Bareilly News: उद्यमशीलता को बढ़ावा दे रही नई शिक्षा नीति; राज्यपाल ने महिला उद्यमियों को सराहा
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इससे पहले उन्होंने मुड़िया अहमद नगर स्थित दिशा इंटर कॉलेज का भ्रमण किया।
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नई शिक्षा नीति उद्यमशीलता एवं मातृभाषा को बढ़ावा दे रही है। इससे विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हो रही है। सोमवार को बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ये बातें कहीं। इसके साथ ही उन्होंने पाठ्यक्रम में बदलाव कर कुछ अन्य विषयों को शामिल किए जाने के सुझाव भी दिए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में छह परियोजनाओं का डिजिटल लोकार्पण भी किया। कुलपति प्रो. केपी सिंह के प्रयासों की सराहना भी की।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अटल सभागार में उन्होंने राष्ट्रीय उद्यमशील महिला सम्मेलन का उद्घाटन किया। महिला उद्यमियों ने अपने संघर्ष से सफलता हासिल करने तक के सफर को मंच से साझा किया। इसके बाद राज्यपाल ने क्रमवार रोहिलखंड इंक्यूबेशन फाउंडेशन, डिजिटल पांचाल म्यूजियम, स्टूडेंट ई-कॉर्नर, विश्वविद्यालय छात्र सहायता केंद्र, डायरेक्टोरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस, माइक्रो इरिगेशन सिस्टम पर आधारित उपवनका उद्घाटन और तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया। सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण और विधिक सहायता केंद्र का शुभारंभ भी किया।
विशिष्ट अतिथि तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद के कुलपति प्रो. रघुवीर सिंह ने विद्यार्थियों को स्वावलंबी बनने, शिक्षा के साथ नए स्टार्टअप, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, बौद्धिक संपदा, साइबर विषयों के बारे में बताया। विशिष्ट अतिथि नेपाल के महेंद्रगढ़ स्थित सुदूर पश्चिम विश्वविद्यालय के कुलसचिव यज्ञराज पाठक ने भी विचार साझा किए।
मिलती थीं धमकियां पर नहीं मानी हार
कविशा मोटर्स की अध्यक्ष शारदा भार्गव ने बताया कि वर्ष 1960 में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। वर्ष 1980 में महिला उद्यमी बनने का सफर शुरू हुआ। बच्चों की परवरिश के साथ कारोबार संभालने की चुनौतियों के बारे में बताया। कहा कि तब धमकियां भी मिलती थीं पर बगैर डरे उन्होंने खुद को उद्यमी के रूप में स्थापित किया। शुरुआत में 12 सौ रुपये की सैलरी पर काम करने से लेकर दो सौ करोड़ की संपत्ति बनाने तक के बारे में बताया।
पाश्चात्य सभ्यता से रहें दूर
श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल चोटीपुरा अमरोहा की आचार्य सुमेधा का कहना था कि विद्यार्थियों का विकास मातृभाषा, सभ्यता और संस्कृति ज्ञान से ही हो सकता है। जो विद्यार्थी ऐसे परिदृश्य में विकसित होते हैं, उनमें राष्ट्रवाद, देश के प्रति समर्पण, संस्कृति के उन्नयन के लिए दर्शन का भाव होता है। पश्चिमी सभ्यता की चकाचौंध से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने गुरुकुल की स्थापना, छात्राओं को संस्कृति और संस्कृत शिक्षा के बारे में बताया।
विवि को इन परियोजनाओं की मिली सौगात
रोहिलखंड इंक्यूबेशन फाउंडेशन : सेक्शन 8 कंपनी के तहत आरआईएफ स्थापित हुआ है। उद्यम के लिए नवाचार को बढ़ावा देने, नए स्टार्टअप शुरू करने के लिए पेटेंट से लेकर फर्म स्थापना तक का सहयोग इसके जरिये दिया जाएगा। 35 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं।डिजिटल पांचाल म्यूजियम : पांचाल म्यूजियम की स्थापना विश्वविद्यालय में 30 साल पहले हुई थी। अब इसे डिजिटल स्वरूप प्रदान किया गया है। वर्चुअल रियलिटी के जरिये दर्शकों को म्यूजियम में रखी कलाकृतियों को देखने व उनके बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
स्टूडेंट ई-कॉर्नर : विद्यार्थियों की सहूलियत व ऑनलाइन सेवा मुहैया कराने के लिए स्टूडेंट ई-कॉर्नर स्थापित हुआ है। साथ ही, एक निजी बैंक के जरिये एटीएम, पास बुक अपडेशन और कैश मशीन लगाई गई है। वहीं, ई-चार्जिंग स्टेशन भी शुरू हो गया है।
विश्वविद्यालय छात्र सहायता केंद्र : विद्यार्थियों की समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए अब एक ही भवन में उनको एनएसएस, विश्वविद्यालय एल्युमिनाई, चीफ प्रॉक्टर और डीएसडब्ल्यू की सेवाएं मिलेंगी, ताकि उन्हें समाधान के लिए चक्कर न काटना पड़े।
डायरेक्टोरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस : डीआईआर के जरिये विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय स्तर के एमओयू की निगरानी की जाएगी। एकेडमिक, कल्चरल, विद्यार्थियों और शिक्षकों के पठन-पाठन आदि को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी यह विभाग संभालेगा।
माइक्रो इरिगेशन सिस्टम : कुलपति आवास के सामने स्थित स्मृति उपवन में रोपित पौधों की सिंचाई के लिए स्प्रिंकलर की व्यवस्था शुरू हुई है, ताकि सिंचाई के दौरान पानी की बर्बादी न हो। यह सिस्टम लागू करने वाला रुहेलखंड विश्वविद्यालय पहला राज्य विवि है।