फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Guns are not being sold, neither cartridges, gun houses are spewing gunpowder incurring losses

Bareilly News: बंदूकें बिक रहीं न कारतूस, गन हाउस उगल रहे घाटे का बारूद

Thu, 05 Jun 2025 02:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 02:47 AM IST
विज्ञापन
Guns are not being sold, neither cartridges, gun houses are spewing gunpowder incurring losses
बरेली। असलहे की दुकानें अरसे से वीरान हैं। नए शस्त्र लाइसेंस नहीं बनने की वजह से असलहों की बिक्री नहीं हो रही है। तमाम प्रतिबंधों की वजह से पुराने लाइसेंस धारक भी कारतूस नहीं खरीद रहे हैं। जो लोग दुकानों पर असलहे जमा कर गए, वे दोबारा उसे लेने ही नहीं आए। ऐसे में गन हाउस घाटे का सौदा साबित हो रहे हैं। स्थिति यह है कि कई-कई दिनों तक इनकी बोहनी नहीं होती। इस वजह से जिले की 30 में से नौ दुकानें बंद हो गईं। अन्य 21 पर भी संकट मंडरा रहा है।
विज्ञापन

कलक्ट्रेट में वरासत व नए शस्त्र के लिए आवेदनों के ढेर लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वरासत के 1,300 और नए शस्त्र के लिए 5,300 आवेदन लंबित हैं। रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित जनता गन हाउस के वीरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि शस्त्र-कारतूस का कारोबार शून्य हो चुका है। परिवार चलाने के लिए वह नगर निगम में ठेकेदारी कर लेते हैं। दुकान में जो शस्त्र जमा हैं, उन्हें संभालने में ही दिन बीत जाता है। कई-कई दिनों तक बोहनी नहीं होती।
विज्ञापन

बेटों की कमाई से चल रही गृहस्थी
शस्त्र विक्रेता संघ के जिलाध्यक्ष गुरुजीत सिंह ने बताया कि 55-60 साल से शस्त्र-कारतूस बेच रहे हैं। अब एक-एक सप्ताह तक बोहनी नहीं होती। मृतक आश्रितों को वरासत के लाइसेंस तक नहीं दिए जा रहे हैं। हर विक्रेता के पास 250 से 300 शस्त्र दुकानों में रखे हैं। कोई लेने भी नहीं आ रहा है। दो सौ रुपये प्रतिमाह इनका किराया है। हम चाहते हैं लोग कम किराया दे दें और अपने शस्त्र ले जाएं। मालखानों में शस्त्र जमा नहीं हो रहे हैं। कारतूस बिक्री पर अधिकतम 10 रुपये का लाभ होता है। ऐसे में दुकान किराया तक निकालना मुश्किल हो गया है। बेटों की कमाई से गृहस्थी चल रही है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

ये दुकानें हुईं बंद
राकेश गन हाउस बहेड़ी, दुनका गन हाउस स्टेशन रोड, भारत गन हाउस कोतवाली, अकब कठेरिया आर्म्स घंटाघर, इंडिया गन हाउस नवाबगंज, चौपुला के पास राजेश अग्रवाल की दुकान, प्रेमनगर चौराहे पर छोटेलाल गंगवार की दुकान, कानपुर आर्म्स काॅरपोरेशन पंजाबी मार्केट, नियोगी एंड कंपनी स्टेशन रोड।

कारीगर भी दिनभर बैठे रहते हैं खाली
पूरे दिन खाली बैठे रहते हैं। 100 रुपये की कमाई पर 25 रुपये दुकान मालिक को देते हैं। अब कोई इस कारीगरी को सीखना नहीं चाहता। परिवार चलाने के लिए दुकान मालिक से एडवांस लेते रहते हैं। काम आता है तो उधारी उसी में कट जाती है। - नबी अहमद, शस्त्र कारीगर
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed