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गरीबी से हारा जिमनास्टिक का राष्ट्रीय खिलाड़ी

Sun, 24 Jul 2016 01:13 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Sun, 24 Jul 2016 01:13 AM IST
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gymnastics national player defeet of poverty
ज‌िमना‌स‌िटक ख‌िलाड़ी सु‌म‌ित
बचपन में बड़े भाई ने जिमनास्टिक में इस सपने के साथ ज्वाइन कराया था कि आगे इसी खेल में छोटा भाई नाम रोशन करेगा। लेकिन हालात उल्टे हो गए। आल इंडिया चैंपियनशिप खेल चुके सुमित कुमार को कोच और सहयोग न मिलने से उसने पढ़ाई छोड़ दी और खेल भी। सरकारी नौकरी नहीं मिली तो बीपीएड पढ़ने की ख्वाहिश जताई। लेकिन फीस सुनकर ही सुमित हिम्मत हार गया है। कालीबाड़ी के रहने वाले सुमित कुमार के पिता नारायण दास स्पेयर पार्ट की दुकान चलाते थे। दो साल पहले उनकी दुकान को ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्ट किया गया तो तंगी के चलते उन्होंने दुकान पर ताला डालना बेहतर समझा। अब पिता फल का ठेला लगाते हैं। सुमित ने कक्षा छह में जिमनास्टिक डोरी लाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में सीखना शुरू किया था। यहां उस समय जिमनास्टिक के कोच तैनात थे। 12वीं तक जिमनास्टिक खेली और प्रदेश स्तरीय प्र्रतियोगिता में टॉप 8 में रहे। इन्हें कांस्य पदक मिला। बरेली कालेज से बीए किया और आल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में भी शामिल होने का मौका मिला। सुमित ने अब तक सात प्रदेश स्तरीय और आल इंडिया चैंपियनशिप खेला है। 
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9 साल से छोड़ दी जिमनास्टिक 
सुमित ने वर्ष 2006 में कोच न मिलने की वजह से सुमित ने जिमनास्टिक छोड़ी थी। पिता के ऊपर दो भाई और दो बहन की भी जिम्मेदारी है। सुमित ने अपने प्रमाण पत्र तक फाड़ डाले हैं। परीक्षा में पास होने के बावजूद सरकारी नौकरी न मिलने पर उसने बीपीएड करने की सोची लेकिन 80 हजार रुपये दो साल की फीस सुनकर कदम पीछे खींच लिये।
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खेल में काफी गरीब बच्चे आते हैं, लेकिन हालात से डरना नहीं चाहिए। अगर एक कालेज में अधिक फीस से एडमिशन नहीं मिल रहा तो देश के अन्य कालेज में ट्राय करें। कई जगह कम फीस है। 
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डा. सीरिया एसएम, सचिव, बरेली जिमनास्टिक एसोसिएशन
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