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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Government focus on development rather than interfere in Sharia

शरई मसलों में दखल के बजाय विकास पर ध्यान दे सरकार

Thu, 20 Oct 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Thu, 20 Oct 2016 01:03 AM IST
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सामान नागरिक संहिता और तलाक मामले में देश भर में चल रही चर्चा के बीच बनारस में महिलाओं ने तीन तलाक के विरोध में आंदोलन किया। वहीं दूसरी ओर बरेली की मुस्लिम महिलाओं ने शरीयत में हस्तक्षेप को धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया है। उनका कहना है कि सरकारों को शरई मसलों में दखलअंदाजी और बयानबाजी के बजाय देश के विकास और सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
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मदरसा जमीतुर बनात बरकाते फातिमा और बरेली हज सेवा समिति की ओर से बुधवार को परतापुर के मदरसे में हुई बैठक आलिमा रुकसाना फात्मा ने कहा कि शरई कानून में बदलाव किसी भी सूरत में मंजूर नहीं। कुरान और हदीस में हर मसले का हल है इसलिए किसी बदलाव की कोई जरूरत ही नहीं है। आलिमा आयशा फात्मा नूरी ने कहा कि शरीयत ने औरतों को निकाह में मर्जी की ताकत दी है तो मर्दों को मजबूरी में निकाह तोड़ने यानी तलाक का हक दिया है। अल्लाह ने अपने बनाए कानून में सबसे ज्यादा नापसंद तलाक को किया है जो कि सिर्फ  मजबूरी में जब कोई भी सुलह का रास्ता बाकी न रह जाने पर इस्तेमाल करने का हुक्म है। विपरीत परिस्थितियों में यदि औरत को तलाक नहीं दिया जाता तो मर्दों का गुस्सा उसकी जान पर आ सकता है।
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आमिला अशमत ताहिरा और आलिमा शहनाज फात्मा ने कहा कि आज चंद औरतें जिन्हें दीन की मालूमात की कमी है और लोगों के बहकावे में आकर शरीयत के खिलाफ  ब्यान दे देती है उन्हें इससे बचना चाहिए और हदीस व कुरान की जानकारी हासिल करना चाहिए। सारी कायनात का निजाम कुरान शरीफ  में मौजूद है। आलिमा नाजरीन ने कहा कि सरकार ऐसी चीजों पर प्रतिबंध लगाए जो जुल्म को बढ़ावा देती है। शराब, सट्टा बाजारी, स्मेक, वेश्यावृत्ति, काला बाजारी, भ्रष्टाचार आदि को जड़ से मिटाया जाए। अवाम को खुशहाल जीवन यापन करने के लिए रोजगार के साधन उपलब्ध कराए और हम सबकी अच्छी तालीम के लिए साधन हों।
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बैठक मौलाना उमर रजा, मौलाना हामिद रजा, हाफिज इमरान रजा बरकाती, बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खां वारसी के संरक्षण में हुई। इसमें आलिमा गुलफशां, आलिमा राबिया हुमैरा, आसिया, रुकसाना फात्मा, आयशा फात्मा नूरी, नगीना फात्मा, नाजरीन, गुलजार फात्मा, शबनम, रबीना, शाजिया, फिरदौस फात्मा, करिश्मा, गुलफिशा, गुलनूर आदि सहित बड़ी संख्या में आलिमा मौजूद रहीं।
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