बरेली। रेलवे के ट्रैक पहरेदारों (मेंटेनरों) की रन ओवर के कारण जान नहीं जाएगी। उनको जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) आधारित रक्षक डिवाइस उपलब्ध कराई जाएगी। यह डिवाइस ट्रेन के नजदीक आने से दो किलो मीटर पहले बीप और लाल रोशनी के साथ मेंटेनर को अलर्ट कर देगी। मेसेज मिलने के साथ ही मेंटेनर ट्रैक से दूर हट जाएंगे। पिछले दिनों बरेली-टनकपुर रेल खंड में खटीमा के पास ट्रेन की चपेट में आने से दो मेंटेनरों की मौत के बाद रेलवे ने रक्षक डिवाइस के लिए कवायद शुरू कर दी है।
बरेली में उत्तर रेलवे और पूर्वोत्तर रेलवे की लाइनें गुजरती हैं। सर्दियों के सीजन में रेलवे लाइनों पर पेट्रोलिंग बढ़ा दी जाती है। ट्रैक मेंटेनर चौबीस घंटे पटरियों की निगरानी करते हैं। छोटी-मोटी कमी होने पर इसे दुरुस्त करते हैं, अगर कोई बड़ी समस्या हो तो कंट्रोल रूम को सूचना देकर ट्रेन को रुकवा देते हैं। अब तक मेंटेनरों के पास सुरक्षा डिवाइस नहीं है। ऐसे में कई बार वह हादसों का शिकार होकर जान गंवा बैठते हैं। कोहरे के सीजन में ऐसे हादसे ज्यादा होते हैं। एनई रेलवे मजदूर यूनियन काफी समय से ट्रैक मेंटेनरों को सुरक्षा डिवाइस उपलब्ध कराने की मांग कर रहा है। रेलवे फेडरेशन के जरिये भी यह मांग रेलवे बोर्ड और मंत्रालय के सामने रखी जा चुकी है। पीआरओ राजेंद्र सिंह ने बताया कि सुरक्षा और संरक्षा के साथ-साथ ट्रैक मेंटेनरों की सुरक्षा की महत्वपूर्ण है। उनके लिए जल्द ही अत्याधुनिक जीपीएस आधारित रक्षक डिवाइस उपलब्ध कराई जाएगी। संवाद