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Bareilly News: सोबती की छत्रपाल के नाम डोहरा में खरीदी गई बेनामी संपत्ति फ्रीज
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बरेली। सहायक आयकर आयुक्त (बेनामी निषेध यूनिट-दो) नई दिल्ली के आदेश पर जिला प्रशासन ने चरण पाल सिंह सोबती की बेनामी 18 बीघा अचल संपत्ति फ्रीज कर दी है। यह कार्रवाई आरंभिक अधिकारी/सहायक आयकर आयुक्त मच्चिता मलिक के आदेश पर जिला प्रशासन की ओर से उप निबंधक-प्रथम ने की है।
सहायक आयकर आयुक्त ने 13 अक्तूबर को जारी अपने आदेश में डीएम को सोबती के विरुद्ध जांच में मिले तथ्यों से अवगत कराया है। संबंधित संपत्ति की आरोपी बिक्री न कर दे, इस संदेह में सदर तहसील के डोहरा गांव के विभिन्न गाटों पर मौजूद बेनामी कुल 18 बीघा जमीन की खरीद-बिक्री को प्रतिबंधित करने के लिए भी कहा। इसके क्रम में उप निबंधक प्रथम रवि प्रकाश वर्मा ने उक्त संपत्ति को फ्रीज किया है।
बरेली के 80-ए मॉडल टाउन निवासी चरण पाल सिंह सोबती अस्थाई रूप से नई दिल्ली के नारायण विहार में रहता है। वह नई दिल्ली के करोल बाग में स्थित फर्म मेसर्स यूनिट्रूथ प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक भी है। सहायक आयकर आयुक्त की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सोबती के काले कारनामों की कहनी का विस्तार से वर्णन है।
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इसके मुताबिक, सोबती ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के चक्कर में अनपढ़ छत्रपाल का प्रयोग किया। उसने छत्रपाल के नाम से बरेली की सदर तहसील और रामपुर जिले की बिलासपुर तहसील क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों की खरीदारी की है।
पोल खुली तो सोबती ने छत्रपाल को अविवाहित और उनके कोई वारिस न होने की बात दर्शाकर जमीन को वरासत में पाना दिखा दिया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बरेली में सदर तहसील के गांव डोहरा, हरुनगला, मूला व अन्य स्थानों पर छात्रपाल सिंह के नाम से सोबती ने बेनामी संपत्तियां खरीदी थीं। जिसे उसने वसीयत के रूप में नौ अगस्त 2017 को अपने नाम करा लिया। संवाद
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छत्रपाल ने खोला था सोबती का काला चिट्ठा
सहायक आयकर आयुक्त की जांच में मामला सामने आने पर नोटिस का जवाब छत्रपाल ने आठ फरवरी 2020 को दिया था। जिसमें उसने चरणपाल के काले कारनामों का पूरा चिट्ठा खोल दिया था। इसके बाद सहायक आयकर आयुक्त के तीसरे नोटिस पर चरणपाल सिंह सोबती ने प्रतिक्रिया वाद दायर किया। जिसमें उसने 18 अगस्त 2020 को छत्रपाल की मृत्यु होना और अविवाहित होने से उनके कोई वारिस न होने का दावा किया था। जांच में पुष्टि हुई है कि सोबती ने छत्रपाल सिंह के नाम से बरेली के डोहरा गांव में 18 बीघे जमीन खरीदी है। इसके अलावा रामपुर जिले के बिलासपुर में भी जमीन की खरीद-फरोख्त की है। यही नहीं, उसने छत्रपाल के नाम से विभिन्न बैंकों में खाते भी खुलवाए हैं।
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विवाहित थे छत्रपाल, गरीबी झेल रहा परिवार
सदर तहसील की औंध ग्राम पंचायत के प्रधान राहुल सिंह ने बताया कि छत्रपाल अविवाहित नहीं थे। उनका जमीन के चक्कर में ही सोबती से कुछ विवाद भी हुआ था। उसी वर्ष 2020 के बीच में उनकी मृत्यु भी हो गई थी। प्रधान ने बताया कि छत्रपाल के परिवार में पत्नी मनीषा सिंह और तीन बेटियां शोभा सिंह, राखी सिंह, बबिता सिंह और करीब 18 वर्षीय बेटा विजयपाल सिंह है। प्रधान ने बताया कि मृतक छत्रपाल का परिवार गरीबी का दंश झेल रहा है। चारों बच्चे अविवाहित हैं। इन आश्रितों के पास तीन बीघे पैतृक जमीन है, वह भी खादर में है।
वर्जन
सहायक आयकर आयुक्त के पत्र के अनुपालन में उप निबंधक प्रथम को निर्देश जारी कर दिए हैं। जिस बेनामी संपत्ति की जांच आयकर विभाग कर रहा है, वह जमीन चरणपाल सिंह सोबती बेच न दे, इसके लिए उस जमीन की खरीद-बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। - संतोष कुमार सिंह, एडीएम-वित्त एवं राजस्व
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सहायक आयकर आयुक्त ने 13 अक्तूबर को जारी अपने आदेश में डीएम को सोबती के विरुद्ध जांच में मिले तथ्यों से अवगत कराया है। संबंधित संपत्ति की आरोपी बिक्री न कर दे, इस संदेह में सदर तहसील के डोहरा गांव के विभिन्न गाटों पर मौजूद बेनामी कुल 18 बीघा जमीन की खरीद-बिक्री को प्रतिबंधित करने के लिए भी कहा। इसके क्रम में उप निबंधक प्रथम रवि प्रकाश वर्मा ने उक्त संपत्ति को फ्रीज किया है।
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बरेली के 80-ए मॉडल टाउन निवासी चरण पाल सिंह सोबती अस्थाई रूप से नई दिल्ली के नारायण विहार में रहता है। वह नई दिल्ली के करोल बाग में स्थित फर्म मेसर्स यूनिट्रूथ प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक भी है। सहायक आयकर आयुक्त की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सोबती के काले कारनामों की कहनी का विस्तार से वर्णन है।
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इसके मुताबिक, सोबती ने अपनी काली कमाई को सफेद करने के चक्कर में अनपढ़ छत्रपाल का प्रयोग किया। उसने छत्रपाल के नाम से बरेली की सदर तहसील और रामपुर जिले की बिलासपुर तहसील क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों की खरीदारी की है।
पोल खुली तो सोबती ने छत्रपाल को अविवाहित और उनके कोई वारिस न होने की बात दर्शाकर जमीन को वरासत में पाना दिखा दिया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बरेली में सदर तहसील के गांव डोहरा, हरुनगला, मूला व अन्य स्थानों पर छात्रपाल सिंह के नाम से सोबती ने बेनामी संपत्तियां खरीदी थीं। जिसे उसने वसीयत के रूप में नौ अगस्त 2017 को अपने नाम करा लिया। संवाद
छत्रपाल ने खोला था सोबती का काला चिट्ठा
सहायक आयकर आयुक्त की जांच में मामला सामने आने पर नोटिस का जवाब छत्रपाल ने आठ फरवरी 2020 को दिया था। जिसमें उसने चरणपाल के काले कारनामों का पूरा चिट्ठा खोल दिया था। इसके बाद सहायक आयकर आयुक्त के तीसरे नोटिस पर चरणपाल सिंह सोबती ने प्रतिक्रिया वाद दायर किया। जिसमें उसने 18 अगस्त 2020 को छत्रपाल की मृत्यु होना और अविवाहित होने से उनके कोई वारिस न होने का दावा किया था। जांच में पुष्टि हुई है कि सोबती ने छत्रपाल सिंह के नाम से बरेली के डोहरा गांव में 18 बीघे जमीन खरीदी है। इसके अलावा रामपुर जिले के बिलासपुर में भी जमीन की खरीद-फरोख्त की है। यही नहीं, उसने छत्रपाल के नाम से विभिन्न बैंकों में खाते भी खुलवाए हैं।
विवाहित थे छत्रपाल, गरीबी झेल रहा परिवार
सदर तहसील की औंध ग्राम पंचायत के प्रधान राहुल सिंह ने बताया कि छत्रपाल अविवाहित नहीं थे। उनका जमीन के चक्कर में ही सोबती से कुछ विवाद भी हुआ था। उसी वर्ष 2020 के बीच में उनकी मृत्यु भी हो गई थी। प्रधान ने बताया कि छत्रपाल के परिवार में पत्नी मनीषा सिंह और तीन बेटियां शोभा सिंह, राखी सिंह, बबिता सिंह और करीब 18 वर्षीय बेटा विजयपाल सिंह है। प्रधान ने बताया कि मृतक छत्रपाल का परिवार गरीबी का दंश झेल रहा है। चारों बच्चे अविवाहित हैं। इन आश्रितों के पास तीन बीघे पैतृक जमीन है, वह भी खादर में है।
वर्जन
सहायक आयकर आयुक्त के पत्र के अनुपालन में उप निबंधक प्रथम को निर्देश जारी कर दिए हैं। जिस बेनामी संपत्ति की जांच आयकर विभाग कर रहा है, वह जमीन चरणपाल सिंह सोबती बेच न दे, इसके लिए उस जमीन की खरीद-बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। - संतोष कुमार सिंह, एडीएम-वित्त एवं राजस्व