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खूनी मांझा बवालेजान- अब चौपुला पुल पर कटी पंप कर्मचारी की गर्दन
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बरेली। चाइनीज मांझे से हो रहे हादसों के बाद औपचारिकता भरे अभियानों से कोई नतीजा नहीं निकल रहा है। मांझा अब भी बवालेजान बना हुआ है। अब मांझे ने गणेश नगर निवासी पेट्रोल पंप कर्मचारी की गर्दन पर गहरा जख्म दिया है। निजी अस्पताल में उपचार के बाद उन्हें घर भेजा गया है।
सुभाषनगर थाने की गणेश नगर कॉलोनी की गली नंबर पांच निवासी नरेंद्रपाल सिंह शहर के कृष्णा फिलिंग स्टेशन पर काम करते हैं। गुरुवार रात वह ड्यूटी से लौट रहे थे। चौपुला पुल पर होकर बाइक से गुजरे तभी मांझा उनके गले में लिपट गया। इससे उनकी गर्दन में गहरा घाव हो गया और खून निकलने लगा। नरेंद्र गिर पड़े तो स्थानीय लोगों ने मदद कर उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर परिवार के लोग पहुंच गए। उपचार के बाद उन्हें घर ले जाया गया। बता दें कि मांझे से लगातार लोग लहूलुहान हो रहे हैं, बावजूद इस पर रोक नहीं लगाई जा रही।
इसी महीने कई हुए शिकार
अगस्त में ही चाइनीज मांझे ने कई लोगों को शिकार बनाया है। रक्षाबंधन के दिन शहर में हुई पतंगबाजी में चाइनीज मांझे का इस्तेमाल हुआ। उस दिन तीन लोगों को मांझे ने शिकार बनाया। इनमें भारत सेवा ट्रस्ट के सामने से गुजर रहीं वृद्धा भी शामिल थीं। जो अपनी बहन के घर से लौट रही थीं। अगले दिन फिर दो लोग खूनी मांझे के शिकार हुए। इनमें बरेली कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मिशन अस्पताल के अंदर नाक कटने से लहूलुहान हो गए। वह अपनी पत्नी के पास आए थे जिनका यहां उपचार चल रहा था।
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सुभाषनगर थाने की गणेश नगर कॉलोनी की गली नंबर पांच निवासी नरेंद्रपाल सिंह शहर के कृष्णा फिलिंग स्टेशन पर काम करते हैं। गुरुवार रात वह ड्यूटी से लौट रहे थे। चौपुला पुल पर होकर बाइक से गुजरे तभी मांझा उनके गले में लिपट गया। इससे उनकी गर्दन में गहरा घाव हो गया और खून निकलने लगा। नरेंद्र गिर पड़े तो स्थानीय लोगों ने मदद कर उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर परिवार के लोग पहुंच गए। उपचार के बाद उन्हें घर ले जाया गया। बता दें कि मांझे से लगातार लोग लहूलुहान हो रहे हैं, बावजूद इस पर रोक नहीं लगाई जा रही।
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इसी महीने कई हुए शिकार
अगस्त में ही चाइनीज मांझे ने कई लोगों को शिकार बनाया है। रक्षाबंधन के दिन शहर में हुई पतंगबाजी में चाइनीज मांझे का इस्तेमाल हुआ। उस दिन तीन लोगों को मांझे ने शिकार बनाया। इनमें भारत सेवा ट्रस्ट के सामने से गुजर रहीं वृद्धा भी शामिल थीं। जो अपनी बहन के घर से लौट रही थीं। अगले दिन फिर दो लोग खूनी मांझे के शिकार हुए। इनमें बरेली कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मिशन अस्पताल के अंदर नाक कटने से लहूलुहान हो गए। वह अपनी पत्नी के पास आए थे जिनका यहां उपचार चल रहा था।
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