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गरीबों पर बढ़ा इलाज का बोझ, डॉक्टरों ने 20 से 25 फीसदी तक बढ़ाया परामर्श शुल्क

Sun, 17 Dec 2017 02:22 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sun, 17 Dec 2017 02:22 AM IST
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प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज कराना अब और महंगा हो गया है। शहर के डॉक्टरों ने यकायक अपनी ओपीडी की फीस 20 से 25 फीसदी तक बढ़ा दी है। फीस बढ़ाने के पीछे जो तर्क दिया जा रहा है, वह भी कुछ अजब सा है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने बिजली की दरों में 18 फीसदी की वृद्धि कर दी है। इससे पहले पिछले ही साल उन्होंने अपने कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ाया है। ऐसे में ओपीडी की फीस बढ़ाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। बहरहाल, अचानक ओपीडी फीस में अच्छी-खासी वृद्धि कर दिए जाने के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर बरेली के स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब कर ली है।
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बरेली के 200 से अधिक प्राइवेट क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत हैं। इनमें कुछ समय पहले तक पांच से सात दिन के पर्चे न्यूनतम 200 से लेकर अधिकतम 800 रुपये तक में बनाए जा रहे थे। अब यह फीस बढ़ाकर 300 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक कर दी गई है। कुछ डॉक्टरों ने तो अपना परामर्श शुल्क 300 रुपये से सीधे बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया है। इसी तरह इमरजेंसी फीस 600 रुपये से बढ़ाकर 800 से 900 रुपये तक कर दी है। यही नहीं, जो पर्चा पहले सात दिनों के लिए मान्य हुआ करता था, कुछ डॉक्टरों ने उसकी समयसीमा भी घटाकर अब पांच दिन कर दी है। कंसल्टेंसी फीस बढ़ाने के पीछे निजी डॉक्टरों का तर्क है कि बिजली के रेट शनिवार से ही 18 फीसदी बढ़ गए हैं। क्लीनिक और अस्पताल का बिल हजारों में आता है। कमाने वाला सिर्फ डॉक्टर ही होता है। वह कैसे इसकी भरपाई करेगा। बहरहाल इस मामले में मरीजों की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय के पोर्टल पर शिकायत की गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि डॉक्टरों की फीस में काफी असंतुलन है। एक ही विशेषज्ञता के डॉक्टरों की फीस अलग-अलग है। मुख्यमंत्री कार्यालय से आई इस शिकायत पर एडी हेल्थ ने सीएमओ से रिपोर्ट मांगी है।
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इनकम टैक्स का अता-पता नहीं
शहर के कई डॉक्टर मरीजों को परामर्श शुल्क की रसीद नहीं देते हैं। जाहिर है कि ओपीडी से होने वाली आय का उनके क्लीनिक पर कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है, लिहाजा आयकर का भुगतान भी मनमाने ढंग से होता है। जिले में कई डॉक्टराें के खिलाफ आयकर विभाग के पास ऐसी शिकायतें पहुंची हैं जो ओपीडी तो सैकड़ों मरीजों की करते हैं, लेकिन रसीद नाममात्र के मरीजों को दी जाती हैं।
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इमरजेंसी के नाम पर मनमानी
शहर के डॉक्टर सामान्य श्रेणी के मरीजों को भी इमरजेंसी में देखने के नाम पर मनमानी फीस वसूल कर लेते हैं। जो रोगी ओपीडी में लगने वाली लंबी लाइन से बचना चाहते हैं, उन्हें इमरजेंसी फीस लेकर अलग से देख लिया जाता है। कुछ डॉक्टरों के यहां ओपीडी में अर्जेंट दिखाने के लिए 300 से 400 रुपये ज्यादा देने पड़ते हैं।

हर माह 15 करोड़ की ओपीडी
जिले भर में डॉक्टर हर दिन औसतन 50 लाख रुपये से ज्यादा ओपीडी में आने वाले रोगियों से सिर्फ परामर्श शुल्क वसूलते हैं। यानी हर माह 15 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार मेडिकल क्षेत्र में सिर्फ मरीज देखने के नाम पर हो रहा है। दवाओं आदि पर अन्य खर्चे अलग से हैं।

प्रतिदिन ओपीडी का ब्योरा
विशेषज्ञ        क्लीनिक ओपीडी/इमरजेंसी    परामर्श शुल्क
ईएनटी          35        1600                100-500
नेत्र              50        2000                200-300
आर्थो            68        2720                300-400
सर्जरी            55        2200                300-500
न्यूरो             20        200                  500-1100
त्वचा           12        800                  500-600
फिजीशियन    88        5280                 250-300
बाल रोग       75        1775                200-300
स्त्री रोग         80        2115                300
दंत विशेषज्ञ   55        1650                150-250
(नोट- विशेषज्ञों की क्लीनिक के अनुमानित आंकड़े स्वास्थ्य विभाग व आईएमए के चिकित्सकों के अनुसार है। ओपीडी व इमरजेंसी का आंकलन न्यूनतम मरीजों के अनुसार है। परामर्श शुल्क रुपये में।)

कोट
बरेली में सबसे ज्यादा डॉक्टर चैरिटी के तौर पर मरीजों और गरीबों की सेवा करते हैं। वे अपनी फीस सुविधा, अनुभव और खर्च को देखते हुए बढ़ाते हैं। हो सकता है कि कुछ डॉक्टरों ने फीस बढ़ाई हो। शुल्क निर्धारण में आईएमए कोई हस्तक्षेप नहीं करती है। - डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, अध्यक्ष आईएमए


प्राइवेट डॉक्टरों की फीस पर स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। मनमानी की कई शिकायतें मिली हैं, इस मामले में शासन को पत्र लिखा गया है। मुख्यमंत्री से हुई शिकायत के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। - डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ 
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