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ईश्वर को अभिमान कतई पसंद नहीं
Fri, 17 Dec 2021 01:30 AM IST
बरेली ब्यूरो
डॉ. पवन चंद्र
डॉ. पवन चंद्र
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:30 AM IST
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कथा सुनातीं शिवांगी।
- फोटो : प्रतीकात्मक ।
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बिहारीपुर कहरवान में कथा व्यास शिवांगी की श्रीमद्भागवत कथा का पांचवां दिन
बरेली। बिहारीपुर कहरवान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन महाराज की कथा सुनाई गई।
कथा व्यास शिवांगी ने कहा कि भगवान को अभिमान कतई पसंद नहीं। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उनको मारने के लिए पूतना को भेजता है। पूतना वेष बदलकर श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको ही मोक्ष दे देते हैं।
शिवांगी ने कहा कि उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। श्रीकृष्ण उनको भगवान इंद्र का पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज का पूजन करने को कहते हैं। इंद्र यह बात जानकर क्रोधित हो जाते हैं और तेज बारिश होने लगती है। पूरा ब्रज बारिश में डूबने लगता है। समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं।
शिवांगी ने बताया कि तब भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद बारिश को रोक देते हैं। इस तरह भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभियान चूर कर देते हैं। इसके बाद ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
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बरेली। बिहारीपुर कहरवान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन गोवर्धन महाराज की कथा सुनाई गई।
कथा व्यास शिवांगी ने कहा कि भगवान को अभिमान कतई पसंद नहीं। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उनको मारने के लिए पूतना को भेजता है। पूतना वेष बदलकर श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसको ही मोक्ष दे देते हैं।
शिवांगी ने कहा कि उसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते हैं। श्रीकृष्ण उनको भगवान इंद्र का पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज का पूजन करने को कहते हैं। इंद्र यह बात जानकर क्रोधित हो जाते हैं और तेज बारिश होने लगती है। पूरा ब्रज बारिश में डूबने लगता है। समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं।
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शिवांगी ने बताया कि तब भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद बारिश को रोक देते हैं। इस तरह भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभियान चूर कर देते हैं। इसके बाद ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
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