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Bareilly News: भूमिगत हुए जालसाज, शहर के कई मकानों पर कर चुके कब्जा
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बरेली। इज्जतनगर थाने में दर्ज फर्जीवाड़े के मामले में कातिब और उसके गिरोह की भूमिका सामने आ रही है। केस में कातिब का नाम शामिल होने के साथ ही कई और आरोपियों के नाम जुड़ सकते हैं। कातिब के बारे में पता लगा है कि उसने कोर्ट के जरिए केस कराकर शहर के कई मकानों पर कब्जा कर रखा है। वहीं, रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जालसाज भूमिगत हो गए हैं।
आपस में मुकदमेबाजी कर मकान हड़पने की कोशिश करने वाला गिरोह भूमिगत हो गया है। इज्जतनगर थाने में अशोक कुमार ने अमित, विकास, नावेद और कुबड़ा उर्फ माइकल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। चारों जालसाज अपने आका कातिब के इशारे पर मकान कब्जाने में लगे थे। मदनमोहन शर्मा के साथ मिलकर कोर्ट में अमित ने मुकदमा डाला और अपने पक्ष में आदेश करा लिया। मकान कब्जाने के लिए हथकंडे अपनाने लगे। फर्जी शिकायतें कर दबाव बनाया गया। जब मकान खाली नहीं हुआ तो 20 लाख रुपये मांगने लगे। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद जालसाज भूमिगत हो गए हैं।
मदनमोहन ने जिस बैनामा के जरिये अमित और विकास के नाम एग्रीमेंट किया उन दोनों दस्तावेजों में उसके अलग-अलग हस्ताक्षर हैं। कातिब ने 2022 में दर्ज हुए मुकदमे में झूठी गवाही भी दी है। पुलिस को शक है कि कातिब अपने गुर्गों का इस्तेमाल कर मकान कब्जाने की फिराक में था। वहीं कई लोगों ने यह भी बताया है कि मदनमोहन और कातिब के बीच ब्याज के रुपये का लेनदेन भी था। कातिब बड़े स्तर पर ब्याज पर रुपये उठाने का काम करता है और संपत्ति में विवाद पैदा कर कानूनी दांवपेच में फंसाकर उगाही करता है। गुर्गों की गिरफ्तारी होने पर पूरे खेल से पर्दा उठ सकता है। ब्यूरो
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विवाद को जन्म देकर ऐसे किए बेशकीमती मकानों पर कब्जे
बताते हैं कि संपत्तियों का औने-पौने दाम में एग्रीमेंट करवाकर स्पेसिफिक परफार्मेंस का मुकदमा दायर कर विवाद पैदा करना इनका तरीका है। फिर फौजदारी का मुकदमा करवाकर समझौता और रुपये देने पर मजबूर कर देते हैं। कुछ दिन पहले कातिब ने ग्रीन पार्क के अग्रवाल परिवार पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। उस मामले में भी छह लाख रुपये देकर एग्रीमेंट कराया। हालांकि इज्जतनगर थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद कातिब की चालाकी उसी पर भारी पड़ सकती है। पुलिस जांच कर रही है कि वह कितने मुकदमों में वादी रहा है और सिविल में उसने कितने मुकदमे दर्ज करा रखे हैं। कई मुकदमों की जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। इज्जतनगर थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि कांवड़ यात्रा से फुर्सत मिली है, अब गिरोह पर शिकंजा कसकर गिरफ्तारी करेंगे।
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आपस में मुकदमेबाजी कर मकान हड़पने की कोशिश करने वाला गिरोह भूमिगत हो गया है। इज्जतनगर थाने में अशोक कुमार ने अमित, विकास, नावेद और कुबड़ा उर्फ माइकल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। चारों जालसाज अपने आका कातिब के इशारे पर मकान कब्जाने में लगे थे। मदनमोहन शर्मा के साथ मिलकर कोर्ट में अमित ने मुकदमा डाला और अपने पक्ष में आदेश करा लिया। मकान कब्जाने के लिए हथकंडे अपनाने लगे। फर्जी शिकायतें कर दबाव बनाया गया। जब मकान खाली नहीं हुआ तो 20 लाख रुपये मांगने लगे। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद जालसाज भूमिगत हो गए हैं।
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मदनमोहन ने जिस बैनामा के जरिये अमित और विकास के नाम एग्रीमेंट किया उन दोनों दस्तावेजों में उसके अलग-अलग हस्ताक्षर हैं। कातिब ने 2022 में दर्ज हुए मुकदमे में झूठी गवाही भी दी है। पुलिस को शक है कि कातिब अपने गुर्गों का इस्तेमाल कर मकान कब्जाने की फिराक में था। वहीं कई लोगों ने यह भी बताया है कि मदनमोहन और कातिब के बीच ब्याज के रुपये का लेनदेन भी था। कातिब बड़े स्तर पर ब्याज पर रुपये उठाने का काम करता है और संपत्ति में विवाद पैदा कर कानूनी दांवपेच में फंसाकर उगाही करता है। गुर्गों की गिरफ्तारी होने पर पूरे खेल से पर्दा उठ सकता है। ब्यूरो
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विवाद को जन्म देकर ऐसे किए बेशकीमती मकानों पर कब्जे
बताते हैं कि संपत्तियों का औने-पौने दाम में एग्रीमेंट करवाकर स्पेसिफिक परफार्मेंस का मुकदमा दायर कर विवाद पैदा करना इनका तरीका है। फिर फौजदारी का मुकदमा करवाकर समझौता और रुपये देने पर मजबूर कर देते हैं। कुछ दिन पहले कातिब ने ग्रीन पार्क के अग्रवाल परिवार पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। उस मामले में भी छह लाख रुपये देकर एग्रीमेंट कराया। हालांकि इज्जतनगर थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद कातिब की चालाकी उसी पर भारी पड़ सकती है। पुलिस जांच कर रही है कि वह कितने मुकदमों में वादी रहा है और सिविल में उसने कितने मुकदमे दर्ज करा रखे हैं। कई मुकदमों की जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। इज्जतनगर थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि कांवड़ यात्रा से फुर्सत मिली है, अब गिरोह पर शिकंजा कसकर गिरफ्तारी करेंगे।