवरी को आसमान में बादल छाये रहेंगे। दिन में हल्की धूप भी निकलेगी। अब कम से कम तीन दिन बारिश नहीं होगी। अधिकतम तापमान 18 से 22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा।
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गेहूं समेत अधिकांश फसलों को फायदा
संयुक्त कृषि निदेशक बरेली मंडल डॉ. सतवीर सिंह का कहना है कि बीस मिलीमीटर बारिश से केवल सरसों को नुकसान हो सकता है, लेकिन गेहूं, गन्ना, दलहन को फायदा है। सामान्य गेहूं को पानी मिलने से दाना मजबूत होगा क्योंकि गेहूं को इस समय पानी की सख्त जरूरत थी। हवा चलने और ओलावृष्टि से गेहूं की उस फसल में नुकसान की आशंका है, जिसमें किसान हाल ही में पानी लगा चुके हैं। हवा ज्यादा तेज नहीं चली है, इसलिए नुकसान की आशंका कम ही है। ओले बहुत छोटे आकार के थोड़ी ही देर गिरे, लिहाजा इससे फसलों को कोई खास नुकसान नहीं होगा। किसान खेत में पानी न भरने दें। 
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