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अमर उजाला स्वास्थ्य अभियान : कोरोना के दौरान बीमार स्वास्थ्य सेवाओं की अब सुधर रही सेहत
Fri, 01 Apr 2022 01:48 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 01:48 AM IST
सार
कोरोना महामारी के दस्तक देने से पहले बायो सेफ्टी लेवल-2 (बीएसएल-2) लैब शुरू होने की सुगबुगाहट तक नहीं थी। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद तीन साल से तीन सौ बेड अस्पताल के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति थी।
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प्रतीकात्मक
विस्तार
हजारों जिंदगियां तबाह करने वाले कोरोना वायरस से जंग में बीमार स्वास्थ्य सुविधाओं की सेहत में अब तेजी से सुधार हो रहा है। जिन सेवाओं का संचालन होने में लंबा वक्त लगने की आशंका थी, वे भी दो साल में काफी हद तक पूरी हो गईं हैं। इस दौरान आम लोग भी स्वास्थ्य और चिकित्सकीय पहलुओं से रूबरू हुए। सेहत के प्रति भी उनमें जागरूकता बढ़ी।
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कोरोना महामारी के दस्तक देने से पहले बायो सेफ्टी लेवल-2 (बीएसएल-2) लैब शुरू होने की सुगबुगाहट तक नहीं थी। निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद तीन साल से तीन सौ बेड अस्पताल के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति थी। शहर समेत देहात स्थित कई स्वास्थ्य केंद्र जर्जर हालत में थे। कोरोना महामारी शुरू हुई तो स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की जरूरत ने इनका जीर्णोद्धार करा दिया। सीएचसी पर बच्चों के लिए पीकू वार्ड नहीं थे। जिला अस्पताल और अन्य कई अस्पतालों में ऑक्सीजन बेड, वाईपैप, एचएफएनसी समेत कई आधुनिक उपकरणों और दवाओं का अभाव था, लेकिन अब ये सारी शिकायतें भी दूर हो गई हैं। 54 नए हेल्थ सेंटर जिले में बन रहे हैं। जिला अस्पताल में अब ट्रामा सेंटर भी स्थापित हो रहा है।
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महामारी में जब जनप्रतिनिधि, अफसर, डॉक्टर, आम लोग यानी हर वर्ग के लोग संक्रमण की चपेट में आए तो बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मुहिम चली। सबसे पहले कोरोना सैंपल की जांच के लिए जिला अस्पताल में बीएसएल-2 लैब का निर्माण हुआ। ट्रूनेट मशीन से भी जांच शुरू की गई। आकस्मिक परिस्थिति में तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन शुरू हुआ। एल-1 अस्पताल का दर्जा देकर मरीज भर्ती होने लगे। स्टाफ की तैनाती हुई।
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33 वेंटिलेटर बेड का बनाया आईसीयू
स्वास्थ्य विभाग में कोई आईसीयू नहीं था। लिहाजा, एल-2 मरीजों को भर्ती करने के बजाय मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा था। प्रकरण का संज्ञान लेकर शासन ने पहली लहर में ही तीन सौ बेड अस्पताल में 18 वेंटिलेटर बेड का आईसीयू वार्ड बनाया। दूसरी लहर से पहले यहां 15 और वेंटिलेटर लगाए गए। अस्पताल में ढाई सौ से ज्यादा जनरल बेड हैं। सभी पर ऑक्सीजन सप्लाई की सुविधा है। लैब स्थापित की है।
ताकि ऑक्सीजन की कमी सांसों पर न पड़े भारी
कोविड चिकित्सालय में एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम, ऑक्सीजन कन्संट्रेटर मौजूद है। जिला महिला अस्पताल, आंवला, दुनका, मीरगंज, बहेड़ी सीएचसी में 330 लीटर क्षमता के ऑक्सीजन प्लांट स्थापित है। मिलिट्री अस्पताल में छह हजार लीटर और आंवला इफको यूनिट में चार टन क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हुआ। जिला अस्पताल में प्लांट प्रस्तावित है।
चार सीएचसी पर बन गए पीकू वार्ड
तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने की जताई जा रही आशंका के चलते तीन सौ बेड अस्पताल समेत चार सीएचसी पर भी पीडियाट्रिक इन्टेंसिव केयर यूनिट (पीकू) वार्ड बनाए गए। कोविड चिकित्सालय में 80 वार्ड, सीएचसी शीशगढ़ में 30, आंवला में 30, मीरगंज में 30 और बहेड़ी सीएचसी में 50 बेड क ा वार्ड बनकर तैयार हो चुका है। तीसरी लहर में बच्चे संक्रमित तो हुए पर गनीमत रही कि हालत नहीं बिगड़ी।
टीकाकरण को लेकर दूर हुई भ्रांतियां
मिशन इंद्रधनुश के तहत बच्चों को वैक्सीन लगाए जाने पर अक्सर स्वास्थ्यकर्मियों से नोकझोंक की शिकायतें मिलती हैं। तीसरी लहर से पहले कोविड टीकाकरण की दोनों डोज लगवा चुके लाखों लोगों को जब संक्रमण छूकर निकल गया, तो लोगों का वैक्सीन पर भरोसा बढ़ा। लिहाजा, नियमित वैक्सीनेशन को लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर कतारें लग रही हैं। भीड़ अधिक होने पर वैक्सीन देर से लगने की शिकायत हो रही है।
कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से सुधार हो रहा है। बायो सेफ्टी के प्रति स्वास्थ्यकर्मी और आम लोग भी सजग हुए हैं। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए शासन के दिशानिर्देश का पालन किया जा रहा है। किसी को कोई दिक्कत है तो वह लिखित शिकायत करें। - डॉ. बलवीर सिंह, सीएमओ