राजधानी दिल्ली-एनसीआर इन दिनों एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के व्यापक चपेट में है। बड़ी संख्या में लोग तेज बुखार, खांसी-जुकाम और सांस से संबंधित लक्षणों के साथ अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोगों में जांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि भी हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार पहले से ही इस संक्रामक रोग के मामले 6 गुना से अधिक हैं। ऐसे में लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए और भी चिंता बढ़ाती जा रही है। इस साल दिल्ली में इन्फ्लुएंजा-ए के 2,300 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। 20 अगस्त तक ये मामले 1,777 के करीब थे।
एच1एन: दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू का प्रकोप, क्या इससे बचने के लिए कोई वैक्सीन है? जानिए डॉक्टर की सलाह
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपायों में बीमार लोगों को घर पर ही आराम करें, खांसते-छींकते समय सावधानी बरतने, हाथों की सफाई का ध्यान रखने, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने के साथ हर साल इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने की सलाह दी जा रही है। ये वैक्सीन इंफ्लूएंजा वायरस के संक्रमण से होने वाली दिक्कतों को कम करने में मददगार हो सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी (आईसीएमआर) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले के पीछे कोई नया स्ट्रेन जिम्मेदार नहीं है। यह वायरस 2025 से ही देश में सर्कुलेशन में है। इसलिए सिर्फ मामलों की संख्या बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि वायरस अचानक ज्यादा खतरनाक हो गया है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप स्वाइन फ्लू से संक्रमित भी हो गए हैं तो घबराएं नहीं, ज्यादातर मामलों में घर पर रहकर ही ये बीमारी ठीक हो सकती है।
- गंभीर फ्लू संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में निमोनिया जैसी जटिलता हो सकती है।
- ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
डॉक्टर कहते हैं, एच1एन1 भी इंफ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, ऐसे में इंफ्लूएंजा से बचाने वाली फ्लू वैक्सीन आपके लिए मददगार हो सकती है। ज्यादा जोखिम वाले लोगों जैसे छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से कोमोरबिडिटी के शिकार लोगों को डॉक्टर की सलाह पर ये टीका लगवा लेना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पहले से ही 6 महीने और उससे ज्यादा उम्र के सभी लोगों के लिए हर साल फ्लू का टीका लगवाने की सलाह देता रहा है। ये फ्लू के तमाम वैरिएंट से आपको सुरक्षित रखने में मददगार हो सकती है।
फ्लू वैक्सीन H1N1 से किस तरह मदद करती है?
फ्लू वैक्सीन शरीर को इन्फ्लुएंजा वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तैयार करने में मदद करती है। ये संक्रमण के जोखिम और खासकर गंभीर बीमारी, जटिलताओं तथा अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करने में मदद करती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार इन्फ्लुएंजा से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय फ्लू का टीकाकरण है।
- फ्लू के वायरस लगातार बदलते रहते हैं। इसलिए वैक्सीन की संरचना भी समय-समय पर बदली जाती है ताकि उससे उस समय फैल रहे वायरस के खिलाफ इम्युनिटी तैयार की जा सके।
- आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस समय फैल रहे स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए उपलब्ध वैक्सीन कारगर है।
डॉक्टर कहते हैं, ऐसा नहीं है कि वैक्सीन लगवाने के बाद आपको संकमण नहीं होगा, वैक्सीन लगवाने के बाद भी फ्लू हो सकता है। टीकाकरण बीमारी की गंभीरता को कम करने और संक्रमण के कारण मौत के जोखिमों को घटाने में मदद कर सकती है।
किन लोगों को फ्लू वैक्सीन लगवानी चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देता है। पहले से हृदय रोग-फेफड़े, किडनी-लिवर और मेटाबॉलिज्म संबंधी बीमारी वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा ज्यादा हो सकता है, ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह पर सालाना टीके लगवाने की सलाह दी जाती है।
- इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में भी संक्रमण गंभीर हो सकता है, उनके लिए भी टीके जरूरी हैं।
- संक्रमित मरीजों के लगातार संपर्क में रहने के कारण स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्राथमिकता वाले समूह में रखा गया है, ऐसे लोगों को भी वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
डॉक्टर कहते हैं, बुखार-खांसी और बदन दर्द कई वायरल संक्रमणों में हो सकते हैं। इसलिए इन दिनों अगर आपको ऐसी दिकक्त हो रही है तो इसे हर बार एच1एन ही मान लेना सही नहीं है। केवल लक्षण देखकर ही मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की जा सकती है। घबराने के बजाय लक्षणों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें
स्वाइन फ्लू और इंफ्लूएंजा के किसी भी स्ट्रेन के कारण होने वाली बीमारी से बचाव के लिए अपने डॉक्टर की सलाह पर फ्लू का वैक्सीनेशन कराया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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